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तोप

CLASS 10 . HINDI . स्पर्श भाग 2 . तोप

Chapter 5 : तोप

Ch 5

HINDI

CLASS 10

वीरेन डंगवाल का परिचय

वीरेन डंगवाल का जन्म 5 अगस्त 1947 को उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के कीर्तिनगर में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल से प्राप्त की और उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरी की। वे एक प्राध्यापक थे और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे।

डंगवाल की कविताओं में समाज के सामान्य लोगों और हाशिए पर स्थित जीवन के विलक्षण दृश्य और ब्योरे मिलते हैं। उन्होंने अपनी कविताओं में उन जीव-जंतुओं और वस्तुओं को भी स्थान दिया जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

उनके दो प्रमुख कविता संग्रह हैं: "इसी दुनिया में" और "दुष्चक्र में स्रष्टा"। पहले संग्रह के लिए उन्हें श्रीकांत वर्मा पुरस्कार और दूसरे के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला। उन्होंने कई अन्य भाषाओं की कविताओं का हिंदी में अनुवाद भी किया। उनका निधन 28 सितंबर 2015 को हुआ।

मुख्य बिंदु

  • जन्म और शिक्षा
  • प्राध्यापक और पत्रकारिता से जुड़ाव
  • कविताओं में समाज के हाशिए पर जीवन का चित्रण
  • प्रमुख कविता संग्रह और पुरस्कार
  • अनुवाद कार्य

पाठ्य प्रमाण

"समाज के साधारण जन और हाशिए पर स्थित जीवन के विलक्षण ब्योरे और दृश्य वीरेन की कविताओं की विशिष्टता मानी जाती है।"

अभ्यास प्रश्न

  • वीरेन डंगवाल का जन्म कहाँ और कब हुआ था?
  • उनकी कविताओं की विशेषता क्या है?
  • उनके प्रमुख कविता संग्रह कौन-कौन से हैं?

उत्तर कुंजी

  • उत्तर 1: वीरेन डंगवाल का जन्म 5 अगस्त 1947 को उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के कीर्तिनगर में हुआ था।
  • उत्तर 2: उनकी कविताओं में समाज के सामान्य लोगों और हाशिए पर स्थित जीवन के विलक्षण दृश्य और ब्योरे मिलते हैं।
  • उत्तर 3: उनके प्रमुख कविता संग्रह "इसी दुनिया में" और "दुष्चक्र में स्रष्टा" हैं।

शब्दावली

  • प्राध्यापक: शिक्षक
  • हाशिए पर: समाज के किनारे पर स्थित
  • अनुवाद: एक भाषा से दूसरी भाषा में रूपांतरण
  • साहित्य अकादेमी पुरस्कार: हिंदी साहित्य का प्रतिष्ठित पुरस्कार

तोप का विश्लेषण

"तोप" कविता में 1857 की एक तोप का वर्णन है जो कंपनी बाग के मुहाने पर रखी गई है। यह तोप भारत के स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाती है। यह तोप पहले बड़ी ताकतवर थी और उसने कई वीरों को परास्त किया था, लेकिन अब वह केवल एक विरासत के रूप में बची है। कविता में यह तोप समाज के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत की गई है।

मुख्य बिंदु

  • तोप का स्थान और महत्व
  • इतिहासिक संदर्भ: 1857 का स्वतंत्रता संग्राम
  • तोप की वर्तमान स्थिति
  • प्रतीकात्मक अर्थ

पाठ्य प्रमाण

"कंपनी बाग के मुहाने पर धर रखी गई है यह 1857 की तोप।"

"कभी-कभी शैतानी में वे इसके भीतर भी घुस जाती हैं खास कर गौरैयां।"

हल किए गए उदाहरण

प्रश्न: तोप कविता में तोप का क्या प्रतीकात्मक महत्व है?

उत्तर: तोप स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाती है। यह शक्ति और संघर्ष का प्रतीक है, जो पहले वीरों को परास्त करती थी, लेकिन अब केवल एक विरासत के रूप में बची है।

अभ्यास प्रश्न

  • तोप कविता में तोप कहाँ रखी गई है?
  • तोप की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?
  • कविता में चिड़ियों का तोप के साथ क्या संबंध है?
  • तोप कविता का केंद्रीय विषय क्या है?

उत्तर कुंजी

  • उत्तर 1: तोप कंपनी बाग के मुहाने पर रखी गई है।
  • उत्तर 2: तोप पहले बड़ी ताकतवर थी, कई वीरों को परास्त किया, अब वह विरासत के रूप में है और साल में दो बार चमकाई जाती है।
  • उत्तर 3: चिड़ियाँ तोप पर बैठती हैं और कभी-कभी इसके भीतर भी घुस जाती हैं, जो तोप की निष्क्रियता को दर्शाता है।
  • उत्तर 4: कविता का केंद्रीय विषय इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और विरासत की याद है।

शब्दावली

  • कंपनी बाग: ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बनवाया गया बाग
  • सैलानी: दर्शनीय स्थलों पर आने वाले यात्री
  • सूरमा: वीर योद्धा
  • धज्जे: चिथड़े-चिथड़े करना
  • फ़ारिग: खाली, मुक्त

पाठ प्रवेश का विश्लेषण

पाठ प्रवेश में दो प्रकार के प्रतीकों का वर्णन है: एक वे जो हमें देश और समाज की प्राचीन उपलब्धियों की याद दिलाते हैं, और दूसरे वे जो हमारे पूर्वजों की गलतियों और उनके परिणामों को दर्शाते हैं। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में व्यापार के लिए आई थी, लेकिन बाद में वह शासक बन गई। कंपनी ने तोपें बनवाईं जो स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को मारने में इस्तेमाल हुईं। अंततः हमारे पूर्वजों ने उस सत्ता को उखाड़ फेंका।

मुख्य बिंदु

  • प्रतीकों के दो प्रकार
  • ईस्ट इंडिया कंपनी का इतिहास
  • स्वतंत्रता संग्राम में तोपों की भूमिका
  • भविष्य के लिए चेतावनी

पाठ्य प्रमाण

"कभी ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में व्यापार करने के इरादे से आई थी। भारत ने उसका स्वागत किया था, लेकिन वह हमारी शासक बन बैठी।"

"फिर भी हमें इन प्रतीकों के बहाने यह याद रखना होगा कि भविष्य में कोई और ऐसी कंपनी यहाँ पाँव न जमाने पाए।"

अभ्यास प्रश्न

  • पाठ प्रवेश में किन दो प्रकार के प्रतीकों का उल्लेख है?
  • ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में क्या भूमिका निभाई?
  • तोपों का स्वतंत्रता संग्राम में क्या महत्व था?
  • पाठ हमें भविष्य के लिए क्या चेतावनी देता है?

उत्तर कुंजी

  • उत्तर 1: एक प्रकार के प्रतीक देश की प्राचीन उपलब्धियों की याद दिलाते हैं, दूसरे प्रकार के प्रतीक पूर्वजों की गलतियों को दर्शाते हैं।
  • उत्तर 2: ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार के लिए आई थी, लेकिन बाद में शासक बन गई।
  • उत्तर 3: तोपों ने स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को मारने में भूमिका निभाई।
  • उत्तर 4: पाठ भविष्य में ऐसी किसी कंपनी के आने से सावधान रहने की चेतावनी देता है।

शब्दावली

  • प्रतीक: किसी वस्तु या विचार का प्रतिनिधित्व करने वाला चिन्ह
  • धरोहर: विरासत
  • दारुण: भयानक, कष्टकारी
  • तांडव: प्रलयकारी नृत्य

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