CLASS 12-PCM . HINDI . आरोह भाग 2 . उषा

Chapter 7 : उषा

Ch 7

HINDI

CLASS 12-PCM

शमशेर का जीवन परिचय

शमशेर का जन्म 13 जनवरी 1911 को देहरादून (जो अब उत्तराखंड में है) हुआ था। वे एक प्रगतिशील और प्रयोगधर्मी कवि थे जिन्होंने हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में अपनी रचनाएँ दीं। उनकी प्रमुख प्रकाशित रचनाओं में "कुछ कविताएँ", "कुछ और कविताएँ", "चुका भी हूँ नहीं मैं", "इतने पास अपने", "बात बोलेगी", "काल तुझसे होड़ है मेरी" और "उर्दू-हिंदी कोश" का संपादन शामिल है। शमशेर को साहित्य अकादेमी और कबीर सम्मान सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनका निधन 1993 में अहमदाबाद में हुआ।

मुख्य बिंदु

  • जन्म: 13 जनवरी 1911, देहरादून
  • प्रकाशित रचनाएँ: कई कविताएँ और कोश संपादन
  • सम्मान: साहित्य अकादेमी, कबीर सम्मान आदि
  • निधन: 1993, अहमदाबाद

शब्दावली

  • प्रगतिशील: जो नवीन विचारों को अपनाता है
  • प्रयोगधर्मी: जो नए प्रयोग करता है

काव्य संस्कृति और शिल्प

शमशेर की कविता उर्दू और हिंदी के दोआब पर खड़ी है। उनकी कविता में साहित्य, चित्रकला और संगीत का समन्वय मिलता है। वे बिंबधर्मी कवि हैं जो शब्दों से रंग, रेखा, स्वर और कूची की कशीदाकारी करते हैं। उनकी कविताएँ माध्यम की सीमाओं को पार कर भाषातीत हो जाना चाहती हैं।

मुख्य बिंदु

  • कविता में बिंबधर्मिता
  • उर्दू शायरी का प्रभाव
  • संज्ञा और विशेषण से अधिक क्रियाओं, सर्वनामों और मुहावरों का प्रयोग
  • प्रेम, पीड़ा, संघर्ष और सृजन का समन्वय
  • कविता का सुनने और देखने का अनुभव

पाठ्य प्रमाण

"ओ माध्यम! क्षमा करना कि मैं तुम्हारे पार जाना चाहता हूँ।"

शब्दावली

  • बिंबधर्मी: जो चित्रात्मक प्रतीकों का प्रयोग करता है
  • माध्यम: कविता या कला का माध्यम

प्रयोगवादी कविता और "उषा" कविता का विश्लेषण

प्रयोगवादी कविता 1943 से प्रारंभ हुई और इसमें नए बिंब, प्रतीक और उपमानों का प्रयोग हुआ। शमशेर की "उषा" कविता सूर्योदय से पहले के परिवर्तित प्रकृति के दृश्य को प्रस्तुत करती है। यह कविता प्रकृति की गति को शब्दों में बाँधने का अद्भुत प्रयास है। कवि भोर के आसमान को जीवन की हलचल से जोड़ता है और गाँव की सुबह के जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है।

मुख्य बिंदु

  • प्रयोगवादी कविता की विशेषताएँ
  • नए बिंब और प्रतीकों का प्रयोग
  • प्रकृति और मानवीय जीवन का समन्वय
  • "उषा" कविता में सूर्योदय से पहले का दृश्य
  • गाँव की सुबह के जीवंत चित्र

पाठ्य प्रमाण

प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका (अभी गीला पड़ा है)
बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से कि जैसे धुल गई हो
स्लेट पर या लाल खड़िया चाक मल दी हो किसी ने
नील जल में या किसी की गौर झिलमिल देह जैसे हिल रही हो।
जादू टूटता है इस उषा का अब सूर्योदय हो रहा है।

अभ्यास प्रश्न

स्तर 1 – सरल

  • शमशेर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
  • "उषा" कविता में सूर्योदय से पहले का कौन सा दृश्य प्रस्तुत किया गया है?
  • प्रयोगवादी कविता में किन नए तत्वों का प्रयोग होता है?

स्तर 2 – मध्यम

  • शमशेर की कविता में उर्दू शायरी का प्रभाव कैसे दिखता है?
  • "उषा" कविता में प्रकृति और मानवीय जीवन का समन्वय कैसे प्रस्तुत हुआ है?

स्तर 3 – कठिन

  • शमशेर की कविता में बिंबधर्मिता का क्या महत्व है? उदाहरण सहित समझाइए।
  • "उषा" कविता में सूर्योदय के साथ गाँव की सुबह के चित्रण का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर कुंजी

  • शमशेर का जन्म 13 जनवरी 1911 को देहरादून हुआ था।
  • "उषा" कविता में सूर्योदय से पहले का नीला आकाश, राख से लीपा हुआ चौका, स्लेट पर चाक से रंग मलते बच्चे आदि दृश्य प्रस्तुत हैं।
  • प्रयोगवादी कविता में नए बिंब, प्रतीक, उपमान और प्रकृति के परिवर्तन को मानवीय जीवन से जोड़ने का प्रयास होता है।
  • शमशेर की कविता में उर्दू शायरी के प्रभाव से सर्वनाम, क्रिया, अव्यय और मुहावरों का अधिक प्रयोग होता है।
  • "उषा" कविता में प्रकृति की गति और मानवीय जीवन की हलचल को जोड़कर जीवंत चित्र प्रस्तुत किए गए हैं।
  • बिंबधर्मिता कविता को अधिक प्रभावशाली और चित्रात्मक बनाती है। शमशेर के शब्द रंग, रेखा, स्वर और कूची की कशीदाकारी करते हैं।
  • गाँव की सुबह के चित्रण में राख से लीपा चौका, स्लेट पर चाक से रंग मलते बच्चे, और सूर्योदय की उजास का वर्णन है जो जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।

त्वरित संदर्भ

  • शमशेर: प्रगतिशील और प्रयोगधर्मी कवि
  • उषा: सूर्योदय से पहले का प्राकृतिक दृश्य
  • बिंबधर्मिता: चित्रात्मक प्रतीकों का प्रयोग
  • प्रयोगवादी कविता: नए बिंब और प्रतीकों का उपयोग

शब्दावली

  • बिंबधर्मी: चित्रात्मक प्रतीकों का प्रयोग करने वाला
  • प्रयोगवादी: नए प्रयोग करने वाला
  • उषा: सुबह की पहली किरण
  • स्लेट: स्कूल में लिखने वाली पट्टी
  • केसर: लाल रंग का मसाला

HINDI — ALL CHAPTERS

1

जनसंचार माध्यम

1

विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन

2

पत्रकारिता के विविध आयाम

2

पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया

3

डायरी लिखने की कला

3

विशेष लेखन— स्वरूप और प्रकार

4

कथा-पटकथा

4

कैसे बनती है कविता

5

नाटक लिखने का व्याकरण

5

कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया

6

कैसे लिखें कहानी

6

स्ववृत्त(बायोडाटा) लेखन और रोज़गार संबंधी आवेदन पत्र

7

कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण

7

कोश-एक परिचय

8

कैसे बनता है रेडियो नाटक

9

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन

1

आत्मपरिचय

2

एक गीत

3

पतंग

4

कविता के बहाने

5

बात सीधी थी पर

6

कैमरे में बंद अपाहिज

7

उषा

8

बादल राग

9

कवितावली (उत्तर कांड से)

10

लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप

11

रुबाइयाँ

12

छोटा मेरा खेत

13

बगुलों के पंख

14

भक्तिन

15

बाज़ार दर्शन

16

काले मेघा पानी दे

17

पहलवान की ढोलक

18

शिरीष के फूल

19

श्रम विभाजन और जाति-प्रथा

20

मेरी कल्पना का आदर्श-समाज

1

सिल्वर वैडिंग

2

जूझ

3

अतीत में दबे पाँव