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शिरीष-के-फूल

CLASS 12-PCM . HINDI . आरोह भाग 2 . शिरीष के-फूल

Chapter 18 : शिरीष के फूल

Ch 18

HINDI

CLASS 12-PCM

हजारी प्रसाद द्विवेदी का परिचय

हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 में आरत दुबे का छपरा, बलिया (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे एक महान साहित्यकार, आलोचक, इतिहासकार और संस्कृत के विद्वान थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में "अशोक के फूल", "कल्पलता", "विचार और वितर्क", "कुटज", "विचार-प्रवाह", "आलोक पर्व" आदि निबंध-संग्रह शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने उपन्यास, आलोचना, साहित्य इतिहास और ग्रंथ-संपादन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण और लखनऊ विश्वविद्यालय से डी.लिट् की उपाधि से सम्मानित किया गया। उनकी मृत्यु सन् 1979 में दिल्ली में हुई।

मुख्य बिंदु

  • साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने वाले विचारक।
  • भारतीय संस्कृति को अनेक जातियों के श्रेष्ठ साधनों का संयोजन मानना।
  • मानवतावादी साहित्यकार और समीक्षक।
  • भक्तिकाल को भारतीय चिंताधारा का सहज विकास मानना।
  • निबंध विधा को सर्जनात्मक साहित्य की कोटि में लाने वाले।

पाठ्य प्रमाण

"मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ। जो वाग्जाल मनुष्य को दुर्गति, हीनता और परमुखापेक्षिता से बचा न सके, जो उसकी आत्मा को तेजोद्दीप्त न बना सके, जो उसके हृदय को परदुखकातर और संवेदनशील न बना सके, उसे साहित्य कहने में मुझे संकोच होता है।"

हल किए गए उदाहरण

प्रश्न: हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्य दृष्टिकोण क्या था?
उत्तर: वे साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखते थे और ऐसा साहित्य पसंद करते थे जो मनुष्य की आत्मा को तेजोद्दीप्त करे।

प्रश्न: उनकी प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर: अशोक के फूल, कल्पलता, विचार और वितर्क, कुटज, विचार-प्रवाह, आलोक पर्व आदि।

प्रश्न: हजारी प्रसाद द्विवेदी को कौन-कौन से पुरस्कार प्राप्त हुए?
उत्तर: साहित्य अकादेमी पुरस्कार, पद्मभूषण, डी.लिट्।

अभ्यास प्रश्न

  • हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्य दृष्टिकोण क्या था?
  • उनकी प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
  • हजारी प्रसाद द्विवेदी को कौन-कौन से पुरस्कार प्राप्त हुए?

उत्तर कुंजी

  • वे साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखते थे और ऐसा साहित्य पसंद करते थे जो मनुष्य की आत्मा को तेजोद्दीप्त करे।
  • अशोक के फूल, कल्पलता, विचार और वितर्क, कुटज, विचार-प्रवाह, आलोक पर्व आदि।
  • साहित्य अकादेमी पुरस्कार, पद्मभूषण, डी.लिट्।

त्वरित संदर्भ

  • जन्म: 1907, बलिया, उत्तर प्रदेश।
  • प्रमुख रचनाएँ: निबंध, उपन्यास, आलोचना, साहित्य इतिहास।
  • पुरस्कार: साहित्य अकादेमी, पद्मभूषण, डी.लिट्।
  • मृत्यु: 1979, दिल्ली।

शब्दावली

  • वाग्जाल - शब्दों का जाल या साहित्य।
  • परमुखापेक्षिता - दूसरों पर निर्भरता।
  • तेजोद्दीप्त - तेज से भरा हुआ।
  • संवेदनशील - भावुक।

शिरीष के फूल का सारांश

"शिरीष के फूल" हजारी प्रसाद द्विवेदी का एक प्रसिद्ध ललित निबंध है जिसमें वे शिरीष के पेड़ और उसके फूलों के माध्यम से जीवन की कठिनाइयों के बीच धैर्य, अजेय जिजीविषा और लोक के प्रति कर्तव्यशीलता को दर्शाते हैं। निबंध में लेखक ने शिरीष के फूलों की कोमलता और उनके फल की मजबूती के माध्यम से पुरानी और नई पीढ़ी के संघर्ष का प्रतीक प्रस्तुत किया है। यह निबंध गांधीवादी मूल्यों और मानवता के प्रति लेखक की गहरी आस्था को भी प्रतिबिंबित करता है।

मुख्य बिंदु

  • शिरीष के पेड़ की विशेषताएँ और उसकी सांस्कृतिक महत्ता।
  • जीवन की कठिनाइयों में धैर्य और अजेय जिजीविषा।
  • पुरानी और नई पीढ़ी के बीच संघर्ष।
  • गांधीवादी मूल्यों का महत्त्व।
  • अनासक्ति और फक्कड़पन की कवितात्मक व्याख्या।

पाठ्य प्रमाण

"जब उमस से प्राण उबलता रहता है और लू से हृदय सूखता रहता है, एकमात्र शिरीष कालजयी अवधूत की भाँति जीवन की अजेयता का मंत्र प्रचार करता रहता है।"

हल किए गए उदाहरण

प्रश्न: शिरीष के फूल निबंध में शिरीष के पेड़ का क्या महत्व है?
उत्तर: शिरीष का पेड़ धैर्य और जीवन की कठिनाइयों में अजेयता का प्रतीक है।

प्रश्न: लेखक ने शिरीष के फूलों के माध्यम से कौन-से सामाजिक संदेश दिए हैं?
उत्तर: पुरानी और नई पीढ़ी के संघर्ष को दर्शाया गया है और नयी पीढ़ी के स्वागत का साहस दिखाने को कहा गया है।

प्रश्न: निबंध में गांधीवादी मूल्यों का कैसे उल्लेख है?
उत्तर: लेखक ने गांधीजी की याद करते हुए आत्मबल और धैर्य के महत्त्व को बताया है।

अभ्यास प्रश्न

  • शिरीष के फूल निबंध में शिरीष के पेड़ का क्या महत्व है?
  • लेखक ने शिरीष के फूलों के माध्यम से कौन-से सामाजिक संदेश दिए हैं?
  • निबंध में गांधीवादी मूल्यों का कैसे उल्लेख है?

उत्तर कुंजी

  • शिरीष का पेड़ धैर्य और जीवन की कठिनाइयों में अजेयता का प्रतीक है।
  • पुरानी और नई पीढ़ी के संघर्ष को दर्शाया गया है और नयी पीढ़ी के स्वागत का साहस दिखाने को कहा गया है।
  • लेखक ने गांधीजी की याद करते हुए आत्मबल और धैर्य के महत्त्व को बताया है।

त्वरित संदर्भ

  • शिरीष का पेड़ जीवन की कठिनाइयों में स्थिरता का प्रतीक।
  • फूलों की कोमलता और फल की मजबूती सामाजिक संघर्ष का संकेत।
  • गांधीवादी मूल्यों का समावेश।

शब्दावली

  • अवधूत - सांसारिक बंधनों से ऊपर उठे संन्यासी।
  • फक्कड़ - मस्त और बेपरवाह।
  • अनासक्त - विषय-भोग से ऊपर उठना।
  • कालजयी - काल के पार रहने वाला।
  • लू - गर्म हवा।

शिरीष के फूल का विश्लेषण

यह निबंध शिरीष के पेड़ के माध्यम से जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाता है। लेखक ने शिरीष के फूलों की कोमलता और उनके फल की मजबूती के बीच के विरोधाभास को उजागर किया है। शिरीष का पेड़ कठिन मौसम में भी फूलता रहता है, जो जीवन की अजेयता और धैर्य का प्रतीक है। लेखक ने इसे अवधूत की तरह बताया है जो सांसारिक बंधनों से ऊपर है। निबंध में कवि और योगी की अनासक्ति की महत्ता पर भी प्रकाश डाला गया है।

मुख्य बिंदु

  • शिरीष के फूलों की कोमलता और फल की मजबूती।
  • जीवन में अनासक्ति और फक्कड़पन का महत्व।
  • कवि और योगी की स्थिर-प्रज्ञता।
  • पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी के बीच संघर्ष।
  • सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भ।

पाठ्य प्रमाण

"कवि बनना है मेरे दोस्तो, तो फक्कड़ बनो। शिरीष की मस्ती की ओर देखो।"

हल किए गए उदाहरण

प्रश्न: लेखक ने शिरीष के फूलों की कोमलता और फल की मजबूती के बीच क्या संबंध बताया है?
उत्तर: फूल कोमल होते हैं लेकिन फल इतने मजबूत होते हैं कि नए फल-पत्ते उन्हें बाहर निकालते हैं। यह जीवन के संघर्ष का प्रतीक है।

प्रश्न: निबंध में कवि बनने के लिए क्या गुण आवश्यक बताए गए हैं?
उत्तर: अनासक्ति, फक्कड़पन और स्थिर-प्रज्ञता।

प्रश्न: शिरीष के फूलों के माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्ष कैसे दर्शाए गए हैं?
उत्तर: पुरानी और नई पीढ़ी के बीच अधिकार-लिप्सा और संघर्ष को दर्शाया गया है।

अभ्यास प्रश्न

  • लेखक ने शिरीष के फूलों की कोमलता और फल की मजबूती के बीच क्या संबंध बताया है?
  • निबंध में कवि बनने के लिए क्या गुण आवश्यक बताए गए हैं?
  • शिरीष के फूलों के माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्ष कैसे दर्शाए गए हैं?

उत्तर कुंजी

  • फूल कोमल होते हैं लेकिन फल इतने मजबूत होते हैं कि नए फल-पत्ते उन्हें बाहर निकालते हैं। यह जीवन के संघर्ष का प्रतीक है।
  • अनासक्ति, फक्कड़पन और स्थिर-प्रज्ञता।
  • पुरानी और नई पीढ़ी के बीच अधिकार-लिप्सा और संघर्ष को दर्शाया गया है।

त्वरित संदर्भ

  • शिरीष के फूलों की कोमलता और फल की मजबूती जीवन संघर्ष का प्रतीक।
  • कवि बनने के लिए अनासक्ति और फक्कड़पन आवश्यक।
  • सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्ष का चित्रण।

शब्दावली

  • स्थिर-प्रज्ञता - अविचल बुद्धि की अवस्था।
  • फक्कड़ - मस्त, बेपरवाह।
  • अधिकार-लिप्सा - अधिकार की लालसा।
  • मर्मरित - सरसराहट की ध्वनि।

शिरीष के फूल के प्रमुख शब्द और उनके अर्थ

  • कर्णिकार - कनेर (या कनियार) नामक फूल।
  • आरग्वध - अमलतास नामक फूल।
  • खंखड़ - ठूँठ/शुष्क।
  • निर्घात - बिना आघात या बाधा के।
  • अवधूत - सांसारिक बंधनों व विषय-वासनाओं से ऊपर उठा हुआ संन्यासी।
  • लँडूरे - पूँछ विहीन।
  • हिल्लोल - लहर।
  • अरिष्ठ - रीठा नामक वृक्ष।
  • पुन्नाग - एक बड़ा सदाबहार पेड़।
  • घनमसण - घना-चिकना (गहरा चिकना/मलायम)।
  • परिवेष्टित - ढँका हुआ।
  • दोला - झूला।
  • बकुल - मौलसिरी का पेड़।
  • तुंदिल - तोंद वाला / मोटे पेट वाला।
  • मर्मरित - (पत्तों की) खड़खड़ाहट या सरसराहट ध्वनि से युक्त।
  • ऊर्ध्वमुखी - प्रगति की दिशा में।
  • दुरंत - जिसका विनाश होना मुश्किल है।
  • हज़रत - श्रीमान (व्यंग्यात्मक स्वर)।
  • अनासक्त - विषय-भोग से ऊपर उठा हुआ।
  • अनाविल - स्वच्छ।
  • कर्णाट - प्राचीन काल का कर्नाटक राज्य।
  • स्थिरप्रज्ञता - अविचल बुद्धि की अवस्था।
  • विदग्ध - अच्छी तरह से तपा हुआ।
  • कार्पण्य - कृपणता।
  • गण्डस्थल - गाल।
  • कृषीवल - किसान।
  • निर्दलित - भलीभाँति निचोड़ा हुआ।
  • ईक्षुदण्ड - ईख (गन्ने) का तना।
  • अभ्रभेदी - गगनचुंबी।
  • सपासप - ध्वन्यात्मक शब्द जो कोड़े पड़ने की आवाज़ के लिए उपयुक्त होता है। यहाँ 'जल्दी-जल्दी' अर्थ रखता है।

HINDI — ALL CHAPTERS

1

जनसंचार माध्यम

1

विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन

2

पत्रकारिता के विविध आयाम

2

पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया

3

डायरी लिखने की कला

3

विशेष लेखन— स्वरूप और प्रकार

4

कथा-पटकथा

4

कैसे बनती है कविता

5

नाटक लिखने का व्याकरण

5

कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया

6

कैसे लिखें कहानी

6

स्ववृत्त(बायोडाटा) लेखन और रोज़गार संबंधी आवेदन पत्र

7

कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण

7

कोश-एक परिचय

8

कैसे बनता है रेडियो नाटक

9

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन

1

आत्मपरिचय

2

एक गीत

3

पतंग

4

कविता के बहाने

5

बात सीधी थी पर

6

कैमरे में बंद अपाहिज

7

उषा

8

बादल राग

9

कवितावली (उत्तर कांड से)

10

लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप

11

रुबाइयाँ

12

छोटा मेरा खेत

13

बगुलों के पंख

14

भक्तिन

15

बाज़ार दर्शन

16

काले मेघा पानी दे

17

पहलवान की ढोलक

18

शिरीष के फूल

19

श्रम विभाजन और जाति-प्रथा

20

मेरी कल्पना का आदर्श-समाज

1

सिल्वर वैडिंग

2

जूझ

3

अतीत में दबे पाँव