CLASS 6 . HINDI . मल्हार . मातृभूमि कविता-सोहनलाल-द्विवेदी
Chapter 1 : मातृभूमि (कविता) सोहनलाल द्विवेदी
Ch 1
HINDI
CLASS 6
कवि से परिचय
यह कविता हिंदी के प्रसिद्ध कवि सोहनलाल द्विवेदी द्वारा रचित है। सोहनलाल द्विवेदी का जन्म लगभग सवा सौ वर्ष पूर्व हुआ था, जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से अंग्रेजों के विरुद्ध आवाज उठाई और देशभक्ति को अपने काव्य का मुख्य विषय बनाया। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'बढ़े चलो, बढ़े चलो' और 'कोशिश करने वालों की हार नहीं होती' शामिल हैं। उनकी कविताओं में भारत के गौरव और मातृभूमि के प्रति गहरा प्रेम झलकता है।
मुख्य बिंदु
- सोहनलाल द्विवेदी का जीवन परिचय
- उनकी लेखनी का विषय - देशभक्ति
- प्रमुख रचनाएँ
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"उनकी लेखनी का सबसे प्रिय विषय था 'देशभक्ति'।"
अभ्यास प्रश्न
- सोहनलाल द्विवेदी का जन्म कब और किस समय हुआ था?
- उनकी लेखनी का मुख्य विषय क्या था?
- उनकी कौन-कौन सी प्रमुख रचनाएँ हैं?
उत्तर कुंजी
- लगभग सवा सौ साल पहले, अंग्रेजों के शासनकाल में।
- देशभक्ति।
- 'बढ़े चलो, बढ़े चलो', 'कोशिश करने वालों की हार नहीं होती'।
शब्दावली
- देशभक्ति: अपने देश के प्रति प्रेम और समर्पण।
- लेखनी: लेखन कला या लेखन की क्षमता।
- गौरव: सम्मान और प्रतिष्ठा।
मातृभूमि
यह कविता भारत की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता का वर्णन करती है। कवि ने हिमालय की ऊँचाई, नदियों की लहराती छटा, और देश की पवित्र भूमि का गौरवपूर्ण चित्र प्रस्तुत किया है। कविता में भारत के महान व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए मातृभूमि के प्रति गहरा प्रेम और सम्मान व्यक्त किया गया है।
मुख्य बिंदु
- हिमालय, गंगा, यमुना, त्रिवेणी जैसी प्राकृतिक सुंदरताएँ
- देश की पवित्रता और धार्मिकता
- भारत के महान व्यक्तित्व जैसे रघुपति, सीता, श्रीकृष्ण, गौतम बुद्ध का उल्लेख
- मातृभूमि के प्रति प्रेम और सम्मान
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है, नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है।"
"वह पुण्य-भूमि मेरी, वह स्वर्ण-भूमि मेरी। वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: कविता में हिमालय का क्या महत्व दर्शाया गया है?
उत्तर: कविता में हिमालय को ऊँचा और आकाश को छूता हुआ बताया गया है, जो देश की महानता और उसकी पवित्रता का प्रतीक है। यह देश की शक्ति और गौरव का प्रतिनिधित्व करता है।
अभ्यास प्रश्न
- स्तर 1 – सरल: कविता में कौन-कौन सी नदियाँ वर्णित हैं?
- स्तर 2 – मध्यम: कविता में मातृभूमि के प्रति कवि की भावनाएँ क्या हैं?
- स्तर 3 – कठिन: कविता में भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व को कैसे दर्शाया गया है?
उत्तर कुंजी
- गंगा, यमुना, त्रिवेणी।
- कवि मातृभूमि को पुण्यभूमि, स्वर्णभूमि, धर्मभूमि और कर्मभूमि मानते हैं और उससे गहरा प्रेम करते हैं।
- कवि ने रघुपति, सीता, श्रीकृष्ण और गौतम बुद्ध जैसे महान व्यक्तित्वों का उल्लेख कर भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया है।
शब्दावली
- पुण्यभूमि: पवित्र भूमि।
- स्वर्णभूमि: सोने के समान मूल्यवान भूमि।
- धर्मभूमि: धार्मिकता से परिपूर्ण भूमि।
- कर्मभूमि: कर्म करने की भूमि।
- त्रिवेणी: तीन नदियों का संगम।
