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कविता-के-बहाने

CLASS 12-PCM . HINDI . आरोह भाग 2 . कविता के-बहाने

Chapter 4 : कविता के बहाने

Ch 4

HINDI

CLASS 12-PCM

कुँवर नारायण का परिचय

कुँवर नारायण का जन्म 19 सितंबर 1927 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे हिंदी के प्रतिष्ठित कवि थे जिन्होंने कविता के साथ-साथ कहानियाँ, चिंतनपरक लेख और कला-समीक्षाएँ भी लिखीं। उनकी प्रमुख काव्य रचनाओं में "चक्रव्यूह" (1956), "परिवेश: हम तुम", "कोई दूसरा नहीं", "इन दिनों" (काव्य संग्रह), "आत्मजयी" (प्रबंध काव्य), "आकारों के आस-पास" (कहानी संग्रह), "आज और आज से पहले" (समीक्षा), और "मेरे साक्षात्कार" (सामान्य) शामिल हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, कुमारन आशान पुरस्कार, व्यास सम्मान, प्रेमचंद पुरस्कार, लोहिया सम्मान, कबीर सम्मान और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका निधन 2017 में दिल्ली में हुआ।

कुँवर नारायण की कविताओं में संयम, परिष्कार और साफ-सुथरापन प्रमुख हैं। उनकी भाषा और विषय की विविधता उनकी कविताओं की विशेषता है। वे यथार्थ के खुरदरापन और सहज सौंदर्य दोनों को अपने काव्य में समेटते हैं। उनकी कविता में जीवन को समझने का एक खुलापन है, जिसमें संशय, संभ्रम और प्रश्नाकुलता की भावना व्याप्त है। वे नागर संवेदना के कवि हैं, जिनकी दृष्टि तटस्थ वीतरागी है।

मुख्य बिंदु

  • कवि का जन्म और जीवन परिचय
  • प्रमुख काव्य संग्रह और रचनाएँ
  • प्राप्त पुरस्कार
  • काव्य की विशेषताएँ: संयम, परिष्कार, यथार्थ और सहज सौंदर्य
  • संशय और प्रश्नाकुलता उनकी कविता की मूल विशेषता
  • नागर संवेदना और तटस्थ दृष्टि

पाठ्य प्रमाण

"कविता में व्यर्थ का उलझाव, अखबारी सतहीपन और वैचारिक धुंध के बजाय संयम, परिष्कार और साफ़-सुथरापन है।"

अभ्यास प्रश्न

  • कुँवर नारायण का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
  • उनकी प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
  • उनकी कविता की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
  • कुँवर नारायण की कविता में संशय और प्रश्नाकुलता का क्या अर्थ है?

उत्तर कुंजी

  • 19 सितंबर 1927, उत्तर प्रदेश
  • चक्रव्यूह, परिवेश: हम तुम, कोई दूसरा नहीं, इन दिनों आदि
  • संयम, परिष्कार, यथार्थ का खुरदरापन और सहज सौंदर्य
  • कविता में जीवन को पूरी तरह समझने का खुलापन और प्रश्नों से भरा होना

शब्दावली

  • संयम: नियंत्रण या नियंत्रण की स्थिति
  • परिष्कार: शुद्धता और सुंदरता
  • यथार्थ: वास्तविकता
  • संशय: संदेह
  • प्रश्नाकुलता: प्रश्नों से भरा होना
  • नागर संवेदना: नगर जीवन की संवेदनशीलता
  • वीतराग: बिना किसी पक्षपात के

कविता के बहाने का विश्लेषण

"कविता के बहाने" कुँवर नारायण की एक प्रसिद्ध कविता है जो उनके "इन दिनों" काव्य संग्रह से ली गई है। यह कविता कविता के अस्तित्व, उसकी संभावनाओं और उसकी सीमाओं पर चिंतन करती है। कविता को चिड़िया, फूल और बच्चे के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जहाँ चिड़िया और फूल सीमित जीवन चक्र का प्रतीक हैं, जबकि बच्चे के सपने असीमित और अनंत संभावनाओं के प्रतीक हैं। कविता में शब्दों को एक खेल के रूप में देखा गया है जिसमें अतीत, वर्तमान और भविष्य सभी उपकरण मात्र हैं।

मुख्य बिंदु

  • कविता की तुलना चिड़िया, फूल और बच्चे से
  • कविता की उड़ान और खिलना
  • शब्दों का खेल और रचनात्मक ऊर्जा
  • सीमाओं का टूटना: घर, भाषा, समय की सीमाएँ
  • भविष्य की असीम संभावनाएँ

पाठ्य प्रमाण

"कविता एक उड़ान है चिड़िया के बहाने
कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने"

"कविता एक खिलना है फूलों के बहाने
कविता का खिलना भला फूल क्या जाने!"

"कविता एक खेल है बच्चों के बहाने
सब घर एक कर देने के माने बच्चा ही जाने।"

हल किए गए उदाहरण

प्रश्न: कविता में चिड़िया, फूल और बच्चे का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?

उत्तर: चिड़िया और फूल सीमित और निश्चित जीवन चक्र का प्रतीक हैं, जबकि बच्चा असीमित संभावनाओं और सपनों का प्रतीक है। यह कविता की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।

अभ्यास प्रश्न

  • कविता में चिड़िया का क्या अर्थ है?
  • कविता के शब्दों के खेल का क्या महत्व है?
  • कविता में बच्चे का क्या स्थान है?
  • कविता में सीमाओं का टूटना किस प्रकार दर्शाया गया है?

उत्तर कुंजी

  • चिड़िया कविता की उड़ान और सीमितता का प्रतीक है।
  • शब्दों का खेल कविता की रचनात्मकता और विविधता को दर्शाता है।
  • बच्चा कविता की असीम संभावनाओं और भविष्य का प्रतीक है।
  • सीमाएँ जैसे घर, भाषा और समय कविता में बाधा नहीं हैं, वे टूट जाती हैं।

शब्दावली

  • प्रतीकात्मक: किसी वस्तु या विचार का प्रतीक होना
  • रचनात्मक ऊर्जा: सृजनात्मक शक्ति
  • असीमित: बिना सीमा के
  • सीमा: बंधन या रोक

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