CLASS 12-PCM . HINDI . अभिव्यक्ति और माध्यम भाग 2 . कैसे बनती-है-कविता
Chapter 4 : कैसे बनती है कविता
Ch 4
HINDI
CLASS 12-PCM
कविता का परिचय
कविता हमारे जीवन में किसी भी क्षण वसंत की तरह आ सकती है। यह माँ, दादी, नानी की जुबानी, लोरी, खेतों की कहानियाँ, बच्चों के खेल और स्कूल में पहली बार बोले गए गीतों से जुड़ी होती है। कविता की यह जानी-पहचानी दुनिया हमें सोचने पर मजबूर करती है कि कविता क्या है और क्यों हर बच्चे की पढ़ाई नर्सरी गानों से शुरू होती है। कविता की जादुई दुनिया संवेदना और राग तत्व से भरी होती है, जो हमारे मन को छूती है और कभी-कभी झकझोर भी देती है।
मुख्य बिंदु
- कविता वाचिक परंपरा से लिखित रूप में आई है।
- कविता की मूल भावना संवेदना और राग तत्व है।
- कविता हमारे मन को छूती है और गहराई से जुड़ती है।
- कविता की जटिलता के बावजूद वह हमारे निकट होती है।
पाठ्य प्रमाण
"मा निषाद! प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वती समाः। यत्क्रौञ्च मिथुनादेकमवधीः काममोहितम्॥"
सुमित्रानंदन पंत की पंक्तियाँ—
"वियोगी होगा पहला कवि आह से उपजा होगा गान। उमड़ कर आँखों से चुपचाप बही होगी कविता अनजाना।।"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: कविता की मूल भावना क्या है?
उत्तर: कविता की मूल भावना संवेदना और राग तत्व है जो हमारे मन को छूती है और कभी-कभी झकझोर भी देती है।
अभ्यास प्रश्न
- कविता की मूल भावना क्या है?
- कविता की वाचिक परंपरा का क्या अर्थ है?
- कविता हमारे मन को कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर कुंजी
- कविता की मूल भावना संवेदना और राग तत्व है।
- वाचिक परंपरा का अर्थ है कि कविता पहले मौखिक रूप में होती थी।
- कविता हमारे मन को छूती है और कभी-कभी झकझोर भी देती है।
त्वरित संदर्भ
- कविता = संवेदना + राग तत्व
- वाचिक परंपरा = मौखिक रूप से प्रचलित कविता
- कविता का प्रभाव = मन को छूना और झकझोरना
शब्दावली
- संवेदना: भावनात्मक अनुभूति।
- राग तत्व: संगीतात्मक भाव।
- वाचिक परंपरा: मौखिक रूप से प्रचलित परंपरा।
कविता की रचना एवं शब्दों का महत्व
कविता रचना की कोई निश्चित प्रणाली नहीं होती, लेकिन शब्दों के साथ खेलना और उनका सही चयन कविता की पहली शर्त है। शब्दों के भीतर कई अर्थ छिपे होते हैं, जिन्हें समझना और उनका सही उपयोग करना कविता की सुंदरता बढ़ाता है। बच्चों के खेल-खेल में गीत रचना इसी रचनात्मकता का उदाहरण है।
मुख्य बिंदु
- कविता में शब्दों का चयन और उनका विन्यास महत्वपूर्ण होता है।
- शब्दों के साथ खेलना कविता की रचना की शुरुआत है।
- शब्दों के अर्थ की परतें खोलना आवश्यक है।
- कविता में वाक्य-संरचना का विशेष महत्त्व होता है।
पाठ्य प्रमाण
रघुवीर सहाय की कविता—
"अगर कहीं मैं तोता होता तोता होता तो क्या होता? तोता होता।"
शमशेर बहादुर सिंह की कविता—
"वाह जी वाह! हमको बुद्धू ही निरा समझा है! ... दम नहीं लेते हैं जब तक बिलकुल ही गोल न हो जाएँ।"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: कविता में शब्दों के साथ खेलने का क्या महत्त्व है?
उत्तर: शब्दों के साथ खेलना कविता की रचना की शुरुआत है और इससे अर्थ के नए आयाम खुलते हैं।
प्रश्न: वाक्य-संरचना कविता में क्यों महत्वपूर्ण होती है?
उत्तर: वाक्य-संरचना से कविता का भाव और अर्थ स्पष्ट होता है।
अभ्यास प्रश्न
- कविता में शब्दों के साथ खेलने का क्या महत्त्व है?
- कविता में वाक्य-संरचना क्यों महत्वपूर्ण होती है?
- रघुवीर सहाय की कविता में शब्दों के खेल का उदाहरण दें।
उत्तर कुंजी
- शब्दों के साथ खेलना कविता की रचना की शुरुआत है और इससे अर्थ के नए आयाम खुलते हैं।
- वाक्य-संरचना से कविता का भाव और अर्थ स्पष्ट होता है।
- रघुवीर सहाय की कविता में तोता शब्द के साथ खेल कर अर्थ को दोहराया गया है।
त्वरित संदर्भ
- शब्द चयन और विन्यास कविता की सुंदरता बढ़ाते हैं।
- वाक्य-संरचना से भाव और अर्थ स्पष्ट होते हैं।
- शब्दों के खेल से रचनात्मकता विकसित होती है।
शब्दावली
- वाक्य-संरचना: शब्दों का व्यवस्थित संयोजन।
- तुकबंदी: कविता में शब्दों का छंदबद्ध होना।
- रिद्म: लय।
कविता के बिंब एवं छंद
कविता में बिंब और छंद का विशेष महत्त्व होता है। बिंब हमारे इंद्रियों से जुड़ी बाह्य संवेदनाओं का चित्र होते हैं जो कविता को जीवंत बनाते हैं। छंद कविता की आंतरिक लय है जो उसे संगीतात्मक बनाता है। मुक्त छंद में भी अर्थ की लय आवश्यक होती है।
मुख्य बिंदु
- बिंब कविता को इंद्रियों से जोड़ते हैं।
- मानवीकरण कविता में प्राकृतिक दृश्यों को जीवंत बनाता है।
- छंद कविता की आंतरिक लय है।
- मुक्त छंद में भी लयात्मकता आवश्यक है।
पाठ्य प्रमाण
सुमित्रानंदन पंत की कविता—
"तट पर बगुलों-सी वृद्धाएँ विधवाएँ जप-ध्यान में मगन,
मंथर धारा में बहता जिनका अदृश्य गति अंतर-रोदन!"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: मानवीकरण क्या है? उदाहरण दें।
उत्तर: मानवीकरण वह शैली है जिसमें प्राकृतिक दृश्यों को मानवीय गुण देकर जीवंत बनाया जाता है, जैसे "अंबर पनघट में डुबो रही"।
अभ्यास प्रश्न
- कविता में बिंबों का क्या महत्त्व है?
- मानवीकरण क्या है? उदाहरण दें।
- छंद का कविता में क्या स्थान है?
उत्तर कुंजी
- बिंब कविता को इंद्रियों से जोड़ते हैं और उसे जीवंत बनाते हैं।
- मानवीकरण प्राकृतिक दृश्यों को मानवीय गुण देना है।
- छंद कविता की आंतरिक लय है जो उसे संगीतात्मक बनाता है।
त्वरित संदर्भ
- बिंब = इंद्रियों से जुड़ा चित्र।
- मानवीकरण = प्राकृतिक वस्तुओं को मानवीय गुण देना।
- छंद = कविता की लयात्मक इकाई।
शब्दावली
- बिंब: चित्र या छवि।
- मानवीकरण: प्राकृतिक वस्तुओं को मानवीय गुण देना।
- छंद: कविता की लयात्मक इकाई।
कविता का परिवेश एवं भाव तत्व
कविता का परिवेश और संदर्भ उसकी भाषा, संरचना, बिंब और छंद को प्रभावित करते हैं। कवि की वैयक्तिक सोच और सामाजिक दृष्टि कविता की भाव संपदा बनती है। परिवेश के अनुसार भाषा और शब्दों का चयन होता है जो कविता को सहज और प्रभावशाली बनाता है।
मुख्य बिंदु
- परिवेश कविता की भाषा और शैली को प्रभावित करता है।
- कवि की वैयक्तिकता और सामाजिकता कविता की भाव संपदा है।
- शब्दों का चयन परिवेश के अनुसार होता है।
- कविता समय विशेष की उपज होती है।
पाठ्य प्रमाण
नागार्जुन की कविता—
"कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास
कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त
कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त।
दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद
धुआँ उठा आँगन से ऊपर कई दिनों के बाद
चमक उठी घर भर की आँखें कई दिनों के बाद
कौए ने खुजलाई पाँखें कई दिनों के बाद।"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: कविता के परिवेश का क्या महत्त्व है?
उत्तर: परिवेश कविता की भाषा, शैली और भाव को प्रभावित करता है जिससे कविता सहज और प्रभावशाली बनती है।
अभ्यास प्रश्न
- कविता के परिवेश का क्या महत्त्व है?
- कवि की वैयक्तिकता कविता में कैसे प्रकट होती है?
- परिवेश के अनुसार शब्द चयन का उदाहरण दें।
उत्तर कुंजी
- परिवेश कविता की भाषा, शैली और भाव को प्रभावित करता है।
- कवि की वैयक्तिक सोच और सामाजिक दृष्टि कविता की भाव संपदा बनती है।
- गाँव के परिवेश के लिए तद्भव और उर्दू शब्दों का मिश्रण।
त्वरित संदर्भ
- परिवेश = कविता का वातावरण या संदर्भ।
- भाव तत्व = कविता की भावनात्मक संपदा।
- तद्भव शब्द = हिंदी के प्राचीन शब्द।
शब्दावली
- परिवेश: वातावरण या संदर्भ।
- भाव तत्व: कविता की भावनात्मक संपदा।
- तद्भव शब्द: हिंदी के प्राचीन शब्द।
HINDI — ALL CHAPTERS
1
जनसंचार माध्यम
1
विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
2
पत्रकारिता के विविध आयाम
2
पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
3
डायरी लिखने की कला
3
विशेष लेखन— स्वरूप और प्रकार
4
कथा-पटकथा
4
कैसे बनती है कविता
5
नाटक लिखने का व्याकरण
5
कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया
6
कैसे लिखें कहानी
6
स्ववृत्त(बायोडाटा) लेखन और रोज़गार संबंधी आवेदन पत्र
7
कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण
7
कोश-एक परिचय
8
कैसे बनता है रेडियो नाटक
9
नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
1
आत्मपरिचय
2
एक गीत
3
पतंग
4
कविता के बहाने
5
बात सीधी थी पर
6
कैमरे में बंद अपाहिज
7
उषा
8
बादल राग
9
कवितावली (उत्तर कांड से)
10
लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
11
रुबाइयाँ
12
छोटा मेरा खेत
13
बगुलों के पंख
14
भक्तिन
15
बाज़ार दर्शन
16
काले मेघा पानी दे
17
पहलवान की ढोलक
18
शिरीष के फूल
19
श्रम विभाजन और जाति-प्रथा
20
मेरी कल्पना का आदर्श-समाज
1
सिल्वर वैडिंग
2
जूझ
3
अतीत में दबे पाँव