hindi/
डायरी-लिखने-की-कला

CLASS 12-PCM . HINDI . अभिव्यक्ति और माध्यम भाग 2 . डायरी लिखने-की-कला

Chapter 3 : डायरी लिखने की कला

Ch 3

HINDI

CLASS 12-PCM

परिचय: डायरी लेखन

डायरी लेखन वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने दैनिक जीवन की घटनाओं, विचारों और अनुभवों को लिखित रूप में दर्ज करता है। यह लेखन मुख्यतः निजी उपयोग के लिए होता है, जिसमें लेखक अपने मन की भावनाओं और विचारों को बिना किसी रोक-टोक के व्यक्त करता है। डायरी लेखन का उद्देश्य अपने अनुभवों को सुरक्षित रखना और भविष्य में उन्हें याद करना होता है।

डायरी एक ऐसा दस्तावेज़ है जो लेखक के निजी जीवन का साक्षात्कार प्रस्तुत करता है। इसमें लेखक अपने मन की गहराइयों से जुड़ी बातें, भावनाएँ और विचार लिखता है, जो किसी और के सामने व्यक्त करना कठिन होता है।

मुख्य बिंदु

  • डायरी लेखन निजी और व्यक्तिगत होता है।
  • यह लेखक के अनुभवों और विचारों का संग्रह होता है।
  • डायरी में लेखक बिना किसी वर्जना के अपने मन की बात लिखता है।
  • यह लेखन भविष्य में स्मृतियों को ताजा करने का माध्यम है।

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"डायरी उस अर्थ में साहित्यिक विधा नहीं है, भले ही वह किसी और साहित्यिक विधा की कृति को अपना रूप उधार दे दे।"

अभ्यास प्रश्न

  • स्तर 1 – सरल: डायरी लेखन क्या है? इसे क्यों लिखा जाता है?
  • स्तर 2 – मध्यम: डायरी लेखन के क्या लाभ हैं?
  • स्तर 3 – कठिन: डायरी लेखन को साहित्यिक विधा क्यों नहीं माना जाता?

उत्तर कुंजी

स्तर 1: डायरी लेखन वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने दैनिक जीवन की घटनाओं और विचारों को लिखित रूप में दर्ज करता है। इसे अपने अनुभवों को सुरक्षित रखने और याद रखने के लिए लिखा जाता है।

स्तर 2: डायरी लेखन से व्यक्ति अपने मन की भावनाओं को व्यक्त कर सकता है, स्मृतियों को सुरक्षित रख सकता है, और आत्म-विश्लेषण कर सकता है। यह मानसिक शांति और आत्म-समझ बढ़ाने में सहायक होता है।

स्तर 3: डायरी लेखन को साहित्यिक विधा इसलिए नहीं माना जाता क्योंकि यह मुख्यतः निजी और व्यक्तिगत होता है, न कि सार्वजनिक या साहित्यिक उद्देश्य से लिखा जाता है। इसमें कोई निश्चित कथानक या साहित्यिक संरचना नहीं होती।

शब्दावली

  • डायरी: व्यक्तिगत लेखन जिसमें दैनिक घटनाएँ और विचार लिखे जाते हैं।
  • वर्जना: रोक-टोक, संकोच।
  • स्मृति: याद।

ऐनी फ्रैंक की डायरी

ऐनी फ्रैंक एक यहूदी लड़की थी, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी अत्याचारों के बीच अपनी डायरी लिखी। उसकी डायरी न केवल एक व्यक्तिगत दस्तावेज़ है, बल्कि इतिहास के उस भयावह दौर का एक महत्वपूर्ण साक्ष्य भी है। ऐनी की डायरी में उसने अपने जीवन के अनुभवों, भय, आशाओं और संघर्षों को लिखा, जो बाद में प्रकाशित होकर विश्वभर में प्रसिद्ध हुई।

मुख्य बिंदु

  • ऐनी फ्रैंक की डायरी 1942 से 1944 तक लिखी गई।
  • यह नाज़ी अत्याचारों के बीच छुप कर रहने का दस्तावेज़ है।
  • डायरी में ऐनी ने अपने निजी अनुभवों और भावनाओं को व्यक्त किया।
  • यह डायरी इतिहास और साहित्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"यह साठ लाख लोगों की तरफ़ से बोलने वाली एक आवाज़ है–एक ऐसी आवाज़, जो किसी संत या कवि की नहीं, बल्कि एक साधारण लड़की की है।" – इल्या इहरनबुर्ग

अभ्यास प्रश्न

  • स्तर 1 – सरल: ऐनी फ्रैंक कौन थी और उसने क्या लिखा?
  • स्तर 2 – मध्यम: ऐनी फ्रैंक की डायरी का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
  • स्तर 3 – कठिन: ऐनी फ्रैंक की डायरी को साहित्यिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?

उत्तर कुंजी

स्तर 1: ऐनी फ्रैंक एक यहूदी लड़की थी जिसने नाज़ी अत्याचारों के दौरान अपनी डायरी लिखी।

स्तर 2: उसकी डायरी नाज़ी अत्याचारों के बीच छुप कर रहने का साक्ष्य है और इतिहास के उस दौर का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है।

स्तर 3: डायरी में ऐनी ने अपने निजी अनुभवों को इस तरह लिखा कि वह एक साहित्यिक कृति के रूप में भी महत्वपूर्ण हो गई।

शब्दावली

  • नाज़ी: जर्मनी का एक राजनीतिक दल जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अत्याचार किए।
  • दस्तावेज़: प्रमाणित लिखित सामग्री।
  • साहित्यिक: साहित्य से संबंधित।

डायरी लेखन के नियम और सलाहें

डायरी लेखन के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम और सुझाव हैं, जो लेखन को प्रभावी और सार्थक बनाते हैं। डायरी को अपनी निजी वस्तु मानकर लिखना चाहिए और इसे बिना किसी दबाव के, अपनी स्वाभाविक भाषा में लिखना चाहिए।

मुख्य बिंदु

  • डायरी किसी नोटबुक या पुराने साल की डायरी में लिखी जा सकती है।
  • लेखन करते समय बाहरी दबावों से मुक्त रहना चाहिए।
  • डायरी पूरी तरह निजी होती है, इसे किसी और के पढ़ने के लिए नहीं लिखा जाता।
  • भाषा और शैली में परिष्कार की चिंता न करें, स्वाभाविकता बनाए रखें।
  • डायरी में अपने अनुभवों के साथ समकालीन इतिहास का अक्स भी होता है।

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"डायरी का डायरीपन इसी में है कि आप जो कुछ दर्ज करना चाहते हैं और जिस तरीके से दर्ज करना चाहते हैं, करें।"

अभ्यास प्रश्न

  • स्तर 1 – सरल: डायरी लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
  • स्तर 2 – मध्यम: डायरी लेखन में भाषा और शैली का क्या महत्व है?
  • स्तर 3 – कठिन: डायरी लेखन को प्रभावी बनाने के लिए किन नियमों का पालन आवश्यक है?

उत्तर कुंजी

स्तर 1: डायरी लिखते समय इसे निजी मानना चाहिए, बाहरी दबावों से मुक्त रहना चाहिए और अपनी बात स्वाभाविक रूप से लिखनी चाहिए।

स्तर 2: भाषा और शैली में परिष्कार की चिंता न करते हुए स्वाभाविकता बनाए रखना चाहिए ताकि लेखन सहज और प्रभावी हो।

स्तर 3: डायरी को निजी वस्तु मानना, बिना दबाव के लिखना, स्वाभाविक भाषा का प्रयोग करना और अपने अनुभवों को ईमानदारी से दर्ज करना आवश्यक है।

शब्दावली

  • परिष्कार: सुंदरता, निखार।
  • स्वाभाविकता: प्राकृतिक रूप।
  • दबाव: जोर, बाध्यता।

HINDI — ALL CHAPTERS

1

जनसंचार माध्यम

1

विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन

2

पत्रकारिता के विविध आयाम

2

पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया

3

डायरी लिखने की कला

3

विशेष लेखन— स्वरूप और प्रकार

4

कथा-पटकथा

4

कैसे बनती है कविता

5

नाटक लिखने का व्याकरण

5

कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया

6

कैसे लिखें कहानी

6

स्ववृत्त(बायोडाटा) लेखन और रोज़गार संबंधी आवेदन पत्र

7

कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण

7

कोश-एक परिचय

8

कैसे बनता है रेडियो नाटक

9

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन

1

आत्मपरिचय

2

एक गीत

3

पतंग

4

कविता के बहाने

5

बात सीधी थी पर

6

कैमरे में बंद अपाहिज

7

उषा

8

बादल राग

9

कवितावली (उत्तर कांड से)

10

लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप

11

रुबाइयाँ

12

छोटा मेरा खेत

13

बगुलों के पंख

14

भक्तिन

15

बाज़ार दर्शन

16

काले मेघा पानी दे

17

पहलवान की ढोलक

18

शिरीष के फूल

19

श्रम विभाजन और जाति-प्रथा

20

मेरी कल्पना का आदर्श-समाज

1

सिल्वर वैडिंग

2

जूझ

3

अतीत में दबे पाँव