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यशपाल

CLASS 10 . HINDI . क्षितिज भाग–2 . यशपाल

Chapter 9 : यशपाल

Ch 9

HINDI

CLASS 10

यशपाल का जीवन परिचय

यशपाल का जन्म सन् 1903 में पंजाब के फ़ीरोज़पुर छावनी में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा काँगड़ा में प्राप्त की और बाद में लाहौर के नेशनल कॉलेज से बी.ए. की डिग्री हासिल की। यशपाल का परिचय भगत सिंह और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों से हुआ, जिससे वे स्वाधीनता संग्राम की क्रांतिकारी धारा से जुड़ गए और जेल भी गए। उनकी मृत्यु सन् 1976 में हुई।

यशपाल की रचनाओं में आम आदमी के जीवन और समस्याओं का चित्रण मिलता है। वे यथार्थवादी शैली के प्रमुख लेखक हैं, जिनकी रचनाएँ सामाजिक विषमता, राजनीतिक पाखंड और रूढ़ियों के खिलाफ मुखर हैं।

मुख्य बिंदु

  • जन्म और शिक्षा
  • स्वाधीनता संग्राम में भागीदारी
  • यथार्थवादी लेखन शैली
  • सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर लेखन
  • प्रमुख कृतियाँ: ज्ञानदान, तर्क का तूफ़ान, पिंजरे की उड़ान, वा दुलिया, फूलों का कुर्ता, झूठा सच, अमिता, दिव्या, पार्टी कामरेड, दादा कामरेड, मेरी तेरी उसकी बात

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"झूठा सच" उपन्यास भारत विभाजन की त्रासदी का मार्मिक दस्तावेज़ है।

अभ्यास प्रश्न

  • यशपाल का जन्म कहाँ और कब हुआ था?
  • यशपाल की लेखन शैली किस प्रकार की है?
  • यशपाल की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर कुंजी

  • यशपाल का जन्म सन् 1903 में पंजाब के फ़ीरोज़पुर छावनी में हुआ था।
  • उनकी लेखन शैली यथार्थवादी है।
  • उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं: ज्ञानदान, तर्क का तूफ़ान, पिंजरे की उड़ान, वा दुलिया, फूलों का कुर्ता, झूठा सच, अमिता, दिव्या, पार्टी कामरेड, दादा कामरेड, मेरी तेरी उसकी बात।

शब्दावली

  • यथार्थवादी: वास्तविकता पर आधारित लेखन शैली।
  • स्वाधीनता संग्राम: भारत की आज़ादी के लिए लड़ाई।
  • त्रासदी: दुखद घटना।

"जूते" कहानी का विश्लेषण

यशपाल की कहानी "जूते" लखनवी अंदाज़ व्यंग्य शैली में लिखी गई है। इस कहानी में वे पतनशील सामंती वर्ग की बनावटी जीवनशैली और वास्तविकता से दूर रहने की प्रवृत्ति पर कटाक्ष करते हैं। कहानी यह दिखाती है कि बिना कथ्य के कहानी नहीं बन सकती, परंतु यह एक स्वतंत्र रचना के रूप में भी पढ़ी जा सकती है।

मुख्य बिंदु

  • लखनवी अंदाज़ व्यंग्य
  • सामंती वर्ग की आलोचना
  • बिना कथ्य कहानी की असंभवता
  • समाज में परजीवी संस्कृति की उपस्थिति

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

कहानी में पतनशील सामंती वर्ग के जीवन का व्यंग्यात्मक चित्रण है।

अभ्यास प्रश्न

  • "जूते" कहानी का मुख्य विषय क्या है?
  • यशपाल ने इस कहानी में किस वर्ग की आलोचना की है?

उत्तर कुंजी

  • कहानी का मुख्य विषय पतनशील सामंती वर्ग की बनावटी जीवनशैली है।
  • यशपाल ने सामंती वर्ग की आलोचना की है।

शब्दावली

  • व्यंग्य: कटु और हास्यपूर्ण आलोचना।
  • सामंती वर्ग: पुराने ज़माने के ज़मींदार और शासक।
  • परजीवी: जो दूसरों पर निर्भर होकर जीवन यापन करता है।

"लखनवी अंदाज़" कहानी का सार

"लखनवी अंदाज़" कहानी में लेखक एक सफ़ेदपोश नवाब साहब और एक आम यात्री के बीच ट्रेन में हुई बातचीत का चित्रण करते हैं। यह कहानी सामाजिक भेदभाव, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाती है। नवाब साहब की खीरे खाने की विधि और उनकी शिष्टता कहानी का मुख्य आकर्षण है, जो खानदानी तहज़ीब और नज़ाकत को उजागर करती है।

मुख्य बिंदु

  • ट्रेन में यात्रा का दृश्य
  • नवाब साहब की शिष्टता और आत्मसम्मान
  • सामाजिक भेदभाव और सांस्कृतिक परंपराएँ
  • खीरे खाने की अनूठी विधि
  • लेखक की व्यंग्यात्मक दृष्टि

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"नवाब साहब ने खीरे की फाँकों को नाक के पास ले जाकर, वासना से रसास्वादन कर खिड़की के बाहर फेंकते गए।"

हल किए गए उदाहरण

प्रश्न: नवाब साहब की खीरे खाने की विधि से क्या सामाजिक संदेश मिलता है?
उत्तर: नवाब साहब की खीरे खाने की विधि उनके खानदानी रईसों के शिष्टाचार और आत्मसम्मान को दर्शाती है। यह दिखाती है कि वे अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए परंपराओं का पालन करते हैं, भले ही वे असुविधाजनक स्थिति में हों।

अभ्यास प्रश्न

  • "लखनवी अंदाज़" कहानी में नवाब साहब का चरित्र कैसे प्रस्तुत किया गया है?
  • खीरे खाने की विधि से कहानी में क्या संदेश मिलता है?
  • कहानी में सामाजिक भेदभाव का क्या चित्रण है?

उत्तर कुंजी

  • नवाब साहब शिष्ट, आत्मसम्मान रखने वाले और परंपराओं के प्रति सजग हैं।
  • खीरे खाने की विधि खानदानी तहज़ीब और सामाजिक प्रतिष्ठा को दर्शाती है।
  • कहानी में सामाजिक भेदभाव और वर्ग भेद स्पष्ट रूप से दिखाए गए हैं।

शब्दावली

  • नवाब: एक उच्च सामाजिक वर्ग का व्यक्ति।
  • तहज़ीब: सभ्यता और शिष्टाचार।
  • व्यंग्यात्मक: कटु और हास्यपूर्ण दृष्टिकोण।