CLASS 12-PCM . HINDI . वितान भाग 2 . अतीत में-दबे-पाँव
Chapter 3 : अतीत में दबे पाँव
Ch 3
HINDI
CLASS 12-PCM
ओम थानवी का परिचय
ओम थानवी का जन्म सन् 1957 में हुआ था। उन्होंने बीकानेर में शिक्षा प्राप्त की और राजस्थान विश्वविद्यालय से व्यावसायिक प्रशासन में एम.कॉम की डिग्री हासिल की। वे एडीटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया के महासचिव भी रह चुके हैं। 1980 से 1989 तक वे 'राजस्थान पत्रिका' में कार्यरत रहे, जहाँ उन्होंने 'इतवारी पत्रिका' का संपादन किया, जिससे साप्ताहिक को विशेष प्रतिष्ठा मिली। ओम थानवी सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों में गहरी रुचि रखते हैं और रंगमंच पर अभिनेता एवं निर्देशक के रूप में सक्रिय रहे हैं। वे साहित्य, कला, सिनेमा, वास्तुकला, पुरातत्त्व और पर्यावरण के क्षेत्र में भी गहन दिलचस्पी रखते हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, जिनमें गणेशशंकर विद्यार्थी पुरस्कार भी शामिल है। 1999 से वे दैनिक जनसत्ता के दिल्ली और कलकत्ता संस्करणों के संपादक रहे।
मुख्य बिंदु
- जन्म और शिक्षा
- पत्रकारिता में योगदान
- सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकार
- रंगमंच में सक्रियता
- पुरस्कार और सम्मान
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
ओम थानवी ने 'इतवारी पत्रिका' के संपादन से इसे समाज में विशिष्ट स्थान दिलाया।
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: ओम थानवी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: सन् 1957 में बीकानेर में।
प्रश्न: ओम थानवी को पत्रकारिता में कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?
उत्तर: गणेशशंकर विद्यार्थी पुरस्कार सहित अन्य पुरस्कार।
अभ्यास प्रश्न
- ओम थानवी का जन्म वर्ष और स्थान क्या है?
- उन्होंने किस विश्वविद्यालय से एम.कॉम की डिग्री प्राप्त की?
- ओम थानवी ने किस पत्रिका का संपादन किया?
- उनके सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकार क्या हैं?
उत्तर कुंजी
- सन् 1957, बीकानेर।
- राजस्थान विश्वविद्यालय।
- 'इतवारी पत्रिका' का संपादन।
- साहित्य, कला, सिनेमा, पुरातत्त्व, पर्यावरण।
त्वरित संदर्भ
ओम थानवी एक प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और रंगमंच कलाकार हैं, जिन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर गहन लेखन किया है।
शब्दावली
- संपादन: किसी पत्रिका या पुस्तक का सम्पूर्ण प्रबंधन और सुधार।
- सरोकार: किसी विषय में रुचि या चिंता।
- पुरातत्त्व: प्राचीन वस्तुओं और अवशेषों का अध्ययन।
मुअनजो-दड़ो का ऐतिहासिक महत्व
मुअनजो-दड़ो और हड़प्पा प्राचीन भारत के दो सबसे पुराने नियोजित शहर माने जाते हैं, जो सिंधु घाटी सभ्यता के परिपक्व दौर के हैं। मुअनजो-दड़ो ताम्र काल के सबसे बड़े और उत्कृष्ट शहरों में से एक है, जहाँ व्यापक खुदाई हुई है। यहाँ से बड़ी संख्या में इमारतें, सड़कें, मूर्तियाँ, चित्रित भांडे, मुहरें, साजो-सामान और खिलौने मिले हैं, जिससे सभ्यता का अध्ययन संभव हुआ।
मुख्य बिंदु
- सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख शहर
- नगर नियोजन और वास्तुकला
- खुदाई में प्राप्त वस्तुएं
- सभ्यता का सामाजिक और सांस्कृतिक पक्ष
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
मुअनजो-दड़ो की सड़कों और गलियों में आज भी घूम-फिर सकते हैं, जो नगर नियोजन की उत्कृष्टता दर्शाती हैं।
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: मुअनजो-दड़ो किस सभ्यता का हिस्सा था?
उत्तर: सिंधु घाटी सभ्यता।
प्रश्न: मुअनजो-दड़ो की नगर योजना की विशेषता क्या है?
उत्तर: ग्रिड प्लान, सीधी और आड़ी सड़कों का नियोजन।
अभ्यास प्रश्न
- मुअनजो-दड़ो का स्थान कहाँ है?
- मुअनजो-दड़ो की नगर योजना की विशेषताएँ बताइए।
- मुअनजो-दड़ो से कौन-कौन सी वस्तुएं मिली हैं?
उत्तर कुंजी
- पाकिस्तान के सिंध प्रांत में।
- ग्रिड प्लान, सीधी और आड़ी सड़कों का नियोजन।
- इमारतें, सड़कें, मूर्तियाँ, चित्रित भांडे, मुहरें, खिलौने आदि।
त्वरित संदर्भ
मुअनजो-दड़ो सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख और नियोजित शहर था, जो प्राचीन भारत की समृद्ध सभ्यता को दर्शाता है।
शब्दावली
- ताम्र काल: कांस्य युग, जिसमें तांबे और कांसे के उपकरण प्रचलित थे।
- ग्रिड प्लान: शहर की सड़कों का व्यवस्थित जाल जैसा नियोजन।
- मुहर: किसी वस्तु या दस्तावेज़ पर लगी छाप या चिन्ह।
मुअनजो-दड़ो का नगर निर्माण और जल प्रबंधन
मुअनजो-दड़ो का नगर नियोजन अत्यंत सुव्यवस्थित था। शहर की सड़कों और गलियों का विस्तार स्पष्ट है, जो ग्रिड प्लान के अनुसार व्यवस्थित थे। यहाँ की अधिकांश सड़कें सीधी या आड़ी थीं। नगर में जल निकासी का उन्नत प्रबंध था, जिसमें पक्की ईंटों से बनी नालियाँ और कुंड शामिल थे। कुंडों में पानी रिसने से बचाने के लिए चूने और चिरोड़ी के गारे का प्रयोग किया गया था। कुएँ भी व्यवस्थित थे और लगभग सात सौ कुएँ पाए गए।
मुख्य बिंदु
- ग्रिड प्लान के अनुसार नगर नियोजन
- जल निकासी और जल संरक्षण के उन्नत उपाय
- कुंड और कुएँ का महत्व
- स्वास्थ्य और स्वच्छता पर ध्यान
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
मुअनजो-दड़ो के जल कुंड में पक्की ईंटों का जमाव और नालियाँ पक्की ईंटों से बनी थीं, जो पानी के रिसाव को रोकती थीं।
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: मुअनजो-दड़ो की नगर योजना किस प्रकार की थी?
उत्तर: ग्रिड प्लान के अनुसार व्यवस्थित सड़कें।
प्रश्न: जल निकासी के लिए किन उपायों का प्रयोग किया गया था?
उत्तर: पक्की ईंटों की नालियाँ, चूने और चिरोड़ी के गारे का उपयोग।
प्रश्न: मुअनजो-दड़ो में कितने कुएँ पाए गए?
उत्तर: लगभग सात सौ कुएँ।
अभ्यास प्रश्न
- मुअनजो-दड़ो में जल निकासी की व्यवस्था कैसी थी?
- कुंड और कुएँ का क्या महत्व था?
- ग्रिड प्लान का अर्थ समझाइए।
उत्तर कुंजी
- पक्की ईंटों से बनी नालियाँ और कुंड।
- जल संरक्षण और स्वच्छता के लिए आवश्यक।
- सड़कें और गलियाँ व्यवस्थित जाल की तरह।
त्वरित संदर्भ
मुअनजो-दड़ो की नगर योजना और जल प्रबंधन प्राचीन काल की उन्नत तकनीक का उदाहरण है।
शब्दावली
- कुंड: जल संग्रहण के लिए बनाया गया तालाब या जलाशय।
- चिरोड़ी: मिट्टी का एक प्रकार का गारा।
- जल निकासी: पानी को बाहर निकालने की व्यवस्था।
मुअनजो-दड़ो के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू
मुअनजो-दड़ो की सभ्यता में शासन या सैन्य सत्ता के बजाय अनुशासन और सामाजिक व्यवस्था का महत्व था। यहाँ भव्य राजप्रासाद, मंदिर या समाधियाँ नहीं मिलीं, जो अन्य सभ्यताओं में आम हैं। मूर्तिशिल्प छोटे और औज़ार सीमित थे। यह सभ्यता कला-सिद्ध और समाज-पोषित थी, जिसमें भव्यता की जगह सौंदर्य और सादगी को महत्व दिया गया। यहाँ हथियारों का अभाव शासन के गैर-हिंसात्मक स्वरूप को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु
- शासन की गैर-हिंसात्मक व्यवस्था
- सामाजिक अनुशासन और नगर नियोजन
- साधारण और सौम्य सांस्कृतिक जीवन
- कला और वास्तुकला में सौंदर्यबोध
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
मुअनजो-दड़ो के 'नरेश' की मूर्ति पर छोटा मुकुट है, जो इस सभ्यता की लघुता और सौम्यता को दर्शाता है।
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: मुअनजो-दड़ो में शासन व्यवस्था कैसी थी?
उत्तर: शासन गैर-हिंसात्मक और अनुशासित था।
प्रश्न: इस सभ्यता में भव्यता की जगह किसे महत्व दिया गया?
उत्तर: सौंदर्य और सादगी को।
प्रश्न: मुअनजो-दड़ो में हथियारों का अभाव क्या दर्शाता है?
उत्तर: शासन का हिंसात्मक स्वरूप नहीं था।
अभ्यास प्रश्न
- मुअनजो-दड़ो की शासन व्यवस्था के बारे में बताइए।
- इस सभ्यता की सांस्कृतिक विशेषताएँ क्या हैं?
- मुअनजो-दड़ो में हथियारों की अनुपस्थिति का क्या अर्थ है?
उत्तर कुंजी
- गैर-हिंसात्मक, अनुशासित शासन।
- सौंदर्य और सादगी को महत्व।
- हिंसात्मक शासन का अभाव।
त्वरित संदर्भ
मुअनजो-दड़ो की सभ्यता सामाजिक अनुशासन और कला-संस्कृति में समृद्ध थी, जिसमें हिंसा का स्थान नहीं था।
शब्दावली
- अनुशासन: नियमों का पालन।
- सौंदर्यबोध: कला और सुंदरता की समझ।
- मूर्तिशिल्प: मूर्तियों का निर्माण।
HINDI — ALL CHAPTERS
1
जनसंचार माध्यम
1
विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
2
पत्रकारिता के विविध आयाम
2
पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
3
डायरी लिखने की कला
3
विशेष लेखन— स्वरूप और प्रकार
4
कथा-पटकथा
4
कैसे बनती है कविता
5
नाटक लिखने का व्याकरण
5
कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया
6
कैसे लिखें कहानी
6
स्ववृत्त(बायोडाटा) लेखन और रोज़गार संबंधी आवेदन पत्र
7
कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतरण
7
कोश-एक परिचय
8
कैसे बनता है रेडियो नाटक
9
नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
1
आत्मपरिचय
2
एक गीत
3
पतंग
4
कविता के बहाने
5
बात सीधी थी पर
6
कैमरे में बंद अपाहिज
7
उषा
8
बादल राग
9
कवितावली (उत्तर कांड से)
10
लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
11
रुबाइयाँ
12
छोटा मेरा खेत
13
बगुलों के पंख
14
भक्तिन
15
बाज़ार दर्शन
16
काले मेघा पानी दे
17
पहलवान की ढोलक
18
शिरीष के फूल
19
श्रम विभाजन और जाति-प्रथा
20
मेरी कल्पना का आदर्श-समाज
1
सिल्वर वैडिंग
2
जूझ
3
अतीत में दबे पाँव