CLASS 6 . HINDI . मल्हार . रहीम के-दोहे-अब्दुर्रहीम-खानखाना
Chapter 7 : रहीम के दोहे (अब्दुर्रहीम खानखाना)
Ch 7
HINDI
CLASS 6
कवि से परिचय
रहीम भक्तिकाल के एक प्रसिद्ध कवि थे। ऐसा माना जाता है कि उनका जन्म 16वीं शताब्दी में हुआ था। उन्होंने नीति, भक्ति और प्रेम संबंधी रचनाएँ कीं। रहीम ने अवधी और ब्रजभाषा दोनों में कविताएँ लिखी हैं। वे रामायण, महाभारत जैसे प्रसिद्ध ग्रंथों के अच्छे जानकार थे। उनकी मृत्यु 17वीं शताब्दी में हुई थी। आज भी आम जन-जीवन में उनके दोहे बहुत लोकप्रिय हैं।
मुख्य बिंदु
- भक्तिकाल के प्रमुख कवि
- 16वीं शताब्दी में जन्म
- नीति, भक्ति, प्रेम पर रचनाएँ
- अवधी और ब्रजभाषा में लेखन
- रामायण, महाभारत के ज्ञाता
- लोकप्रिय दोहे जो आज भी प्रचलित हैं
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
रहीम के दोहे जीवन के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन करते हैं और आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।
अभ्यास प्रश्न
- रहीम किस काल के कवि थे?
- रहीम की कविताओं के मुख्य विषय क्या हैं?
- रहीम ने किन भाषाओं में कविताएँ लिखीं?
उत्तर कुंजी
- रहीम भक्तिकाल के कवि थे।
- उनकी कविताओं के मुख्य विषय नीति, भक्ति और प्रेम हैं।
- उन्होंने अवधी और ब्रजभाषा में कविताएँ लिखीं।
शब्दावली
- भक्तिकाल: वह काल जब भक्ति साहित्य का विकास हुआ।
- नीति: जीवन के नियम और सदाचार।
- अवधी: उत्तर भारत की एक क्षेत्रीय भाषा।
- ब्रजभाषा: भगवान कृष्ण की भाषा, हिंदी की एक उपभाषा।
रहीम के दोहे
रहीम के दोहे सरल भाषा में जीवन के गूढ़ सत्य बताते हैं। वे नीति और व्यवहार के नियमों को संक्षिप्त और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनके दोहे आज भी जीवन में मार्गदर्शन करते हैं।
मुख्य बिंदु
- सरल और प्रभावशाली भाषा
- जीवन के व्यवहारिक नियम
- प्रेम, नीति और भक्ति के संदेश
- प्रसिद्ध दोहे और उनका अर्थ
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
- रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥
- तरुवर फल नहिं खात हैं सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥
- रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥
- रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥
- रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥
- रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥
- कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: "रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।" इस दोहे का अर्थ समझाइए।
उत्तर: यह दोहा प्रेम के धागे को टूटने से बचाने की सलाह देता है। प्रेम को न तोड़ना चाहिए क्योंकि टूटने पर उसे फिर जोड़ना मुश्किल होता है। यह प्रेम की नाजुकता और उसकी महत्ता को दर्शाता है।
अभ्यास प्रश्न
- रहीम के दोहों में किस प्रकार के संदेश मिलते हैं?
- "रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।" इस दोहे का क्या अर्थ है?
- रहीम के दोहों में प्रेम का क्या स्थान है?
उत्तर कुंजी
- रहीम के दोहे जीवन के व्यवहारिक और नैतिक संदेश देते हैं।
- यह दोहा बताता है कि पानी के बिना सब सूना है, इसलिए पानी का महत्व है।
- प्रेम को दोहों में बहुत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, जो जीवन का आधार है।
शब्दावली
- दोहे: दो पंक्तियों वाली कविता।
- धागा: प्रेम या संबंध का प्रतीक।
- साँचे मीत: सच्चा मित्र जो विपत्ति में पहचाना जाता है।
- बिपति: संकट या कठिनाई।