लीलाधर मंडलोई
लीलाधर मंडलोई
- उनका जन्म 1954 की जन्माष्टमी के दिन छिंदवाड़ा ज़िले के गाँव गुढ़ी में हुआ; शिक्षा भोपाल और रायपुर में हुई।
- 1987 में कॉमनवेल्थ रिलेशंस ट्रस्ट, लंदन ने उन्हें प्रसारण की उच्च शिक्षा के लिए आमंत्रित किया; वे प्रसार भारती दूरदर्शन के महानिदेशक का कार्यभार सँभाल रहे हैं।
- वे मूलतः कवि हैं; उनकी कविताओं में छत्तीसगढ़ अंचल की बोली की मिठास और जनजीवन का चित्रण है। अंडमान-निकोबार की जनजातियों पर उनका गद्य समाजशास्त्रीय अध्ययन भी है।
- उन्होंने लोककथा, लोकगीत, यात्रा-वृत्तांत, डायरी, मीडिया, रिपोर्ताज़ और आलोचना में लिखा तथा कई पुरस्कार पाए। प्रमुख कृतियाँ: घर-घर घूमा, रात-बिरात, मगर एक आवाज़, देखा-अनदेखा और काला पानी।
पाठ का परिचय
- पुरानी सभ्यताओं में अनेक लोककथाएँ प्रचलित होती हैं। वे आवश्यक नहीं कि ठीक उसी रूप में सचमुच घटी हों, लेकिन उनमें कोई संदेश या सीख अवश्य निहित होती है; मंडलोई ने अंडमान-निकोबार की कुछ लोककथाओं को फिर से लिखा है।
- तताँरा-वामीरो कथा एक छोटे द्वीप में गहरे जड़ें जमाए विद्वेष को मिटाने के लिए प्रेमी युगल के आत्मबलिदान की कहानी है। उनका बलिदान समाज के सामने मिसाल बना और आज भी द्वीपवासी उन्हें गर्व तथा श्रद्धा से याद करते हैं।
- कथा का संदेश है कि प्रेम लोगों को जोड़ता है, जबकि घृणा दूरी बढ़ाती है; समाज के लिए किया गया बलिदान व्यर्थ नहीं जाता।
त्वरित पुनरावृत्ति
- लीलाधर मंडलोई का जन्म 1954 की जन्माष्टमी पर गाँव गुढ़ी में हुआ; उनकी शिक्षा भोपाल और रायपुर में हुई।
- 1987 में कॉमनवेल्थ रिलेशंस ट्रस्ट, लंदन ने उन्हें प्रसारण की उच्च शिक्षा के लिए आमंत्रित किया।
- वे मूलतः कवि हैं और उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ी बोली तथा जनजीवन का चित्रण मिलता है।
- लोककथाएँ जरूरी नहीं कि सुनाई या पढ़ी गई उसी तरह सचमुच घटी हों, पर उनमें सीख या संदेश होता है।
- तताँरा-वामीरो कथा द्वीप के विद्वेष को मिटाने के लिए प्रेमी युगल के बलिदान पर केंद्रित है।
- कथा का संदेश है कि प्रेम समाज को जोड़ता है, जबकि घृणा दूरी बढ़ाती है।
तताँरा-वामीरों कथा - पहला भाग
द्वीपों की पृष्ठभूमि
- लिटिल अंदमान: अंदमान द्वीपसमूह का अंतिम दक्षिणी द्वीप, जो पोर्ट ब्लेयर से लगभग 100 किलोमीटर दूर है।
- कार-निकोबार: निकोबार द्वीपसमूह का पहला प्रमुख द्वीप; यह लिटिल अंदमान से 96 किलोमीटर दूर है।
- निकोबार द्वीपसमूह: यह निकोबारी जनजाति की आदिम संस्कृति का केंद्र है।
- लोकविश्वास: निकोबारियों का मानना है कि प्राचीन काल में लिटिल अंदमान और कार-निकोबार जुड़े हुए थे; उनके अलग होने की लोककथा प्रचलित है।
तताँरा का परिचय
- स्वभाव: तताँरा सुंदर, शक्तिशाली, नेक और मददगार युवक था। वह पूरे द्वीप के लोगों की सेवा को अपना कर्तव्य मानता था।
- लोकप्रियता: उसके त्याग और साहस के कारण लोग उसका आदर करते; मुसीबत में उसे बुलाते और पर्व-त्योहारों पर आमंत्रित करते थे।
- तलवार: वह कमर में लकड़ी की तलवार रखता और उससे कभी अलग नहीं होता था। लोग उसकी तलवार में दैवीय शक्ति मानते थे, हालाँकि वह उसे दूसरों के सामने इस्तेमाल नहीं करता था।
समुद्र-तट पर वामीरो से भेंट
- पहली मुलाकात: दिनभर के काम के बाद समुद्र-तट पर बैठे तताँरा ने एक मधुर गीत सुना और उसकी ओर खिंचता हुआ वामीरो तक पहुँचा।
- वामीरो: वह डूबते सूरज के रंग निहारते हुए श्रृंगार-गीत गा रही थी। एक ऊँची लहर से भीगने पर उसने गाना रोक दिया।
- बातचीत: तताँरा बार-बार गीत पूरा करने को कहता रहा और वामीरो उससे उसका परिचय पूछती रही। वह उसे अपने गाँव का युवक न होने के कारण जवाब देने के लिए बाध्य नहीं मानती थी।
- नाम और विदाई: अपनी गलती समझकर तताँरा ने क्षमा माँगी और वामीरो का नाम पूछा। वामीरो ने अपना नाम बताया, पर अगले दिन आने के प्रश्न पर कहा—“नहीं ... शायद ... कभी नहीं”; फिर वह लपाती की ओर दौड़ गई।
- अंतिम दृश्य: तताँरा ने अपना नाम बताया और उसी चट्टान पर प्रतीक्षा करने की बात कही, जबकि वामीरो बिना रुके चली गई।
तताँरा
- परोपकारी: गाँव और पूरे द्वीप के लोगों की सहायता करता था।
- साहसी और लोकप्रिय: संकट में लोग उसे याद करते और उसका सम्मान करते थे।
- भावुक: वामीरो का गीत और व्यक्तित्व उसे इतना प्रभावित करते हैं कि वह अपना परिचय देना भी भूल जाता है।
- विनम्र: अपनी भूल समझकर क्षमा माँगता है और वामीरो से आग्रह करता है।
वामीरो
- मधुर गायिका: समुद्र के किनारे श्रृंगार-गीत गा रही थी।
- स्वाभिमानी: अजनबी युवक के प्रश्नों पर अपने गाँव के नियम का हवाला देकर उसका परिचय पूछती है।
- संयमी और संकोची: तताँरा के आग्रह के बाद भी अगले दिन मिलने का वादा नहीं करती और वहाँ से चली जाती है।
आकर्षण और सामाजिक नियम
तताँरा और वामीरो की पहली भेंट में गीत तथा सौंदर्य से उपजा आकर्षण दिखाई देता है। साथ ही, वामीरो का व्यवहार गाँव के नियमों और सामाजिक मर्यादा का संकेत देता है।
- विलक्षण
- असाधारण, अनोखा
- तंद्रा
- ऊँघ या अर्धचेतना की अवस्था
- चैतन्य
- सचेत, जागरूक
- विस्मित
- आश्चर्यचकित
- संयत
- अपने भावों पर नियंत्रण रखने वाला
- अन्यमनस्क
- ध्यान कहीं और लगा हुआ
- विवशता
- लाचारी
- बाट जोहना
- प्रतीक्षा करना
निकोबारियों का लिटिल अंदमान और कार-निकोबार के बारे में क्या लोकविश्वास है?
तताँरा की तलवार के बारे में लोगों की क्या धारणा थी?
वामीरो ने तताँरा के अगले दिन मिलने के आग्रह का क्या उत्तर दिया?
त्वरित पुनरावृत्ति
- निकोबारियों की लोककथा के अनुसार लिटिल अंदमान और कार-निकोबार कभी जुड़े हुए थे।
- निकोबार द्वीपसमूह निकोबारी जनजाति की आदिम संस्कृति का केंद्र है।
- तताँरा सेवाभावी और साहसी युवक था; उसकी लकड़ी की तलवार को लोग चमत्कारी मानते थे।
- समुद्र-तट पर तताँरा ने वामीरो का मधुर गीत सुना और उससे मिलने पहुँचा।
- वामीरो ने तताँरा से उसका परिचय पूछा और गाँव के नियम का उल्लेख किया।
- वामीरो ने अपना नाम बताया, पर दोबारा मिलने का वादा किए बिना चली गई।
तताँरा-वामीरों कथा – दूसरा भाग
वामीरो की बेचैनी और मिलने की प्रतीक्षा
- वामीरो का द्वंद्व: उसने तताँरा के बारे में सुना था कि वह अद्भुत साहसी युवक है। सामने आने पर वह सुंदर, बलिष्ठ, शांत, सभ्य और भोला लगा; वामीरो उसे भूल नहीं पाई।
- तताँरा की प्रतीक्षा: अगले दिन वह लपाती की समुद्री चट्टान पर वामीरो की राह देखता रहा। वामीरो आई, पर अँधेरा बढ़ने पर अचानक घर लौट गई।
- मूक प्रेम: दोनों रोज़ उसी स्थान पर मिलते और बिना बोले एक-दूसरे को निहारते थे। लपाती के कुछ युवकों ने उनका प्रेम भाँप लिया।
गाँव की परंपरा और पशु-पर्व
- विवाह-नियम: वामीरो लपाती की और तताँरा पासा गाँव का था। रीति के अनुसार विवाह के लिए दोनों का एक ही गाँव का होना आवश्यक था।
- अडिग प्रेम: समझाने के प्रयासों के बावजूद दोनों मिलते रहे और उनके संबंध की चर्चा फैलती गई।
- पशु-पर्व: पासा में सालाना आयोजन में पशुओं का प्रदर्शन, युवकों की शक्ति-परीक्षा, नृत्य-संगीत और भोजन होता था। तताँरा का ध्यान वामीरो को खोजने में लगा था।
तलवार से द्वीप का विभाजन
- सार्वजनिक अपमान: पशु-पर्व में वामीरो रोते हुए तताँरा के पास पहुँची। उसकी माँ ने दोनों को देखकर तताँरा का अपमान किया और गाँव के लोग भी उसका विरोध करने लगे।
- क्रोध और तलवार: वामीरो के दुख तथा अपनी असहायता से व्याकुल तताँरा ने तलवार धरती में गाड़कर पूरी शक्ति से खींची।
- धरती का फटना: तलवार से बनी दरार बढ़ती गई और द्वीप दो भागों में बँट गया। तताँरा और वामीरो अलग-अलग ओर रह गए।
- वियोग: तताँरा का हिस्सा समुद्र में धँसने लगा। दोनों एक-दूसरे को पुकारते रहे, पर मिल न सके। तताँरा घायल होकर अचेत हो गया।
वियोग का परिणाम और लोककथा का संदेश
- तताँरा की स्थिति: वह कटे हुए द्वीप के अंतिम भूखंड पर अचेत पड़ा था; यह भूखंड संयोगवश द्वीप के दूसरे हिस्से से जुड़ा हुआ था। बाद में वह कहाँ पहुँचा और उसका क्या हुआ, कोई नहीं जानता।
- वामीरो की दशा: वह तताँरा को खोजती रही, खाना-पीना छोड़ दिया और परिवार से अलग-सी हो गई।
- लोकविश्वास: निकोबारियों के अनुसार तलवार से कार-निकोबार और लिटिल अंदमान अलग हुए; दोनों के बीच दूरी लगभग ९६ कि.मी. है।
- परिवर्तन: लोककथा तताँरा-वामीरो की त्यागमयी मृत्यु को दूसरे गाँवों में भी विवाह-संबंध शुरू होने के सुखद बदलाव से जोड़ती है।
तताँरा
- प्रेमनिष्ठ: परंपरा के विरोध के बावजूद वामीरो से मिलता रहता है।
- भावुक और स्वाभिमानी: वामीरो का दुख और सार्वजनिक अपमान उसे गहरे व्यथित करते हैं।
- क्रोधी क्षण: विवशता में तलवार से धरती चीर देता है; यह आवेग विनाशकारी परिणाम लाता है।
वामीरो
- प्रेममयी: सामाजिक रोक के बावजूद तताँरा से मिलने आती है।
- संवेदनशील: उसके वियोग में टूट जाती है और लगातार उसे खोजती रहती है।
- दृढ़: अपने प्रेम से पीछे हटने को तैयार नहीं होती।
प्रेम, रूढ़ि और त्याग
कथा प्रेम के सामने कठोर सामाजिक रूढ़ियों की पीड़ा दिखाती है। लोककथा के अनुसार तताँरा-वामीरो का त्याग गाँवों के बीच विवाह-संबंध की परंपरा बदलने का कारण बना।
तताँरा ने तलवार धरती में क्यों गाड़कर खींची?
कथा के अनुसार तताँरा-वामीरो की कथा से क्या परिवर्तन आया?
त्वरित पुनरावृत्ति
- प्रेम: तताँरा और वामीरो सामाजिक रोक के बावजूद मिलते रहे।
- रूढ़ि: विवाह के लिए एक ही गाँव का होना आवश्यक माना जाता था।
- पशु-पर्व: वामीरो के सार्वजनिक रूप से रोने और तताँरा के अपमान से संघर्ष बढ़ा।
- विभाजन: तताँरा के तलवार खींचने से धरती फटी और द्वीप दो भागों में बँट गया।
- वियोग: दोनों अलग हो गए; तताँरा संयोगवश जुड़े अंतिम भूखंड पर अचेत पड़ा था, फिर उसका क्या हुआ अज्ञात है।
- बदलाव: लोककथा उनके त्यागमयी अंत को गाँवों के बीच विवाह-संबंध शुरू होने से जोड़ती है।
शब्दार्थ और टिप्पणियाँ
- शृंखला; आदिम; विभक्त
- शृंखला—क्रम या कड़ी; आदिम—प्रारंभिक; विभक्त—बँटा हुआ।
- लोककथा; आत्मीय
- लोककथा—जन-समाज में प्रचलित कथा; आत्मीय—अपना।
- साहसिक कारनामा; विलक्षण
- साहसिक कारनामा—साहसपूर्ण कार्य; विलक्षण—असाधारण।
- बयार; तंद्रा
- बयार—शीतल-मंद वायु; तंद्रा—एकाग्रता।
- चैतन्य; विकल; संचार
- चैतन्य—चेतना या सजगता; विकल—बेचैन या व्याकुल; संचार—भावना का उत्पन्न होना।
- असंगत; सम्मोहित; झुँझलाना
- असंगत—अनुचित; सम्मोहित—मुग्ध; झुँझलाना—चिढ़ना।
- अन्यमनस्कता; निर्निमेष
- अन्यमनस्कता—चित्त का कहीं और होना; निर्निमेष—बिना पलक झपकाए।
- अचंभित; रोमांचित; निश्चल
- अचंभित—चकित; रोमांचित—पुलकित; निश्चल—स्थिर।
- अफ़वाह; उफनना
- अफ़वाह—उड़ती खबर; उफनना—उबलना।
- निषेध परंपरा; शमन
- निषेध परंपरा—वह परंपरा जिस पर रोक लगी हो; शमन—शांत करना।
- घोंपना
- भोंकना।
- दरार
- फटने से बनी रेखा जैसी लंबी जगह या छिद्र।
त्वरित पुनरावृत्ति
- शृंखला का अर्थ क्रम या कड़ी और विभक्त का अर्थ बँटा हुआ है।
- बयार शीतल-मंद वायु है; चैतन्य का अर्थ सजगता है।
- विकल का अर्थ बेचैन, जबकि अन्यमनस्कता का अर्थ चित्त कहीं और होना है।
- निर्निमेष का अर्थ बिना पलक झपकाए; निश्चल का अर्थ स्थिर है।
- अफ़वाह उड़ती खबर है; शमन का अर्थ शांत करना है।
- घोंपना यानी भोंकना और दरार फटने से बना लंबा छिद्र है।
Hindi — ALL CHAPTERS
1
माता का अँचल
2
साना - साना हाथ जोड़ि...
3
मैं क्यों लिखता हूँ
1
सूरदास
2
तुलसीदास
3
जयशंकर प्रसाद
4
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
5
नागार्जुन
6
मंगलेश डबराल
7
स्वयं प्रकाश
8
रामवृक्ष बेनीपुरी
9
यशपाल
10
मन्नू भंडारी
11
यतींद्र मिश्र
12
भदंत आनंद कौसल्यायन
1
हरिहर काका
2
सपनों के-से दिन
3
टोपी शुक्ला
1
साखी
2
पद
3
मनुष्यता
4
पर्वत प्रदेश में पावस
5
तोप
6
कर चले हम फ़िदा
7
आत्मत्राण
8
बड़े भाई साहब
9
डायरी का एक पन्ना
10
तताँरा-वामीरो कथा
11
तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेन्द्र
12
अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले
13
पतझर में टूटी पत्तियाँ
14
कारतूस (एकांकी)