CLASS 10 . HINDI . क्षितिज भाग–2 . स्वयं प्रकाश
Chapter 7 : स्वयं प्रकाश
Ch 7
HINDI
CLASS 10
स्वयं प्रकाश का परिचय
स्वयं प्रकाश का जन्म सन् 1947 में इंदौर, मध्यप्रदेश में हुआ था। उन्होंने मेकैनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और राजस्थान में एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में नौकरी की। वे वसुधा पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे। आठवें दशक में उभरे स्वयं प्रकाश हिंदी समकालीन कहानी के प्रमुख लेखक हैं। उनके तेरह कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें सूरज कब निकलेगा, आएँगे अच्छे दिन भी, आदमी जात का आदमी और संधान प्रमुख हैं। उनके उपन्यास बीच में विनय और ईंधन चर्चित रहे। उन्हें पहल सम्मान, बनमाली पुरस्कार, राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार आदि से सम्मानित किया गया। उनका निधन 2019 में हुआ।
स्वयं प्रकाश की कहानियाँ मध्यवर्गीय जीवन की सजीव चित्रण करती हैं। वे वर्ग-शोषण, जाति, संप्रदाय और लिंग के आधार पर हो रहे भेदभाव के विरुद्ध चेतना जगाते हैं। उनकी कहानियाँ रोचक किस्सागोई शैली में लिखी गई हैं जो हिंदी की वाचिक परंपरा को समृद्ध करती हैं।
मुख्य बिंदु
- जन्म और शिक्षा
- साहित्यिक योगदान
- प्रमुख कहानी संग्रह और उपन्यास
- पुरस्कार और सम्मान
- सामाजिक विषयों पर लेखन
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"आठवें दशक में उभरे स्वयं प्रकाश आज समकालीन कहानी के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं।"
"उनकी कहानियों में वर्ग-शोषण के विरुद्ध चेतना है और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ प्रतिकार का स्वर है।"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: स्वयं प्रकाश की कहानियों की विशेषता क्या है?
उत्तर: उनकी कहानियाँ मध्यवर्गीय जीवन की सजीव चित्रण करती हैं और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ चेतना जगाती हैं। वे रोचक किस्सागोई शैली में लिखी गई हैं जो हिंदी की वाचिक परंपरा को समृद्ध करती हैं।
अभ्यास प्रश्न
- सरल: स्वयं प्रकाश का जन्म कहाँ हुआ था?
- मध्यम: स्वयं प्रकाश की कहानियों में कौन-कौन से सामाजिक विषय प्रमुख हैं?
- कठिन: स्वयं प्रकाश की साहित्यिक उपलब्धियों और पुरस्कारों पर चर्चा करें।
उत्तर कुंजी
- स्वयं प्रकाश का जन्म इंदौर, मध्यप्रदेश में हुआ था।
- उनकी कहानियों में वर्ग-शोषण, जाति, संप्रदाय और लिंग के आधार पर भेदभाव के खिलाफ चेतना है।
- उन्होंने कई कहानी संग्रह और उपन्यास लिखे, और पहल सम्मान, बनमाली पुरस्कार, राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त किए।
त्वरित संदर्भ
स्वयं प्रकाश, समकालीन कहानी, सामाजिक चेतना, वाचिक परंपरा, पुरस्कार
शब्दावली
- समकालीन - वर्तमान काल के
- वाचिक परंपरा - मौखिक साहित्य की परंपरा
- वर्ग-शोषण - सामाजिक वर्गों के बीच अन्याय
- प्रतिकार - विरोध या प्रतिक्रिया
नेताजी का चश्मा कहानी का सारांश
कहानी 'नेताजी का चश्मा' एक छोटे कस्बे में लगी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की संगमरमर की मूर्ति के बारे में है। मूर्ति में चश्मा नहीं था, इसलिए कस्बे के एक चश्मेवाले, जिसे कैप्टन कहा जाता है, वह मूर्ति पर अलग-अलग चश्मे लगाता रहता है। यह चश्मा बदलने का काम कस्बे के लोगों के देशभक्ति और सहयोग का प्रतीक है। हालदार साहब, जो उस कस्बे से गुजरते हैं, मूर्ति के चश्मे में बदलाव देखकर आश्चर्य और प्रसन्नता महसूस करते हैं। कहानी में यह दिखाया गया है कि देशभक्ति केवल बड़े कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे-छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण होते हैं।
मुख्य बिंदु
- कस्बे का परिचय और मूर्ति की स्थापना
- मूर्ति में चश्मे की कमी और उसका समाधान
- कैप्टन चश्मेवाले का योगदान
- देशभक्ति का भाव और सामाजिक संदेश
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"नेताजी सुंदर लग रहे थे। कुछ-कुछ मासूम और कमसिन। फौजी वर्दी में। मूर्ति को देखते ही ‘दिल्ली चलो’ और ‘तुम मुझे खून दो...’ वगैरह याद आने लगते थे।"
"चश्मा तो था, लेकिन संगमरमर का नहीं था। एक सामान्य और सचमुच के चश्मे का चौड़ा काला फ्रेम मूर्ति को पहना दिया गया था।"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: कहानी में चश्मा बदलने का क्या अर्थ है?
उत्तर: चश्मा बदलना कस्बे के लोगों की देशभक्ति और सहयोग का प्रतीक है। यह दिखाता है कि देश के निर्माण में हर व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण है, चाहे वह बड़ा हो या छोटा।
अभ्यास प्रश्न
- सरल: नेताजी की मूर्ति में चश्मा क्यों नहीं था?
- मध्यम: कैप्टन चश्मेवाले का क्या योगदान था?
- कठिन: कहानी से देशभक्ति का क्या संदेश मिलता है?
उत्तर कुंजी
- मूर्ति में चश्मा नहीं था क्योंकि मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल चश्मा बनाने में असमर्थ थे।
- कैप्टन चश्मेवाला मूर्ति पर चश्मा लगाता और बदलता रहता था ताकि मूर्ति सुंदर और जीवंत लगे।
- देशभक्ति केवल बड़े कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे-छोटे प्रयास भी देश के निर्माण में योगदान करते हैं।
त्वरित संदर्भ
नेताजी की मूर्ति, चश्मा, कैप्टन चश्मेवाला, देशभक्ति, कस्बा
शब्दावली
- मूर्ति - किसी व्यक्ति की प्रतिमा
- संगमरमर - एक प्रकार का पत्थर
- चश्मा - आँखों की रक्षा या दृष्टि सुधारने वाला उपकरण
- देशभक्ति - अपने देश से प्रेम और समर्पण
- कैप्टन - चश्मेवाले का उपनाम