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बड़े-भाई-साहब

CLASS 10 . HINDI . स्पर्श भाग 2 . बड़े भाई-साहब

Chapter 8 : बड़े भाई साहब

Ch 8

HINDI

CLASS 10

बड़े भाई साहब का परिचय

यह पाठ प्रेमचंद द्वारा लिखा गया है, जिसमें बड़े भाई और छोटे भाई के बीच के संबंधों को दर्शाया गया है। बड़े भाई साहब पढ़ाई में बहुत मेहनती और अनुशासित हैं, जबकि छोटा भाई पढ़ाई में कम रुचि रखता है और खेल-कूद में अधिक समय बिताता है। बड़े भाई साहब अपने छोटे भाई की भलाई चाहते हैं और उसे सही मार्ग पर चलने के लिए समझाते हैं।

मुख्य बिंदु

  • बड़े भाई साहब पढ़ाई में गंभीर और मेहनती हैं।
  • छोटा भाई पढ़ाई में कम रुचि रखता है और खेल-कूद में व्यस्त रहता है।
  • बड़े भाई साहब का अनुशासन और सख्ती छोटे भाई के लिए एक मिसाल है।
  • दोनों भाइयों के बीच उम्र और अनुभव का अंतर है।
  • बड़े भाई साहब छोटे भाई को जीवन के महत्व और मेहनत की आवश्यकता समझाते हैं।

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"इस तरह अंग्रेज़ी पढ़ोगे, तो ज़िंदगी-भर पढ़ते रहोगे और एक हर्फ़ न आएगा। ... मैं कितनी मिहनत करता हूँ, यह तुम अपनी आँखों से देखते हो।"

हल किए गए उदाहरण

छोटे भाई की दृष्टि से बड़े भाई की सख्ती और अनुशासन को समझाना।

अभ्यास प्रश्न

स्तर 1 – सरल

  • बड़े भाई साहब पढ़ाई में क्यों मेहनती थे?
  • छोटा भाई पढ़ाई में क्यों कम रुचि रखता था?

स्तर 2 – मध्यम

  • बड़े भाई साहब और छोटे भाई के बीच उम्र और अनुभव का क्या महत्व है?
  • बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या समझाना चाहते थे?

स्तर 3 – कठिन

  • पाठ में बड़े भाई साहब के अनुशासन और सख्ती का छोटे भाई के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
  • आप बड़े भाई और छोटे भाई के संबंधों पर एक निबंध लिखिए।

उत्तर कुंजी

  • बड़े भाई साहब पढ़ाई में मेहनती थे क्योंकि वे अच्छी नींव डालना चाहते थे।
  • छोटा भाई पढ़ाई में कम रुचि रखता था क्योंकि उसे खेल-कूद में अधिक आनंद आता था।
  • उम्र और अनुभव के कारण बड़े भाई साहब छोटे भाई को समझाते थे और उसकी भलाई चाहते थे।
  • बड़े भाई साहब चाहते थे कि छोटा भाई मेहनत करे और जीवन में सफल हो।
  • बड़े भाई साहब की सख्ती से छोटे भाई को अनुशासन और मेहनत का महत्व समझ में आया।

त्वरित संदर्भ

  • बड़े भाई साहब – मेहनती, अनुशासित, समझदार
  • छोटा भाई – खेल-कूद में रुचि, कम पढ़ाई
  • उम्र का अंतर – अनुभव और समझ का कारण
  • मेहनत और अनुशासन – सफलता की कुंजी

शब्दावली

  • तालीम – शिक्षा
  • पुख्ता – मजबूत
  • तम्बीह – डाँट-डपट
  • सामंजस्य – तालमेल
  • मसलन – उदाहरणतः
  • इबारत – लेख
  • चेष्टा – कोशिश
  • जमात – कक्षा
  • हर्फ़ – अक्षर
  • मिहनत – परिश्रम
  • लताड़ – डाँट-डपट
  • सूक्ति-बाण – व्यंग्यात्मक कथन
  • स्कीम – योजना
  • अमल करना – पालन करना
  • अवहेलना – तिरस्कार
  • नसीहत – सलाह
  • फ़जीहत – अपमान
  • तिरस्कार – उपेक्षा
  • सालाना इम्तिहान – वार्षिक परीक्षा
  • लज्जास्पद – शर्मनाक
  • शरीक – शामिल
  • आतंक – भय
  • अव्वल – प्रथम
  • आधिपत्य – प्रभुत्व
  • स्वाधीन – स्वतंत्र
  • महीप – राजा
  • कुकर्म – बुरा काम
  • अभिमान – घमंड
  • मुमतहिन – परीक्षक
  • प्रयोजन – उद्देश्य
  • खराफ़ात – व्यर्थ की बातें
  • हिमाकत – बेवकूफ़ी
  • किफ़ायत – बचत
  • दुरुपयोग – अनुचित उपयोग
  • निःस्वाद – बिना स्वाद का
  • ताज्जुब – आश्चर्य
  • टास्क – कार्य
  • जलील – अपमानित
  • प्राणांतक – प्राण लेने वाला
  • कांतिहीन – चेहरे पर चमक न होना
  • स्वच्छंदता – आज़ादी
  • सहिष्णुता – सहनशीलता
  • कनकौआ – पतंग
  • अदब – इज़्ज़त
  • ज़हीन – प्रतिभावान
  • तजुरबा – अनुभव
  • बदहवास – बेहाल
  • मुहताज – दूसरे पर आश्रित

प्रेमचंद का जीवन परिचय

धनपत राय, जिन्हें हिंदी साहित्य में प्रेमचंद के नाम से जाना जाता है, 31 जुलाई 1880 को बनारस के निकट लमही गाँव में जन्मे। उन्होंने उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं में लेखन किया। उर्दू में उनका पहला कहानी संग्रह 'सोज़ेवतन' अंग्रेज़ सरकार द्वारा जब्त कर लिया गया था। उन्होंने स्कूल मास्टरी, इंस्पेक्टरी, मैनेजरी जैसे पदों पर कार्य किया और 'हंस', 'माधुरी' जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया।

प्रेमचंद को उनके जीवनकाल में ही कथा सम्राट कहा गया। उन्होंने आम आदमी के दुख-दर्द को अपनी रचनाओं में प्रमुखता दी। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं- गोदान, गबन, प्रेमाश्रम, सेवासदन, निर्मला, कर्मभूमि, रंगभूमि, कायाकल्प, प्रतिज्ञा और मंगलसूत्र (अपूर्ण)।

8 अक्टूबर 1936 को उनका निधन हुआ। उनकी सभी कहानियाँ 'मानसरोवर' नामक आठ खंडों में संकलित हैं।

पाठ प्रवेश

यह पाठ बड़े भाई और छोटे भाई के बीच के संबंधों को दर्शाता है। छोटे भाई को लगता है कि बड़े होने पर उसे कोई टोकता नहीं, लेकिन वास्तविकता में बड़े होने पर भी कई जिम्मेदारियाँ और प्रतिबंध होते हैं। बड़े भाई साहब, जो उम्र में थोड़े बड़े हैं, पर घर में उनसे छोटे भाई के लिए आदर्श बनने की अपेक्षा की जाती है। इस कारण उनका बचपना दब जाता है।

बड़े भाई साहब पढ़ाई में गंभीर हैं और अनुशासन का पालन करते हैं, जबकि छोटा भाई खेल-कूद में अधिक रुचि रखता है। बड़े भाई साहब का उद्देश्य छोटे भाई को सही मार्ग पर चलाना है।

बड़े भाई साहब का विवरण

बड़े भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े हैं, लेकिन केवल तीन दरजे आगे। वे पढ़ाई में धीमे लेकिन गहराई से काम करते हैं। उनका उद्देश्य मजबूत नींव डालना है ताकि भविष्य में सफलता मिले। वे अनुशासनप्रिय और अध्ययनशील हैं।

वे पढ़ाई के साथ-साथ कॉपी पर चित्र बनाना, शब्दों की नकल करना और रचनात्मक अभ्यास करते हैं। वे छोटे भाई की तुलना में अधिक गंभीर हैं, और पढ़ाई में अधिक समय देते हैं।

छोटा भाई पढ़ाई में कम रुचि रखता है और खेल-कूद में अधिक समय बिताता है। बड़े भाई साहब की सख्ती और अनुशासन छोटे भाई के लिए चुनौतीपूर्ण होते हैं।

केंद्रीय भाव एवं विषय

इस पाठ का केंद्रीय भाव है बड़े भाई और छोटे भाई के बीच उम्र, अनुभव, जिम्मेदारी और अनुशासन का अंतर। बड़े भाई साहब की सख्ती और मेहनत छोटे भाई के जीवन में अनुशासन और परिश्रम का महत्व समझाती है।

यह पाठ यह भी दर्शाता है कि बड़े होने का मतलब केवल उम्र बढ़ना नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों को समझना और निभाना भी है। छोटे भाई की दृष्टि से बड़े भाई की सख्ती कभी-कभी कठोर लगती है, लेकिन वह उसके हित के लिए होती है।

अभ्यास प्रश्न

स्तर 1 – सरल

  • बड़े भाई साहब पढ़ाई में क्यों मेहनती थे?
  • छोटा भाई पढ़ाई में कम रुचि क्यों रखता था?
  • बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या समझाना चाहते थे?

स्तर 2 – मध्यम

  • बड़े भाई और छोटे भाई के बीच उम्र और अनुभव का क्या महत्व है?
  • पाठ में बड़े भाई साहब की सख्ती का छोटे भाई पर क्या प्रभाव पड़ा?
  • बड़े भाई साहब के उपदेशों का छोटे भाई के जीवन पर क्या असर हुआ?

स्तर 3 – कठिन

  • आप बड़े भाई और छोटे भाई के संबंधों पर एक निबंध लिखिए।
  • पाठ में बड़े भाई साहब के अनुशासन और सख्ती को जीवन में सफलता के लिए क्यों आवश्यक बताया गया है?

उत्तर कुंजी

  • बड़े भाई साहब पढ़ाई में मेहनती थे क्योंकि वे मजबूत नींव डालना चाहते थे।
  • छोटा भाई पढ़ाई में कम रुचि रखता था क्योंकि उसे खेल-कूद में आनंद आता था।
  • बड़े भाई साहब छोटे भाई को अनुशासन और मेहनत का महत्व समझाना चाहते थे।
  • उम्र और अनुभव के कारण बड़े भाई साहब छोटे भाई के लिए मार्गदर्शक हैं।
  • बड़े भाई की सख्ती से छोटे भाई को जीवन में अनुशासन और परिश्रम का महत्व समझ में आया।
  • बड़े भाई के उपदेश छोटे भाई के आत्मसम्मान और सफलता में सहायक हुए।

त्वरित संदर्भ

  • बड़े भाई साहब – अनुशासित, मेहनती, समझदार
  • छोटा भाई – खेल-कूद में रुचि, कम पढ़ाई
  • उम्र का अंतर – अनुभव और समझ का कारण
  • मेहनत और अनुशासन – सफलता की कुंजी
  • सख्ती – अनुशासन और परिश्रम के लिए आवश्यक

शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ

  • तालीम - शिक्षा
  • पुख्ता - मज़बूत
  • तम्बीह - डाँट-डपट
  • सामंजस्य - तालमेल
  • मसलन - उदाहरणतः
  • इबारत - लेख
  • चेष्टा - कोशिश
  • जमात - कक्षा
  • हर्फ़ - अक्षर
  • मिहनत (मेहनत) - परिश्रम
  • लताड़ - डाँट-डपट
  • सूक्ति-बाण - व्यंग्यात्मक कथन / तीखी बातें
  • स्कीम - योजना
  • अमल करना - पालन करना
  • अवहेलना - तिरस्कार
  • नसीहत - सलाह
  • फ़जीहत - अपमान
  • तिरस्कार - उपेक्षा
  • सालाना इम्तिहान - वार्षिक परीक्षा
  • लज्जास्पद - शर्मनाक
  • शरीक - शामिल
  • आतंक - भय
  • अव्वल - प्रथम
  • आधिपत्य - प्रभुत्व / साम्राज्य
  • स्वाधीन - स्वतंत्र
  • महीप - राजा
  • कुकर्म - बुरा काम
  • अभिमान - घमंड
  • मुमतहिन - परीक्षक
  • प्रयोजन - उद्देश्य
  • खराफ़ात - व्यर्थ की बातें
  • हिमाकत - बेवकूफ़ी
  • किफ़ायत - बचत (से)
  • दुरुपयोग - अनुचित उपयोग
  • निःस्वाद - बिना स्वाद का
  • ताज्जुब - आश्चर्य
  • टास्क - कार्य
  • जलील - अपमानित
  • प्राणांतक - प्राण लेने वाला / प्राणों का अंत करने वाला
  • कांतिहीन - चेहरे पर चमक न होना
  • स्वच्छंदता - आज़ादी
  • सहिष्णुता - सहनशीलता
  • कनकौआ - पतंग
  • अदब - इज़्ज़त
  • ज़हीन - प्रतिभावान
  • तजुरबा - अनुभव
  • बदहवास - बेहाल
  • मुहताज (मोहताज) - दूसरे पर आश्रित

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