CLASS 7 . HINDI . मल्हार . फूल और-काँटा-अयोध्यासिंह-उपाध्याय-हरिऔध
Chapter 3 : फूल और काँटा (अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध')
Ch 3
HINDI
CLASS 7
कवि से परिचय
"उठो लाल, अब आँखें खोलो। पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।" यह पंक्ति बच्चों के लिए प्रसिद्ध कविता से है। इस कविता के रचयिता अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' हैं, जो "फूल और काँटा" के कवि भी हैं। हरिऔध जी का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में हुआ था। वे बच्चों के लिए अनेक रोचक और शिक्षाप्रद कविताएँ लिखते थे। उनकी प्रमुख काव्य-कृति "प्रियप्रवास" खड़ी बोली का पहला महाकाव्य मानी जाती है। उनके कविता-संकलनों में "चंद्र-खिलौना" और "खेल-तमाशा" विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
मुख्य बिंदु
- अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का जन्म आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ।
- वे बच्चों के लिए सरल और रोचक कविताएँ रचते थे।
- उनकी प्रमुख काव्य-कृति "प्रियप्रवास" खड़ी बोली का पहला महाकाव्य है।
- उनके कविता-संकलनों में "चंद्र-खिलौना" और "खेल-तमाशा" प्रसिद्ध हैं।
- "फूल और काँटा" उनकी प्रसिद्ध कविता है।
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"उठो लाल, अब आँखें खोलो। पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कविताओं की विशेषता क्या है?
उत्तर: उनकी कविताएँ बच्चों के लिए सरल, रोचक और शिक्षाप्रद होती हैं, जो बच्चों के मनोविज्ञान के अनुरूप होती हैं। वे भाषा में सहजता और भावों में स्पष्टता रखते हैं।
अभ्यास प्रश्न
- स्तर 1 – सरल: अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का जन्म कहाँ हुआ था?
- स्तर 2 – मध्यम: हरिऔध जी की प्रमुख काव्य-कृति कौन-सी है?
- स्तर 3 – कठिन: बच्चों के लिए हरिऔध जी की कविताओं का क्या महत्व है?
उत्तर कुंजी
- उत्तर 1: आजमगढ़, उत्तर प्रदेश।
- उत्तर 2: "प्रियप्रवास"।
- उत्तर 3: उनकी कविताएँ बच्चों के लिए रोचक और शिक्षाप्रद होती हैं, जो बच्चों के मनोविज्ञान के अनुरूप होती हैं।
त्वरित संदर्भ
- अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' – बालकवि, आजमगढ़ के निवासी।
- प्रमुख काव्य-कृति – "प्रियप्रवास"।
- प्रसिद्ध कविताएँ – "फूल और काँटा", "चंद्र-खिलौना", "खेल-तमाशा"।
शब्दावली
- काव्य-कृति: कविता या साहित्य की रचना।
- खड़ी बोली: हिंदी भाषा की एक बोली।
- संकलन: संग्रह।
फूल और काँटा
यह कविता एक ही पौधे पर जन्म लेने वाले फूल और काँटे के भेद को दर्शाती है। दोनों पर एक ही चाँदनी, एक ही बारिश, और एक ही हवा का प्रभाव होता है, फिर भी उनका स्वभाव और प्रभाव अलग-अलग होता है। काँटा उँगलियाँ छेदता है, जबकि फूल तितलियों को अपनी सुगंध और रंगों से आकर्षित करता है। यह कविता जीवन के विभिन्न पहलुओं और भेदों को सुंदरता से प्रस्तुत करती है।
मुख्य बिंदु
- फूल और काँटा एक ही पौधे पर होते हैं, पर उनके गुण और प्रभाव भिन्न होते हैं।
- काँटा चोट पहुँचाता है, जबकि फूल सुगंध और रंगों से आनंद देता है।
- कविता में प्रकृति के विभिन्न तत्वों का उल्लेख है जैसे चाँदनी, बारिश, हवा।
- कविता का केंद्रीय भाव जीवन में भिन्नता और विविधता को स्वीकारना है।
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर, भौंर का है बेध देता श्याम तन।"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: इस कविता में फूल और काँटे का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?
उत्तर: फूल जीवन के सुंदर और सकारात्मक पहलुओं का प्रतीक है, जबकि काँटा जीवन की कठिनाइयों और दुखों का प्रतीक है। दोनों मिलकर जीवन की विविधता और द्वैत को दर्शाते हैं।
अभ्यास प्रश्न
- स्तर 1 – सरल: फूल और काँटा किस पर जन्म लेते हैं?
- स्तर 2 – मध्यम: कविता में फूल और काँटे के बीच क्या भेद बताया गया है?
- स्तर 3 – कठिन: "फूल और काँटा" कविता से जीवन के किस सन्देश को समझा जा सकता है?
उत्तर कुंजी
- उत्तर 1: एक ही पौधे पर।
- उत्तर 2: फूल सुगंधित और सुंदर होता है, काँटा चोट पहुँचाता है।
- उत्तर 3: जीवन में सुख-दुख, सुंदरता और कष्ट दोनों होते हैं, जिन्हें स्वीकार करना चाहिए।
त्वरित संदर्भ
- फूल – सुंदरता, सुगंध, जीवन के सकारात्मक पहलू।
- काँटा – चोट, कष्ट, जीवन की कठिनाइयाँ।
- कविता का संदेश – जीवन में विविधता और द्वैत को समझना और स्वीकारना।
शब्दावली
- सुगंध: खुशबू।
- तितली: रंगीन कीट।
- भौंर: मधुमक्खी या ततैया।
- प्रतीकात्मक: किसी वस्तु या विचार का प्रतीक।