CLASS 12-PCM . HINDI . अभिव्यक्ति और माध्यम भाग 2 . पत्रकारीय लेखन-के-विभिन्न-रूप-और-लेखन-प्रक्रिया
Chapter 2 : पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
Ch 2
HINDI
CLASS 12-PCM
पत्रकारीय लेखन का परिचय
पत्रकारीय लेखन वह लेखन है जो समाचारपत्रों, पत्रिकाओं और अन्य जनसंचार माध्यमों में प्रकाशित होता है। इसका उद्देश्य पाठकों को सूचना देना, जागरूक करना, शिक्षित करना और मनोरंजन प्रदान करना होता है। यह लेखन समाज में जनमत निर्माण और लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्य बिंदु
- पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप: समाचार, फीचर, विशेष रिपोर्ट, लेख, टिप्पणियाँ, संपादकीय, स्तंभ, साक्षात्कार आदि।
- पत्रकार तीन प्रकार के होते हैं: पूर्णकालिक, अंशकालिक (स्ट्रिंगर), और स्वतंत्र (फ्रीलांसर)।
- पत्रकारीय लेखन का संबंध समसामयिक, वास्तविक घटनाओं और तथ्यों से होता है।
- पत्रकारीय लेखन में भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावी होनी चाहिए।
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
महात्मा गांधी का उद्धरण: "समाचारपत्रों में बड़ी शक्ति है, ठीक वैसी ही जैसी कि पानी के ज़बरदस्त प्रवाह में होती है। इसे खुला छोड़ देंगे तो गाँव के गाँव बहा देगा। उसी तरह निरंकुश कलम समाज के विनाश का कारण बन सकती है। लेकिन अंकुश भीतर का होना चाहिए, बाहर का अंकुश तो और भी ज़हरीला होगा।"
अभ्यास प्रश्न
- पत्रकारीय लेखन क्या है? इसके मुख्य उद्देश्य बताइए।
- पत्रकारिता में पत्रकारों के प्रकार कौन-कौन से होते हैं?
- पत्रकारीय लेखन में भाषा की क्या विशेषताएँ होनी चाहिए?
उत्तर कुंजी
- पत्रकारीय लेखन वह लेखन है जो समाचार, फीचर, रिपोर्ट आदि के माध्यम से सूचना, जागरूकता और मनोरंजन प्रदान करता है।
- पत्रकार पूर्णकालिक, अंशकालिक और स्वतंत्र होते हैं।
- भाषा सरल, स्पष्ट, प्रभावी और पाठकों के लिए सहज होनी चाहिए।
त्वरित संदर्भ
पत्रकारीय लेखन समाज में सूचना और विचारों का संप्रेषण करता है।
शब्दावली
- पत्रकारीय लेखन: जनसंचार माध्यमों में प्रकाशित लेखन।
- फ्रीलांसर: स्वतंत्र पत्रकार जो विभिन्न अखबारों के लिए लिखते हैं।
- संपादकीय: अखबार का आधिकारिक विचार।
समाचार लेखन और उलटा पिरामिड शैली
समाचार लेखन में उलटा पिरामिड शैली का प्रयोग होता है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण सूचना सबसे पहले दी जाती है। इसके बाद कम महत्वपूर्ण जानकारी क्रमशः प्रस्तुत की जाती है। यह शैली 19वीं सदी के मध्य में विकसित हुई और आज समाचार लेखन की मानक शैली है।
मुख्य बिंदु
- उलटा पिरामिड शैली में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य पहले पैराग्राफ में होते हैं।
- समाचार लेखन में छह ककारों—क्या, कौन, कब, कहाँ, कैसे, क्यों—का ध्यान रखा जाता है।
- पहले चार ककार (क्या, कौन, कब, कहाँ) मुखड़े में और बाकी दो (कैसे, क्यों) समाचार की बॉडी में शामिल होते हैं।
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
मास्को में छत ढहने की घटना पर समाचार जिसमें शीर्षक, इंट्रो और बॉडी में छह ककारों का समावेश है।
अभ्यास प्रश्न
- उलटा पिरामिड शैली क्या है? इसे क्यों अपनाया जाता है?
- समाचार लेखन में छह ककार कौन-कौन से हैं? उनका महत्व समझाइए।
- समाचार के मुखड़े और बॉडी में ककारों का विभाजन कैसे होता है?
उत्तर कुंजी
- उलटा पिरामिड शैली में सबसे महत्वपूर्ण सूचना पहले दी जाती है ताकि जल्दी से खबर समझ आ सके।
- छह ककार हैं: क्या, कौन, कब, कहाँ, कैसे, क्यों। ये समाचार की पूरी जानकारी देते हैं।
- मुखड़े में क्या, कौन, कब, कहाँ होते हैं; बॉडी में कैसे और क्यों शामिल होते हैं।
त्वरित संदर्भ
समाचार लेखन में सूचना का महत्त्वक्रम उलटा पिरामिड शैली से स्पष्ट होता है।
शब्दावली
- उलटा पिरामिड: सूचना का ऐसा क्रम जिसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य पहले होते हैं।
- ककार: प्रश्नवाचक शब्द जो समाचार में जानकारी देते हैं।
फ़ीचर लेखन
फ़ीचर लेखन एक सृजनात्मक, आत्मनिष्ठ और सुव्यवस्थित लेखन शैली है जिसका उद्देश्य सूचना देना, शिक्षित करना और मनोरंजन करना होता है। यह समाचार लेखन से अलग होता है क्योंकि इसमें लेखक अपनी राय और भावनाएँ व्यक्त कर सकता है।
मुख्य बिंदु
- फ़ीचर लेखन में उलटा पिरामिड शैली का प्रयोग नहीं होता।
- भाषा सरल, आकर्षक और मन को छूने वाली होती है।
- फ़ीचर में पात्रों की मौजूदगी और कहानी कहने का अंदाज़ महत्वपूर्ण होता है।
- फ़ीचर के प्रारंभ, मध्य और अंत का सहज प्रवाह होना चाहिए।
- फ़ीचर के कई प्रकार होते हैं जैसे खोजपरक, साक्षात्कार, जीवनशैली, यात्रा आदि।
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
फ़ीचर लेखन के लिए दिए गए सुझाव और एक स्कूल की लाइब्रेरी या खेल के मैदान पर फ़ीचर लिखने की गतिविधि।
अभ्यास प्रश्न
- फ़ीचर लेखन की विशेषताएँ क्या हैं?
- फ़ीचर लेखन में भाषा और शैली कैसी होनी चाहिए?
- फ़ीचर लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर कुंजी
- फ़ीचर लेखन सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ होता है जिसमें लेखक अपनी राय व्यक्त कर सकता है।
- भाषा सरल, आकर्षक और पाठकों को जोड़ने वाली होनी चाहिए।
- पात्रों की मौजूदगी, कहानी कहने का अंदाज़ और सहज प्रवाह जरूरी है।
त्वरित संदर्भ
फ़ीचर लेखन सूचना और मनोरंजन का संयोजन है।
शब्दावली
- फ़ीचर: सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेख।
- खोजपरक रिपोर्ट: गहरी छानबीन पर आधारित रिपोर्ट।
विशेष रिपोर्ट
विशेष रिपोर्ट गहरी छानबीन, विश्लेषण और व्याख्या पर आधारित विस्तृत लेख होते हैं जो किसी घटना, समस्या या मुद्दे को विस्तार से प्रस्तुत करते हैं।
मुख्य बिंदु
- विशेष रिपोर्ट के प्रकार: खोजी रिपोर्ट, इन-डेप्थ रिपोर्ट, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट, विवरणात्मक रिपोर्ट।
- यह रिपोर्टें समाचार लेखन की उलटा पिरामिड शैली या फीचर शैली में लिखी जा सकती हैं।
- रिपोर्ट की भाषा सरल और सहज होनी चाहिए।
- विशेष रिपोर्ट को श्रृंखलाबद्ध करके कई दिनों तक प्रकाशित किया जा सकता है।
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
पी. साईनाथ की "बिरहोरों का विलुप्त होता संसार" विशेष रिपोर्ट।
अभ्यास प्रश्न
- विशेष रिपोर्ट क्या होती है? इसके प्रकार बताइए।
- खोजी रिपोर्ट और इन-डेप्थ रिपोर्ट में क्या अंतर है?
- विशेष रिपोर्ट लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर कुंजी
- विशेष रिपोर्ट गहरी छानबीन और विश्लेषण पर आधारित विस्तृत लेख होते हैं।
- खोजी रिपोर्ट में नए तथ्य सामने लाए जाते हैं, जबकि इन-डेप्थ रिपोर्ट में उपलब्ध तथ्यों की गहरी छानबीन होती है।
- भाषा सरल होनी चाहिए और रिपोर्ट को पाठकों की रुचि बनाए रखने के लिए रोचक बनाना चाहिए।
त्वरित संदर्भ
विशेष रिपोर्ट समाज की गहरी समस्याओं को उजागर करती है।
शब्दावली
- खोजी रिपोर्ट: भ्रष्टाचार आदि की छानबीन पर आधारित रिपोर्ट।
- विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: तथ्यों के विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट।
विचारपरक लेखन
विचारपरक लेखन में संपादकीय, लेख, टिप्पणियाँ, स्तंभ आदि आते हैं जो किसी विषय या मुद्दे पर लेखक के विचार और विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं।
मुख्य बिंदु
- संपादकीय अखबार की आधिकारिक राय होती है, जिसे संपादक या सहायक संपादक लिखते हैं।
- स्तंभ लेखन में लेखक को विषय चुनने और अपनी राय व्यक्त करने की पूरी स्वतंत्रता होती है।
- संपादक के नाम पत्र पाठकों के विचारों को प्रकाशित करते हैं।
- विचारपरक लेखन में भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावी होनी चाहिए।
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
संपादकीय "मूल्यांकन का दायरा" और संपादक के नाम पत्रों के उदाहरण।
अभ्यास प्रश्न
- संपादकीय लेखन क्या है? इसका महत्व बताइए।
- स्तंभ लेखन और संपादक के नाम पत्र में क्या अंतर है?
- विचारपरक लेखन में भाषा की क्या विशेषताएँ होनी चाहिए?
उत्तर कुंजी
- संपादकीय अखबार की आधिकारिक राय होती है जो समाज में जागरूकता फैलाती है।
- स्तंभ लेखन लेखक की व्यक्तिगत राय होती है, जबकि संपादक के नाम पत्र पाठकों के विचार होते हैं।
- भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावी होनी चाहिए ताकि सभी पाठक समझ सकें।
त्वरित संदर्भ
विचारपरक लेखन समाज में विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम है।
शब्दावली
- संपादकीय: अखबार की आधिकारिक राय।
- स्तंभ: नियमित लेख जिसमें लेखक अपनी राय व्यक्त करता है।
- ऑप-एड: संपादकीय के विपरीत विचारों का पृष्ठ।
HINDI — ALL CHAPTERS
1
जनसंचार माध्यम
1
विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
2
पत्रकारिता के विविध आयाम
2
पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
3
डायरी लिखने की कला
3
विशेष लेखन— स्वरूप और प्रकार
4
कथा-पटकथा
4
कैसे बनती है कविता
5
नाटक लिखने का व्याकरण
5
कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया
6
कैसे लिखें कहानी
6
स्ववृत्त(बायोडाटा) लेखन और रोज़गार संबंधी आवेदन पत्र
7
कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण
7
कोश-एक परिचय
8
कैसे बनता है रेडियो नाटक
9
नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
1
आत्मपरिचय
2
एक गीत
3
पतंग
4
कविता के बहाने
5
बात सीधी थी पर
6
कैमरे में बंद अपाहिज
7
उषा
8
बादल राग
9
कवितावली (उत्तर कांड से)
10
लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
11
रुबाइयाँ
12
छोटा मेरा खेत
13
बगुलों के पंख
14
भक्तिन
15
बाज़ार दर्शन
16
काले मेघा पानी दे
17
पहलवान की ढोलक
18
शिरीष के फूल
19
श्रम विभाजन और जाति-प्रथा
20
मेरी कल्पना का आदर्श-समाज
1
सिल्वर वैडिंग
2
जूझ
3
अतीत में दबे पाँव