हबीब तनवीर का परिचय
हबीब तनवीर का जन्म 1923 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ था। उन्होंने 1944 में नागपुर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद वे ब्रिटेन की नाटक अकादमी से नाट्य-लेखन का अध्ययन करने गए। दिल्ली लौटकर उन्होंने पेशेवर नाट्यमंच की स्थापना की। हबीब तनवीर नाटककार, कवि, पत्रकार, नाट्य निर्देशक और अभिनेता के रूप में प्रसिद्ध हुए। उन्होंने लोकनाट्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके प्रमुख नाटकों में आगरा बाजार, चरनदास चोर, देख रहे हैं नैन, हिरमा की अमर कहानी शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने बसंत ऋतु का सपना, शाजापुर की शांति बाई, मिट्टी की गाड़ी और मुद्राराक्षस जैसे नाटकों का आधुनिक रूपांतरण भी किया। उन्हें कई पुरस्कारों, फेलोशिप और पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
मुख्य बिंदु
- जन्म और शिक्षा
- नाट्य-लेखन का अध्ययन
- प्रमुख नाटक और लोकनाट्य में योगदान
- पुरस्कार और सम्मान
पाठ्य प्रमाण
"हबीब तनवीर ने लोकनाट्य के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्य किया।"
अभ्यास प्रश्न
- हबीब तनवीर का जन्म कहाँ हुआ था?
- हबीब तनवीर ने नाट्य-लेखन का अध्ययन कहाँ किया?
- उनके प्रमुख नाटकों के नाम लिखिए।
उत्तर कुंजी
- हबीब तनवीर का जन्म रायपुर, छत्तीसगढ़ में हुआ था।
- उन्होंने ब्रिटेन की नाटक अकादमी से नाट्य-लेखन का अध्ययन किया।
- आगरा बाजार, चरनदास चोर, देख रहे हैं नैन, हिरमा की अमर कहानी।
शब्दावली
- नाट्य-लेखन: नाटक लिखने की कला।
- लोकनाट्य: जनता के बीच प्रचलित नाटक।
- फेलोशिप: अध्ययन या शोध के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता।
पाठ प्रवेश का सारांश
यह पाठ अंग्रेजों के भारत में आने और उनके व्यापार से शासन तक पहुँचने की कहानी बताता है। अंग्रेज़ों ने शुरू में व्यापार किया, पर बाद में उन्होंने रियासतों पर कब्जा करना शुरू कर दिया। अंग्रेजों को भारत से निकालने के लिए कई प्रयास हुए। इस पाठ में एक बहादुर व्यक्ति के कारनामों का वर्णन है, जो अंग्रेजों को देश से बाहर करने के लिए संघर्ष करता है। वह इतना निडर था कि शेर की माँद में जाकर भी अंग्रेजों के कर्नल पर रौब दिखा सकता था।
मुख्य बिंदु
- अंग्रेजों का भारत में आगमन और व्यापार
- रियासतों पर कब्जा
- अंग्रेजों को भारत से निकालने के प्रयास
- बहादुर व्यक्ति के कारनामे
अभ्यास प्रश्न
- अंग्रेज़ भारत में किस रूप में आए थे?
- अंग्रेज़ों ने रियासतों पर कब कब्जा करना शुरू किया?
- पाठ में वर्णित बहादुर व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर कुंजी
- अंग्रेज़ व्यापारी के रूप में भारत आए थे।
- धीरे-धीरे उन्होंने रियासतों पर कब्जा करना शुरू किया।
- उनका उद्देश्य अंग्रेजों को भारत से बाहर करना था।
कारतूस (एकांकी) का विश्लेषण
"कारतूस" एक एकांकी नाटक है जिसमें अंग्रेजों और वज़ीर अली के बीच संघर्ष को दर्शाया गया है। यह नाटक 1799 के समय की पृष्ठभूमि पर आधारित है और गोरखपुर के जंगलों में कर्नल कालिंज के खेमे में घटित होता है। नाटक के पात्रों में कर्नल, लेफ्टीनेंट, सिपाही और सवार शामिल हैं। नाटक में अंग्रेजों की चिंता, वज़ीर अली की बहादुरी और देशभक्ति की भावना प्रमुख रूप से उभरती है।
मुख्य बिंदु
- पात्र परिचय: कर्नल, लेफ्टीनेंट, सिपाही, सवार (वज़ीर अली)
- समय और स्थान: 1799, गोरखपुर के जंगल
- कहानी का सार: अंग्रेजों का वज़ीर अली को पकड़ने का प्रयास
- देशभक्ति और संघर्ष की भावना
पाठ्य प्रमाण
"वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही है।"
हल किए गए उदाहरण
नाटक में कर्नल और लेफ्टीनेंट के संवाद से पता चलता है कि वज़ीर अली अंग्रेजों के लिए कितना खतरनाक है। सवार के रूप में वज़ीर अली का आना और कारतूस लेना नाटक का महत्वपूर्ण दृश्य है।
अभ्यास प्रश्न
- नाटक "कारतूस" के मुख्य पात्र कौन-कौन हैं?
- वज़ीर अली की योजना क्या है?
- नाटक में अंग्रेजों की चिंता किस प्रकार व्यक्त हुई है?
- सवार ने कर्नल से क्या माँगा और क्यों?
उत्तर कुंजी
- कर्नल, लेफ्टीनेंट, सिपाही, सवार (वज़ीर अली)।
- वज़ीर अली की योजना नेपाल जाकर अफगान हमले का इंतजार करना और अंग्रेजों को भारत से निकालना है।
- अंग्रेजों की चिंता उनके संवादों में स्पष्ट है कि वे वज़ीर अली को पकड़ने के लिए पूरी फौज लगा चुके हैं।
- सवार ने कारतूस माँगे ताकि वज़ीर अली को गिरफ़्तार किया जा सके।
शब्दावली
- खेमा - डेरा / अस्थायी पड़ाव
- अफ़साने - कहानियाँ
- कारनामे - यादगार काम
- हुकूमत - शासन
- पैदाइश - जन्म
- तख्त - सिंहासन
- मसलेहत - रहस्य
- ऐश-पसंद - विलासी
- जाँबाज़ - बहादुर
- दमखम - शक्ति
- जाती तौर से - व्यक्तिगत रूप से
- वज़ीफ़ा - वेतन
- मुकर्रर - तय करना
- तलब किया - बुलाया
- हुकमरां - शासक
- हिफ़ाज़त - सुरक्षा
- गर्द - धूल
- काफ़िला - यात्रियों का समूह
- शुब्हे - संदेह
- गुंजाइश - संभावना
- तन्हाई - एकांत
- दीवार हमगोश दारद - दीवारों के भी कान होते हैं
- मुकाम - पड़ाव
- लावलश्कर - बड़ी सेना
- कारतूस - गोली और बारूद भरी नली
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