CLASS 12-PCM . HINDI . अभिव्यक्ति और माध्यम भाग 2 . कार्यालयी लेखन-और-प्रक्रिया
Chapter 5 : कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया
Ch 5
HINDI
CLASS 12-PCM
कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया का परिचय
कार्यालयी लेखन सरकारी कार्यालयों में होने वाले औपचारिक और अर्धऔपचारिक पत्राचार की प्रक्रिया को समझने का विषय है। यह लेखन कार्यों के सुव्यवस्थित संचालन, निर्णय लेने और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए आवश्यक होता है।
मुख्य बिंदु
- सरकारी दफ्तरों में फ़ाइलों का महत्त्व और उनका प्रबंधन
- फ़ाइलों में प्रस्ताव, पत्र और टिप्पणियाँ कैसे रखी जाती हैं
- पत्र व्यवहार की विभिन्न श्रेणियाँ और उनके स्वरूप
- अखिल भारतीय साहित्य एवं संस्कृति संस्थान का उदाहरण
पाठ्य प्रमाण
"सरकारी कामकाज की गाड़ी फ़ाइलों के पहियों पर ही दौड़ती है।"
हल किए गए उदाहरण
सरकारी दफ्तर में फ़ाइलों के दाहिनी और बाईं तरफ क्या रखा जाता है, इसका उदाहरण प्रस्तुत करें।
उत्तर: दाहिनी तरफ बाहरी प्रस्ताव या पत्र रखे जाते हैं, जबकि बाईं तरफ उन पर लिखी गई टिप्पणियाँ या मंतव्य होते हैं।
अभ्यास प्रश्न
- सरकारी दफ्तरों में फ़ाइलों की क्या भूमिका होती है?
- फ़ाइल के दाहिनी और बाईं तरफ़ क्या रखा जाता है?
- अखिल भारतीय साहित्य एवं संस्कृति संस्थान का क्या महत्त्व है?
उत्तर कुंजी
- फ़ाइलें सरकारी कामकाज को व्यवस्थित करती हैं और निर्णय लेने में मदद करती हैं।
- दाहिनी तरफ़ प्रस्ताव या पत्र, बाईं तरफ़ टिप्पणियाँ रखी जाती हैं।
- यह संस्थान कार्यालयी कार्यों के लिए एक उदाहरण है जो पूरे देश के क्षेत्रीय कार्यालयों को नियंत्रित करता है।
त्वरित संदर्भ
फ़ाइलें सरकारी कामकाज की आधारशिला हैं, जिनमें प्रस्ताव, पत्र और टिप्पणियाँ व्यवस्थित रूप से रखी जाती हैं।
शब्दावली
- फ़ाइल: दस्तावेजों का संग्रह
- प्रस्ताव: किसी विषय पर विचार के लिए भेजा गया पत्र
- टिप्पणी: किसी पत्र या प्रस्ताव पर लिखी गई राय
औपचारिक पत्र लेखन
औपचारिक पत्र वे पत्र होते हैं जो सरकारी कार्यालयों, विभागों या मंत्रालयों के बीच लिखे जाते हैं। इन पत्रों का एक निश्चित प्रारूप होता है और ये कार्यालयी संचार का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं।
मुख्य बिंदु
- पत्र के शीर्ष पर कार्यालय या विभाग का नाम और पता लिखा जाता है।
- फ़ाइल संख्या, प्रेषक और प्राप्तकर्ता का विवरण पत्र के बाईं ओर होता है।
- विषय शीर्षक के अंतर्गत पत्र के उद्देश्य का संक्षिप्त उल्लेख होता है।
- संबोधन में 'महोदय' का प्रयोग होता है।
- भाषा सरल, स्पष्ट और सहज होनी चाहिए।
- पत्र के अंत में 'भवदीय' शब्द और हस्ताक्षर होते हैं।
- हस्ताक्षर के नीचे नाम और पदनाम मुद्रित होते हैं।
पाठ्य प्रमाण
"पत्र की भाषा सरल एवं सहज होनी चाहिए। क्लिष्ट शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए।"
हल किए गए उदाहरण
औपचारिक पत्र में 'विषय' का क्या महत्त्व होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: विषय में पत्र के उद्देश्य का संक्षिप्त और स्पष्ट उल्लेख होता है जिससे प्राप्तकर्ता को पत्र का मुख्य विषय तुरंत समझ में आ जाता है। उदाहरण: "विषय: मोबाइल फोन व्यय सीमा में वृद्धि के संबंध में।"
अभ्यास प्रश्न
- औपचारिक पत्र में किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
- पत्र के प्रारूप में 'विषय' का क्या महत्त्व है?
- सरकारी पत्रों में 'सेवा में' शब्द का प्रयोग क्यों कम हो रहा है?
उत्तर कुंजी
- सरल भाषा, स्पष्ट विषय, सही प्रेषक और प्राप्तकर्ता विवरण आवश्यक हैं।
- विषय में पत्र के उद्देश्य का संक्षिप्त उल्लेख होता है।
- यह शब्द धीरे-धीरे कम प्रयोग में आ रहा है क्योंकि अधिक आधुनिक और सरल संबोधन अपनाए जा रहे हैं।
त्वरित संदर्भ
औपचारिक पत्र में स्पष्ट विषय, उचित संबोधन और सरल भाषा का प्रयोग आवश्यक है।
शब्दावली
- औपचारिक पत्र: सरकारी या संस्थागत पत्र
- संबोधन: पत्र में प्राप्तकर्ता को सम्बोधित करने का तरीका
- हस्ताक्षर: पत्र लिखने वाले का नाम और पद
टिप्पणी लेखन प्रक्रिया
टिप्पणी किसी पत्र या प्रस्ताव पर लिखी गई राय या मंतव्य होती है जो निर्णय लेने में सहायक होती है। इसे नोटिंग भी कहा जाता है।
मुख्य बिंदु
- टिप्पणी का उद्देश्य मामलों को नियमानुसार निपटाना होता है।
- टिप्पणी मुख्यतः दो प्रकार की होती है: सहायक स्तर की और अधिकारी स्तर की।
- सहायक स्तर की टिप्पणी में मूल पत्र का सार, प्रस्ताव की व्याख्या और नियमों के आधार पर राय होती है।
- टिप्पणी संक्षिप्त, विषय-संगत, तर्कसंगत और क्रमबद्ध होनी चाहिए।
- टिप्पणी में शिष्ट और संतुलित भाषा का प्रयोग आवश्यक है।
पाठ्य प्रमाण
"टिप्पणी संक्षिप्त, विषय-संगत, तर्कसंगत और क्रमबद्ध होनी चाहिए।"
हल किए गए उदाहरण
टिप्पणी लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: टिप्पणी में विषय का सार स्पष्ट होना चाहिए, तर्क संगत और शिष्ट भाषा का प्रयोग होना चाहिए। उदाहरण: "मूल पत्र में व्यय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है, जो विभागीय नियमों के अनुसार उचित नहीं है।"
अभ्यास प्रश्न
- टिप्पणी का क्या उद्देश्य होता है?
- सहायक स्तर और अधिकारी स्तर की टिप्पणियों में क्या अंतर है?
- टिप्पणी लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर कुंजी
- निर्णय लेने के लिए तथ्य स्पष्ट करना और तर्क प्रस्तुत करना।
- सहायक स्तर पर संक्षिप्त विवेचन, अधिकारी स्तर पर मंतव्य।
- संतुलित, तर्कसंगत, शिष्ट भाषा और विषय-संगत होना चाहिए।
त्वरित संदर्भ
टिप्पणी निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो विषय को स्पष्ट और तर्कसंगत बनाती है।
शब्दावली
- टिप्पणी: किसी विषय पर लिखी गई राय
- नोटिंग: टिप्पणी लिखने की प्रक्रिया
- मंतव्य: अधिकारी द्वारा दी गई राय
आनुषंगिक टिप्पणी
आनुषंगिक टिप्पणी वह होती है जो अधिकारी सहायक की टिप्पणी पढ़ने के बाद लिखता है। इसमें सहमति, आंशिक सहमति या असहमति व्यक्त की जाती है।
मुख्य बिंदु
- आनुषंगिक टिप्पणी सहायक की टिप्पणी पर अधिकारी की प्रतिक्रिया होती है।
- अधिकारी अपनी सहमति, आंशिक सहमति या असहमति व्यक्त कर सकता है।
- अधिकारी को सहायक की टिप्पणी को काटने, बदलने या हटाने का अधिकार नहीं होता।
- आनुषंगिक टिप्पणी संक्षिप्त या विस्तृत हो सकती है।
पाठ्य प्रमाण
"अधिकारी को अधीनस्थ की टिप्पणी को काटने, बदलने या हटाने का अधिकार नहीं है।"
हल किए गए उदाहरण
यदि अधिकारी सहायक की टिप्पणी से असहमत हो तो वह क्या करता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: अधिकारी अपनी असहमति को तर्क सहित आनुषंगिक टिप्पणी के रूप में लिखता है। उदाहरण: "खर्च सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव विभागीय नियमों के विरुद्ध है, अतः इसे अस्वीकार किया जाना चाहिए।"
अभ्यास प्रश्न
- आनुषंगिक टिप्पणी क्या होती है?
- यदि अधिकारी सहायक की टिप्पणी से असहमत हो तो क्या करता है?
- अधिकारी को टिप्पणी में क्या अधिकार प्राप्त हैं?
उत्तर कुंजी
- संबंधित अधिकारी द्वारा लिखी गई मंतव्य।
- अपनी असहमति या आंशिक सहमति व्यक्त करता है।
- टिप्पणी को काटने या बदलने का अधिकार नहीं।
त्वरित संदर्भ
आनुषंगिक टिप्पणी अधिकारी की अंतिम राय होती है जो सहायक की टिप्पणी पर आधारित होती है।
शब्दावली
- आनुषंगिक टिप्पणी: अधिकारी की प्रतिक्रिया
- मंतव्य: अधिकारी की राय
- अधीनस्थ: सहायक अधिकारी
अनुस्मारक या स्मरण पत्र
अनुस्मारक वह पत्र होता है जो किसी पूर्व पत्र का उत्तर न मिलने पर याद दिलाने के लिए भेजा जाता है। इसे स्मरण पत्र भी कहा जाता है।
मुख्य बिंदु
- उत्तर न मिलने पर अनुस्मारक भेजा जाता है।
- अनुस्मारक का प्रारूप औपचारिक पत्र के समान होता है लेकिन आकार में छोटा होता है।
- पूर्व पत्र का हवाला दिया जाता है।
- एक से अधिक अनुस्मारक भेजे जाने पर क्रमांकित किया जाता है जैसे अनुस्मारक-1, अनुस्मारक-2।
पाठ्य प्रमाण
"जब किसी पत्र, ज्ञापन इत्यादि का उत्तर समय पर प्राप्त नहीं होता तो याद दिलाने के लिए ‘अनुस्मारक’ भेजा जाता है।"
हल किए गए उदाहरण
अनुस्मारक पत्र कब और क्यों भेजा जाता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जब किसी पत्र का उत्तर समय पर न मिले तो याद दिलाने के लिए अनुस्मारक भेजा जाता है। उदाहरण: "दिनांक 1 मार्च को भेजे गए पत्र का उत्तर प्राप्त न होने पर अनुस्मारक-1 भेजा गया।"
अभ्यास प्रश्न
- अनुस्मारक पत्र कब भेजा जाता है?
- अनुस्मारक पत्र का प्रारूप कैसा होता है?
- एक से अधिक अनुस्मारक भेजने पर क्या लिखा जाता है?
उत्तर कुंजी
- उत्तर न मिलने पर याद दिलाने के लिए।
- औपचारिक पत्र के समान लेकिन छोटा।
- अनुस्मारक-1, अनुस्मारक-2 आदि।
त्वरित संदर्भ
अनुस्मारक पत्र समय पर उत्तर न मिलने पर भेजा जाने वाला औपचारिक पत्र है।
शब्दावली
- अनुस्मारक: याद दिलाने वाला पत्र
- स्मरण पत्र: अनुस्मारक का पर्याय
- हवाला: संदर्भ देना
अर्धसरकारी पत्र लेखन
अर्धसरकारी पत्र औपचारिक पत्रों से भिन्न होते हैं और इनमें अनौपचारिकता तथा मैत्री भाव होता है। ये तब लिखे जाते हैं जब लेखक और प्राप्तकर्ता व्यक्तिगत रूप से परिचित होते हैं।
मुख्य बिंदु
- अर्धसरकारी पत्र में अनौपचारिक भाषा और मैत्री भाव होता है।
- प्रारूप में भिन्नता होती है, जैसे संबोधन में 'प्रिय श्री' का प्रयोग।
- पत्र के अंत में 'आपका' शब्द का प्रयोग होता है।
- अधिकतर कार्यालय के लेटर हेड का प्रयोग किया जाता है।
पाठ्य प्रमाण
"अर्ध-सरकारी पत्र में अनौपचारिकता का पुट होता है। इसमें एक मैत्री भाव होता है।"
हल किए गए उदाहरण
अर्धसरकारी पत्र और औपचारिक पत्र में क्या अंतर होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: औपचारिक पत्र में भाषा और स्वरूप सख्त होते हैं, जबकि अर्धसरकारी पत्र में अनौपचारिकता और मैत्री भाव होता है। उदाहरण: औपचारिक पत्र में 'महोदय', अर्धसरकारी पत्र में 'प्रिय श्री'।
अभ्यास प्रश्न
- अर्धसरकारी पत्र और औपचारिक पत्र में क्या अंतर होता है?
- अर्धसरकारी पत्र कब लिखे जाते हैं?
- अर्धसरकारी पत्र के अंत में किस शब्द का प्रयोग होता है?
उत्तर कुंजी
- अर्धसरकारी पत्र में अनौपचारिक भाषा और मैत्री भाव होता है।
- जब लेखक और प्राप्तकर्ता व्यक्तिगत रूप से परिचित हों।
- अंत में 'आपका' शब्द का प्रयोग।
त्वरित संदर्भ
अर्धसरकारी पत्र व्यक्तिगत परिचय और मैत्री भाव के साथ लिखा जाता है।
शब्दावली
- अर्धसरकारी पत्र: आधा औपचारिक पत्र
- मैत्री भाव: दोस्ताना भावना
- लेटर हेड: कार्यालय का शीर्षक
टिप्पणी लेखन का विस्तृत रूप
टिप्पणी वह विस्तृत दस्तावेज़ होती है जो किसी विषय पर बोर्ड या उच्च अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाती है। इसमें विषय की पृष्ठभूमि, विवेचन और सिफ़ारिशें शामिल होती हैं।
मुख्य बिंदु
- स्वतंत्र और संपूर्ण टिप्पणी जो अपने आप में पूर्ण हो।
- संदर्भ और संलग्नक के साथ प्रस्तुत की जाती है।
- बोर्ड के समक्ष प्रस्तुति के लिए होती है।
- विषय की पृष्ठभूमि, विवेचन, तर्क और सिफ़ारिशें शामिल होती हैं।
पाठ्य प्रमाण
"यह अपने स्वरूप में आरंभिक या मुख्य टिप्पणी से काफ़ी मिलती है।"
हल किए गए उदाहरण
टिप्पणी और मुख्य टिप्पणी में क्या अंतर होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: मुख्य टिप्पणी संक्षिप्त होती है जबकि टिप्पणी स्वतंत्र, संपूर्ण और विस्तृत होती है। उदाहरण: बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली टिप्पणी।
अभ्यास प्रश्न
- टिप्पणी और मुख्य टिप्पणी में क्या अंतर होता है?
- बोर्ड के समक्ष टिप्पणी प्रस्तुत करने का उद्देश्य क्या है?
- टिप्पणी में किन बातों का समावेश होता है?
उत्तर कुंजी
- मुख्य टिप्पणी संक्षिप्त, टिप्पणी विस्तृत और स्वतंत्र होती है।
- बोर्ड से स्वीकृति प्राप्त करना।
- पृष्ठभूमि, विवेचन, तर्क और सिफ़ारिशें।
त्वरित संदर्भ
टिप्पणी बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली विस्तृत और स्वतंत्र राय होती है।
शब्दावली
- स्वतंत्र टिप्पणी: पूर्ण और स्पष्ट टिप्पणी
- संलग्नक: अतिरिक्त दस्तावेज़
- सिफ़ारिश: सुझाव
कार्यसूची और कार्यवृत्त
कार्यसूची बैठक में चर्चा के लिए निर्धारित विषयों की सूची होती है जबकि कार्यवृत्त बैठक में हुई चर्चा का संक्षिप्त विवरण होता है।
मुख्य बिंदु
- कार्यसूची बैठक के विषयों की अग्रिम जानकारी देती है।
- कार्यवृत्त में चर्चा का संक्षिप्त और क्रमबद्ध विवरण होता है।
- उपस्थित सदस्यों की सूची और उनके पदनाम शामिल होते हैं।
पाठ्य प्रमाण
"किसी भी संस्था की औपचारिक बैठक की कार्यसूची उस बैठक में चर्चा के लिए निर्धारित विषयों की अग्रिम जानकारी देती है।"
हल किए गए उदाहरण
कार्यसूची और कार्यवृत्त में क्या अंतर होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: कार्यसूची चर्चा के विषयों की सूची है, जबकि कार्यवृत्त चर्चा का संक्षिप्त विवरण। उदाहरण: बैठक की कार्यसूची और बैठक का मिनट्स।
अभ्यास प्रश्न
- कार्यसूची और कार्यवृत्त में क्या अंतर है?
- कार्यसूची का क्या महत्त्व है?
- कार्यवृत्त में किन बातों का उल्लेख होता है?
उत्तर कुंजी
- कार्यसूची विषयों की सूची, कार्यवृत्त चर्चा का विवरण।
- बैठक के अनुशासित संचालन में सहायता।
- विमर्श का संक्षिप्त विवरण, उपस्थित सदस्यों के नाम।
त्वरित संदर्भ
कार्यसूची बैठक के विषयों की सूची, कार्यवृत्त चर्चा का सारांश होता है।
शब्दावली
- कार्यसूची: बैठक के विषयों की सूची
- कार्यवृत्त: बैठक का संक्षिप्त विवरण
- अध्यक्ष: बैठक का संचालन करने वाला
प्रेस विज्ञप्ति लेखन
प्रेस विज्ञप्ति किसी संस्था द्वारा लिए गए निर्णयों और सूचनाओं को जनता तक पहुँचाने का माध्यम है। यह स्पष्ट, संक्षिप्त और तथ्यात्मक होती है।
मुख्य बिंदु
- निर्णय का सार्वजनिक प्रसारण
- पारिश्रमिक वृद्धि का उदाहरण
- विज्ञप्ति की भाषा सरल और प्रभावी होनी चाहिए।
पाठ्य प्रमाण
"कोई संस्थान या व्यक्ति किसी विषय या किसी बैठक में जो निर्णय लेता है, उसे प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सर्वसामान्य तक पहुँचाया जाता है।"
हल किए गए उदाहरण
प्रेस विज्ञप्ति का उद्देश्य क्या होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: प्रेस विज्ञप्ति का उद्देश्य निर्णयों और सूचनाओं को जनता तक पहुँचाना होता है। उदाहरण: पारिश्रमिक वृद्धि की सूचना।
अभ्यास प्रश्न
- प्रेस विज्ञप्ति का उद्देश्य क्या होता है?
- प्रेस विज्ञप्ति में किन बातों का उल्लेख होता है?
- पारिश्रमिक वृद्धि के संदर्भ में प्रेस विज्ञप्ति का महत्त्व क्या है?
उत्तर कुंजी
- निर्णय की जानकारी जनता तक पहुँचाना।
- निर्णय, कारण और लाभ का उल्लेख।
- प्रतिभाओं को आकर्षित करना और कार्यक्रमों की गुणवत्ता बढ़ाना।
त्वरित संदर्भ
प्रेस विज्ञप्ति निर्णयों की सार्वजनिक सूचना होती है।
शब्दावली
- प्रेस विज्ञप्ति: सार्वजनिक सूचना
- पारिश्रमिक: वेतन या भुगतान
- प्रतिभा: कौशल या योग्यता
परिपत्र लेखन
परिपत्र वह दस्तावेज़ होता है जिसमें बैठक में लिए गए निर्णयों को कार्यान्वित करने के निर्देश होते हैं। यह सभी संबंधित अधिकारियों को भेजा जाता है।
मुख्य बिंदु
- परिपत्र का उद्देश्य निर्णयों को लागू करना होता है।
- निर्देश स्पष्ट और संक्षिप्त होते हैं।
- परिपत्र सभी संबंधित अधिकारियों को भेजा जाता है।
पाठ्य प्रमाण
"बैठक में लिए गए महत्त्वपूर्ण निर्णयों को कार्यान्वित करने के लिए परिपत्र जारी किया जाता है।"
हल किए गए उदाहरण
परिपत्र क्या होता है और इसका उद्देश्य क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: परिपत्र एक आधिकारिक दस्तावेज़ है जो बैठक के निर्णयों को लागू करने के निर्देश देता है। उदाहरण: मोबाइल फोन व्यय सीमा पर निर्णय का परिपत्र।
अभ्यास प्रश्न
- परिपत्र क्या होता है?
- परिपत्र का उद्देश्य क्या है?
- परिपत्र में क्या जानकारी होती है?
उत्तर कुंजी
- बैठक के निर्णयों को लागू करने वाला दस्तावेज़।
- निर्णयों को कार्यान्वित करना।
- निर्देश और निर्णय का विवरण।
त्वरित संदर्भ
परिपत्र बैठक के निर्णयों को लागू करने के लिए जारी किया जाता है।
शब्दावली
- परिपत्र: आदेश या निर्देश
- निर्णय: फैसला
- कार्यान्वयन: लागू करना

HINDI — ALL CHAPTERS
1
जनसंचार माध्यम
1
विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
2
पत्रकारिता के विविध आयाम
2
पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
3
डायरी लिखने की कला
3
विशेष लेखन— स्वरूप और प्रकार
4
कथा-पटकथा
4
कैसे बनती है कविता
5
नाटक लिखने का व्याकरण
5
कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया
6
कैसे लिखें कहानी
6
स्ववृत्त(बायोडाटा) लेखन और रोज़गार संबंधी आवेदन पत्र
7
कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण
7
कोश-एक परिचय
8
कैसे बनता है रेडियो नाटक
9
नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
1
आत्मपरिचय
2
एक गीत
3
पतंग
4
कविता के बहाने
5
बात सीधी थी पर
6
कैमरे में बंद अपाहिज
7
उषा
8
बादल राग
9
कवितावली (उत्तर कांड से)
10
लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
11
रुबाइयाँ
12
छोटा मेरा खेत
13
बगुलों के पंख
14
भक्तिन
15
बाज़ार दर्शन
16
काले मेघा पानी दे
17
पहलवान की ढोलक
18
शिरीष के फूल
19
श्रम विभाजन और जाति-प्रथा
20
मेरी कल्पना का आदर्श-समाज
1
सिल्वर वैडिंग
2
जूझ
3
अतीत में दबे पाँव