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बाज़ार-दर्शन

CLASS 12-PCM . HINDI . आरोह भाग 2 . बाज़ार दर्शन

Chapter 15 : बाज़ार दर्शन

Ch 15

HINDI

CLASS 12-PCM

जैनेंद्र कुमार का परिचय

जैनेंद्र कुमार हिंदी साहित्य के प्रमुख कथाकार हैं, जिनका जन्म सन् 1905 में अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे हिंदी में मनोवैज्ञानिक कथा-धारा के प्रवर्तक माने जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में उपन्यास जैसे परख, अनाम स्वामी, सुनीता, त्यागपत्र, कल्याणी, जयवर्द्धन, मुक्तिबोध शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने कई कहानी-संग्रह और निबंध-संग्रह भी लिखे। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारत-भारती सम्मान और पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। उनका निधन सन् 1990 में हुआ।

मुख्य बिंदु

  • हिंदी में प्रेमचंद के बाद सबसे महत्वपूर्ण कथाकार।
  • मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध।
  • गांधीवादी चिंतक और गंभीर विचारक।
  • सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और दार्शनिक विषयों पर गहन विचार।

पाठ्य प्रमाण

"हिंदी में प्रेमचंद के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण कथाकार के रूप में प्रतिष्ठित जैनेंद्र कुमार का अवदान बहुत व्यापक और वैविध्यपूर्ण है।"

अभ्यास प्रश्न

  • जैनेंद्र कुमार की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
  • जैनेंद्र कुमार को मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार क्यों कहा जाता है?
  • उनकी गांधीवादी दृष्टि का साहित्य में क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर कुंजी

  • उनकी प्रमुख रचनाओं में परख, अनाम स्वामी, सुनीता, त्यागपत्र आदि शामिल हैं।
  • उन्होंने उपन्यासों में मनोवैज्ञानिक पहलुओं को गहराई से प्रस्तुत किया।
  • गांधीवादी चिंतन ने उनके लेखन में सामाजिक और दार्शनिक गहराई दी।

शब्दावली

  • मनोवैज्ञानिक - मनोविज्ञान से संबंधित
  • गांधीवादी - महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित
  • वैविध्यपूर्ण - विविधता से भरपूर

बाज़ार दर्शन का सारांश और व्याख्या

"बाज़ार दर्शन" जैनेंद्र कुमार का एक महत्वपूर्ण निबंध है जिसमें उन्होंने उपभोक्तावाद और बाज़ारवाद की गहरी वैचारिक चर्चा की है। इस निबंध में बाज़ार की जादुई ताकत और उसकी चमक-दमक के प्रभाव को समझाया गया है। लेखक बताते हैं कि यदि हम अपनी आवश्यकताओं को समझकर बाज़ार का उपयोग करें तो वह लाभकारी हो सकता है, अन्यथा वह असंतोष, तृष्णा और ईर्ष्या का कारण बन सकता है।

मुख्य बिंदु

  • बाज़ार की जादुई ताकत और उसकी चमक-दमक।
  • पैसे की "पर्चेज़िंग पावर" का महत्व।
  • बाज़ार में संयम और बुद्धिमानी से खरीदारी करने की आवश्यकता।
  • बाज़ार की व्यंग्य-शक्ति और उसके प्रभाव।
  • मन की स्थिति और बाज़ार के प्रभाव का संबंध।
  • सच्चे लाभ के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति को पता हो कि उसे क्या चाहिए।
  • बाज़ार का पोषण करने वाला अर्थशास्त्र अनीति-शास्त्र है।

पाठ्य प्रमाण

"पैसा पावर है। पर उसके सबूत में आस-पास माल-टाल न जमा हो तो क्या वह खाक पावर है!"

"बाज़ार है कि शैतान का जाल है? ऐसा सजा-सजाकर माल रखते हैं कि बेहया ही हो जो न फँसे।"

"बाज़ार को सार्थकता भी वही मनुष्य देता है जो जानता है कि वह क्या चाहता है।"

हल किए गए उदाहरण

लेख में मित्रों के बाज़ार जाने और सामान लेने के अनुभवों के माध्यम से बाज़ार की वास्तविकता को समझाया गया है। एक मित्र ने बहुत सारा सामान खरीदा लेकिन वह ज़रूरत के अनुसार नहीं था, जबकि दूसरा मित्र बाज़ार देखकर खाली हाथ लौटा क्योंकि वह नहीं जानता था कि उसे क्या चाहिए।

अभ्यास प्रश्न

  • लेख में बाज़ार की जादूई ताकत का क्या अर्थ है?
  • "पर्चेज़िंग पावर" का क्या महत्व है?
  • लेख में बाज़ार के प्रति मन की स्थिति का क्या प्रभाव बताया गया है?
  • भगत जी का चरित्र बाज़ार के संदर्भ में कैसे प्रस्तुत किया गया है?
  • लेख में बाज़ार और अर्थशास्त्र के बीच क्या संबंध बताया गया है?

उत्तर कुंजी

  • बाज़ार की जादूई ताकत से तात्पर्य उसकी आकर्षक चमक-दमक से है जो लोगों को आकर्षित करती है।
  • पर्चेज़िंग पावर का मतलब खरीदने की शक्ति है, जो पैसे की वास्तविक उपयोगिता को दर्शाती है।
  • मन खाली हो तो बाज़ार का जादू अधिक प्रभावी होता है, जबकि मन भरा हो तो बाज़ार से लाभ होता है।
  • भगत जी एक ऐसा व्यक्ति हैं जिनका मन बाज़ार के जादू से अछूता है, वे संयमित और संतुष्ट हैं।
  • लेख में कहा गया है कि जो अर्थशास्त्र बाज़ार को पोषण करता है वह अनीति-शास्त्र है क्योंकि वह कपट और शोषण को बढ़ावा देता है।

शब्दावली

  • पर्चेज़िंग पावर - खरीदने की शक्ति
  • असबाब - सामान
  • दरकार - ज़रूरत
  • परिमित - सीमित
  • अतुलित - जिसकी तुलना न की जा सके
  • पेशगी - अग्रिम राशि
  • नाचीज़ - महत्त्वहीन
  • अपदार्थ - जिसका अस्तित्व न हो
  • दारुण - भयंकर
  • अकिंचित्कर - अर्थहीन
  • स्पृहा - इच्छा
  • पसोपेश - असमंजस

HINDI — ALL CHAPTERS

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जनसंचार माध्यम

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विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन

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पत्रकारिता के विविध आयाम

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पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया

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डायरी लिखने की कला

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विशेष लेखन— स्वरूप और प्रकार

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कथा-पटकथा

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कैसे बनती है कविता

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नाटक लिखने का व्याकरण

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कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया

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कैसे लिखें कहानी

6

स्ववृत्त(बायोडाटा) लेखन और रोज़गार संबंधी आवेदन पत्र

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कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण

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कोश-एक परिचय

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कैसे बनता है रेडियो नाटक

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नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन

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आत्मपरिचय

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एक गीत

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कविता के बहाने

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बात सीधी थी पर

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कैमरे में बंद अपाहिज

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उषा

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बादल राग

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कवितावली (उत्तर कांड से)

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लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप

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रुबाइयाँ

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छोटा मेरा खेत

13

बगुलों के पंख

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भक्तिन

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बाज़ार दर्शन

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काले मेघा पानी दे

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पहलवान की ढोलक

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शिरीष के फूल

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श्रम विभाजन और जाति-प्रथा

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अतीत में दबे पाँव