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कोश-एक-परिचय

CLASS 12-PCM . HINDI . अभिव्यक्ति और माध्यम भाग 2 . कोश एक-परिचय

Chapter 7 : कोश-एक परिचय

Ch 7

HINDI

CLASS 12-PCM

शब्दकोश का परिचय

यह पाठ शब्दकोश की महत्ता और उसकी संरचना को सरल भाषा में समझाता है। शब्दकोश वह पुस्तक है जिसमें भाषा के शब्दों का संग्रह, उनके अर्थ, व्युत्पत्ति, लिंग, शब्द-रूप और विभिन्न संदर्भों में उपयोग की जानकारी होती है। यह भाषा सीखने और समझने में सहायक होता है।

मुख्य बिंदु

  • शब्दकोश का महत्व और उपयोग
  • शब्दों के अर्थ, व्युत्पत्ति और लिंग की जानकारी
  • शब्दकोश में शब्दों का व्यवस्थित क्रम

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"विदग्ध" शब्द का अर्थ और उसके विभिन्न संदर्भ, जैसे कि विदग्ध का अर्थ निपुण, पंडित, रसिक आदि।

हल किए गए उदाहरण

चंद्रिका का 'विदग्ध' शब्द से सामना और शब्दपरी द्वारा उसका अर्थ समझाना।

अभ्यास प्रश्न

स्तर 1 – सरल

  • शब्दकोश क्या है? इसका महत्व बताइए।
  • शब्दकोश में शब्दों की जानकारी किस प्रकार दी जाती है?

स्तर 2 – मध्यम

  • शब्दकोश में शब्दों के अर्थ और व्युत्पत्ति की जानकारी क्यों दी जाती है?
  • शब्दकोश में शब्दों का क्रम कैसे निर्धारित किया जाता है?

स्तर 3 – कठिन

  • शब्दकोश की संरचना और उसके नियमों का हिंदी भाषा के अध्ययन में क्या महत्व है? विस्तार से लिखिए।

उत्तर कुंजी

  • शब्दकोश वह पुस्तक है जिसमें भाषा के शब्दों का संग्रह, उनके अर्थ, व्युत्पत्ति, लिंग, और विभिन्न संदर्भों में उपयोग की जानकारी होती है। यह भाषा सीखने और समझने में सहायक होता है।
  • शब्दकोश में शब्दों के अर्थ और व्युत्पत्ति की जानकारी इसलिए दी जाती है ताकि शब्दों का सही अर्थ और उनका उपयोग समझा जा सके।
  • शब्दकोश में शब्दों का क्रम वर्णमाला के अनुसार व्यवस्थित होता है जिससे शब्दों को खोजने में आसानी होती है।

त्वरित संदर्भ

  • शब्दकोश: भाषा के शब्दों का संग्रह और अर्थ
  • व्युत्पत्ति: शब्द की उत्पत्ति और इतिहास
  • लिंग: शब्द का पुल्लिंग या स्त्रीलिंग होना

शब्दावली

  • शब्दकोश: शब्दों का संग्रह जिसमें उनके अर्थ, व्युत्पत्ति और उपयोग की जानकारी होती है।
  • व्युत्पत्ति: शब्द की उत्पत्ति और इतिहास।
  • लिंग: शब्द का पुल्लिंग या स्त्रीलिंग होना।

शब्दलोक की कल्पना और व्यवस्था

इस भाग में शब्दलोक की कल्पना प्रस्तुत की गई है, जहाँ शब्दों को एक आदर्श लोकतंत्र की तरह व्यवस्थित किया गया है। शब्दलोक में शब्दों के भवन वर्णमाला के अनुसार खंडों और उपखंडों में व्यवस्थित होते हैं। प्रत्येक शब्द को उसके प्रथम अक्षर और मात्रा के अनुसार एक निश्चित स्थान मिलता है।

मुख्य बिंदु

  • शब्दलोक की संरचना और नियम
  • खंड और उपखंड का वर्णमाला और मात्राओं के अनुसार वर्गीकरण
  • संयुक्ताक्षरों का स्थान और नियम
  • शब्दों का समानता और अनुशासन

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

चंद्रिका की शब्दलोक यात्रा, जहाँ वह विभिन्न खंडों और उपखंडों से गुजरती है, जैसे 'अं खंड', 'क खंड', 'कं उपखंड', 'कौ उपखंड' आदि।

हल किए गए उदाहरण

चंद्रिका का प्रश्न कि संयुक्ताक्षर शब्द कहाँ निवास करते हैं और शब्दपरी द्वारा उनका स्थान समझाना।

अभ्यास प्रश्न

स्तर 1 – सरल

  • शब्दलोक क्या है? इसकी विशेषताएँ बताइए।
  • शब्दलोक में शब्दों का वर्गीकरण कैसे होता है?

स्तर 2 – मध्यम

  • शब्दलोक में खंड और उपखंडों का नामकरण और क्रम कैसे होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
  • संयुक्ताक्षरों के स्थान निर्धारण के नियम क्या हैं?

स्तर 3 – कठिन

  • शब्दलोक की व्यवस्था और नियमों का हिंदी भाषा के अध्ययन में क्या महत्व है? विस्तार से लिखिए।

उत्तर कुंजी

  • शब्दलोक एक कल्पित स्थान है जहाँ शब्दों के भवन वर्णमाला के अनुसार व्यवस्थित होते हैं।
  • खंडों के नाम वर्णमाला के अक्षरों पर होते हैं, जैसे 'अं खंड', 'क खंड' आदि।
  • उपखंड मात्राओं के आधार पर विभाजित होते हैं, जैसे 'कं', 'का', 'कि' आदि।
  • संयुक्ताक्षर शब्दों का स्थान उनके प्रथमाक्षर के अनुसार निर्धारित होता है, जैसे 'क्ष' शब्द 'क' खंड में आता है।
  • शब्दलोक की व्यवस्था भाषा अध्ययन में शब्दों के सही क्रम और अर्थ समझने में मदद करती है।

त्वरित संदर्भ

  • शब्दलोक: शब्दों का व्यवस्थित निवास स्थान
  • खंड: वर्णमाला के अक्षरों के अनुसार शब्दों का वर्गीकरण
  • उपखंड: खंड के भीतर मात्राओं के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण
  • संयुक्ताक्षर: दो व्यंजनों के मेल से बने अक्षर जैसे क्ष, त्र, ज्ञ

शब्दावली

  • शब्दलोक: कल्पित स्थान जहाँ शब्दों का व्यवस्थित निवास होता है।
  • खंड: वर्णमाला के अक्षरों के अनुसार शब्दों का वर्गीकरण।
  • उपखंड: खंड के भीतर मात्राओं के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण।
  • संयुक्ताक्षर: दो व्यंजनों के मेल से बने अक्षर जैसे क्ष, त्र, ज्ञ।

संदर्भ ग्रंथों का परिचय

संदर्भ-ग्रंथ ज्ञान के संक्षिप्त और व्यवस्थित संग्रह होते हैं। ये विभिन्न विषयों की जानकारी को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे अध्ययन और शोध में सहायता मिलती है। संदर्भ-ग्रंथों के प्रमुख प्रकार हैं: विश्व ज्ञान कोश, साहित्य कोश, और चरित्र कोश।

मुख्य बिंदु

  • संदर्भ-ग्रंथों का महत्व और उपयोग
  • विश्व ज्ञान कोश का व्यापक ज्ञान संकलन
  • साहित्य कोश में साहित्यिक विषयों की जानकारी
  • चरित्र कोश में महान व्यक्तियों के जीवन परिचय
  • जानकारी का क्रमबद्ध संकलन

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

चंद्रिका की शब्दपरी के साथ विश्वज्ञान लोक, साहित्य लोक और चरित्र लोक की यात्रा।

हल किए गए उदाहरण

चंद्रिका का विभिन्न लोकों में जाकर संदर्भ-ग्रंथों की विशेषताएँ समझना।

अभ्यास प्रश्न

स्तर 1 – सरल

  • संदर्भ-ग्रंथ क्या होते हैं? उनका महत्व बताइए।
  • विश्व ज्ञान कोश क्या है?

स्तर 2 – मध्यम

  • साहित्य कोश और चरित्र कोश में क्या अंतर है?
  • संदर्भ-ग्रंथों का ज्ञान के संकलन में क्या योगदान है?

स्तर 3 – कठिन

  • संदर्भ-ग्रंथों के प्रकारों का विश्लेषण कीजिए और उनके महत्व पर चर्चा कीजिए।

उत्तर कुंजी

  • संदर्भ-ग्रंथ ज्ञान के संक्षिप्त और व्यवस्थित संग्रह होते हैं जो अध्ययन और शोध में सहायक होते हैं।
  • विश्व ज्ञान कोश मानव ज्ञान का व्यापक संकलन है जिसमें सभी विषयों की जानकारी होती है।
  • साहित्य कोश साहित्यिक विषयों की जानकारी प्रदान करता है।
  • चरित्र कोश महान व्यक्तियों के जीवन और कृतित्व का संकलन है।
  • संदर्भ-ग्रंथों का ज्ञान के त्वरित और व्यवस्थित संग्रह में महत्वपूर्ण योगदान है।

त्वरित संदर्भ

  • संदर्भ-ग्रंथ: ज्ञान और सूचनाओं का व्यवस्थित संग्रह
  • विश्व ज्ञान कोश: मानव ज्ञान का व्यापक संकलन
  • साहित्य कोश: साहित्य से संबंधित जानकारियों का संग्रह
  • चरित्र कोश: महान व्यक्तियों के जीवन परिचय का संग्रह

शब्दावली

  • संदर्भ-ग्रंथ: ज्ञान और सूचनाओं का व्यवस्थित संग्रह।
  • विश्व ज्ञान कोश: मानव ज्ञान का व्यापक संकलन।
  • साहित्य कोश: साहित्य से संबंधित जानकारियों का संग्रह।
  • चरित्र कोश: महान व्यक्तियों के जीवन परिचय का संग्रह।

HINDI — ALL CHAPTERS

1

जनसंचार माध्यम

1

विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन

2

पत्रकारिता के विविध आयाम

2

पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया

3

डायरी लिखने की कला

3

विशेष लेखन— स्वरूप और प्रकार

4

कथा-पटकथा

4

कैसे बनती है कविता

5

नाटक लिखने का व्याकरण

5

कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया

6

कैसे लिखें कहानी

6

स्ववृत्त(बायोडाटा) लेखन और रोज़गार संबंधी आवेदन पत्र

7

कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण

7

कोश-एक परिचय

8

कैसे बनता है रेडियो नाटक

9

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन

1

आत्मपरिचय

2

एक गीत

3

पतंग

4

कविता के बहाने

5

बात सीधी थी पर

6

कैमरे में बंद अपाहिज

7

उषा

8

बादल राग

9

कवितावली (उत्तर कांड से)

10

लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप

11

रुबाइयाँ

12

छोटा मेरा खेत

13

बगुलों के पंख

14

भक्तिन

15

बाज़ार दर्शन

16

काले मेघा पानी दे

17

पहलवान की ढोलक

18

शिरीष के फूल

19

श्रम विभाजन और जाति-प्रथा

20

मेरी कल्पना का आदर्श-समाज

1

सिल्वर वैडिंग

2

जूझ

3

अतीत में दबे पाँव