CLASS 6 . HINDI . मल्हार . पेड़ की-बात-निबंध-जगदीशचंद्र-बसु
Chapter 17 : पेड़ की बात (निबंध) जगदीशचंद्र बसु
Ch 17
HINDI
CLASS 6
लेखक से परिचय
जगदीशचंद्र बसु एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिनका बचपन प्रकृति के अवलोकन में बीता। वे पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं से प्रेम करते थे और उनकी शिक्षा इसी प्रेम के साथ प्रारंभ हुई। वे जीवविज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान तथा विज्ञान कथा लेखन में रुचि रखने वाले बहुविद व्यक्ति थे। उन्होंने यह सिद्ध किया कि पौधों का एक निश्चित जीवनचक्र और प्रजनन प्रणाली होती है तथा वे अपने परिवेश के प्रति जागरूक होते हैं। जगदीशचंद्र बसु ने यह स्थापित किया कि पौधे किसी भी अन्य जीव रूप के समान होते हैं। विज्ञान को चित्रात्मक साहित्यिक स्वरूप में प्रस्तुत करते हुए उन्होंने रेडियो तरंगों के द्वारा संचार स्थापित कर एक बड़ी वैज्ञानिक खोज की। 'पेड़ की बात' का हिंदी में अनुवाद शंकर सेन ने किया है।
मुख्य बिंदु
- प्रकृति से प्रेम और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- पौधों के जीवनचक्र और प्रजनन प्रणाली का अध्ययन
- विज्ञान को साहित्य में प्रस्तुत करना
- रेडियो तरंगों के माध्यम से संचार की खोज
- अनुवादक: शंकर सेन
पाठ्य प्रमाण
"प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु का बचपन प्रकृति का अवलोकन करते हुए बीता।"
अभ्यास प्रश्न
- जगदीशचंद्र बसु के बचपन की विशेषता क्या थी?
- उन्होंने विज्ञान के किस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया?
- पेड़ की बात का हिंदी में अनुवाद किसने किया?
उत्तर कुंजी
- उनका बचपन प्रकृति के अवलोकन में बीता।
- उन्होंने जीवविज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान में योगदान दिया।
- शंकर सेन ने अनुवाद किया।
शब्दावली
- जीवविज्ञान: जीवों का अध्ययन
- प्रजनन प्रणाली: जीवन के नए रूपों का निर्माण
- रेडियो तरंगें: संचार के लिए उपयोगी तरंगें
पेड़ की बात का सारांश
यह निबंध बीज से पेड़ बनने की प्रक्रिया को सरल और रोचक भाषा में प्रस्तुत करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे बीज अंकुरित होकर पौधा बनता है, जड़ और तना कैसे विकसित होते हैं, पेड़-पौधे प्रकाश और जल से अपना भोजन करते हैं, और अंत में संतान छोड़ने के बाद पेड़ का जीवन समाप्त हो जाता है।
मुख्य बिंदु
- बीज से अंकुरण और पौधे का विकास
- जड़ और तना का महत्व
- पेड़-पौधों का भोजन ग्रहण करने का तरीका
- प्रकाश की आवश्यकता और प्रकाश की ओर बढ़ना
- फूलों का महत्व और परागण प्रक्रिया
- पेड़ का जीवन चक्र और संतान के लिए त्याग
पाठ्य प्रमाण
"आहिस्ता-आहिस्ता बीज का ढक्कन दरक गया, दो सुकोमल पत्तियों के बीच अंकुर बाहर निकला।"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: पेड़-पौधे प्रकाश की ओर क्यों बढ़ते हैं?
उत्तर: पेड़-पौधे प्रकाश चाहते हैं क्योंकि प्रकाश उनके जीवन का मूलमंत्र है। प्रकाश न मिलने पर वे जीवित नहीं रह सकते। इसलिए वे अपनी पत्तियाँ और डालियाँ प्रकाश की ओर बढ़ाते हैं।
अभ्यास प्रश्न
- बीज से पौधे के बनने की प्रक्रिया को संक्षेप में बताइए।
- पेड़-पौधों में जड़ और तना का क्या महत्व है?
- पेड़-पौधे प्रकाश की ओर कैसे बढ़ते हैं और इसका कारण क्या है?
- फूलों का पेड़ के जीवन में क्या स्थान है?
- पेड़ अपने जीवन का अंत कैसे करते हैं?
उत्तर कुंजी
- बीज अंकुरित होकर पौधा बनता है।
- जड़ पौधे को माटी से रस पान करने में मदद करती है और तना ऊपर की ओर बढ़ता है।
- प्रकाश जीवन के लिए आवश्यक है, इसलिए पेड़ प्रकाश की ओर बढ़ते हैं।
- फूल संतान की सुरक्षा और आकर्षण के लिए होते हैं।
- पेड़ संतान छोड़ने के बाद अपना जीवन समाप्त कर देते हैं।
शब्दावली
- अंकुर: बीज से निकला नया पौधा
- जड़: पौधे का वह भाग जो माटी में रहता है
- तना: पौधे का ऊपर की ओर बढ़ने वाला भाग
- परागण: फूलों के पराग कणों का स्थानांतरण
- प्रकाश: सूर्य की किरणें जो जीवन के लिए आवश्यक हैं
