CLASS 7 . HINDI . मल्हार . पानी रे-पानी-निबंध-अनुपम-मिश्र
Chapter 4 : पानी रे पानी (निबंध) अनुपम मिश्र
Ch 4
HINDI
CLASS 7
लेखक से परिचय
अनुपम मिश्र एक प्रखर लेखक, संपादक और पर्यावरणविद् थे। वे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अनेक प्रयोगात्मक कार्य कर चुके हैं। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक "आज भी खरे हैं तालाब" का अनुवाद कई भाषाओं में हुआ है। इसके अतिरिक्त "साफ माथे का समाज" उनकी एक और महत्वपूर्ण पुस्तक है। वे गांधी शांति प्रतिष्ठान की पत्रिका "गांधी मार्ग" के संस्थापक और संपादक भी थे।
- प्रखर लेखक और पर्यावरणविद्
- प्रसिद्ध पुस्तकें: "आज भी खरे हैं तालाब", "साफ माथे का समाज"
- गांधी मार्ग पत्रिका के संस्थापक एवं संपादक
यह परिचय हमें लेखक के दृष्टिकोण और उनके कार्यों को समझने में मदद करता है।
पानी रे पानी का सारांश
यह निबंध पानी के महत्व, उसकी कमी और अधिकता दोनों की समस्याओं पर प्रकाश डालता है। लेखक जल-चक्र की प्रक्रिया समझाते हैं और बताते हैं कि कैसे पानी का सही प्रबंधन न होने से अकाल और बाढ़ जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। वे बताते हैं कि तालाब, झीलें और जलस्रोत हमारे भूजल भंडार को समृद्ध करते हैं, लेकिन मानव लालच के कारण इनका विनाश हो रहा है। इस कारण गर्मी में पानी की कमी और बरसात में बाढ़ की समस्या बढ़ रही है। लेखक जल संरक्षण और जलस्रोतों की सुरक्षा पर जोर देते हैं।
- जल-चक्र की प्रक्रिया
- पानी की कमी और अधिकता की समस्याएँ
- तालाबों और जलस्रोतों का महत्व
- जल संरक्षण की आवश्यकता
लेखक पानी के महत्व को समझाते हुए हमें जल संरक्षण के लिए जागरूक करते हैं।
पानी रे पानी के प्रमुख विचार
- पानी का स्रोत और उसका पुनः चक्रण
- नलों में पानी की कमी और असमय पानी आना
- पानी के लिए हो रहे संघर्ष और जल चोरी
- अकाल और बाढ़ के कारण और प्रभाव
- धरती को एक बड़ी गुल्लक मानकर जल संचयन की आवश्यकता
- तालाबों का संरक्षण और भूजल भंडार की सुरक्षा
पानी रे पानी के महत्वपूर्ण उद्धरण एवं व्याख्या
- "पानी का बेहद कम हो जाना और पानी का बेहद ज्यादा हो जाना, यानी अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।" - यह पंक्ति जल संकट की दो विपरीत स्थितियों को दर्शाती है।
- "हमारी यह धरती भी इसी तरह की खूब बड़ी गुल्लक है।" - धरती को गुल्लक से तुलना कर जल संचयन की महत्ता बताई गई है।
- "जल-चक्र हम ठीक से समझें, जब बरसात हो तो उसे थाम लें।" - जल संरक्षण के लिए जल-चक्र की समझ आवश्यक है।
पानी रे पानी के अभ्यास प्रश्न
स्तर 1 – सरल
- जल-चक्र क्या है? संक्षेप में समझाइए।
- तालाबों का जल संरक्षण में क्या महत्व है?
- पानी की कमी के कारण क्या-क्या समस्याएँ होती हैं?
स्तर 2 – मध्यम
- लेखक ने पानी की समस्या को किस प्रकार प्रस्तुत किया है?
- जल संरक्षण के लिए हम क्या-क्या उपाय कर सकते हैं?
- अकाल और बाढ़ को एक सिक्के के दो पहलू क्यों कहा गया है?
स्तर 3 – कठिन
- जल-चक्र की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन कीजिए।
- तालाबों के विनाश के कारण और उसके प्रभावों पर चर्चा कीजिए।
- लेखक के अनुसार जल संरक्षण के लिए समाज को क्या भूमिका निभानी चाहिए?
पानी रे पानी के उत्तर कुंजी
स्तर 1 – सरल
- जल-चक्र वह प्रक्रिया है जिसमें पानी समुद्र से भाप बनकर बादल बनता है, फिर वर्षा के रूप में धरती पर गिरता है और नदियों के माध्यम से वापस समुद्र में लौटता है।
- तालाब जल को जमा करते हैं, जिससे भूजल स्तर बना रहता है और सूखे में पानी उपलब्ध होता है।
- पानी की कमी से नलों में पानी नहीं आता, खेती प्रभावित होती है, स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ती हैं।
स्तर 2 – मध्यम
- लेखक ने पानी की कमी और अधिकता दोनों को समस्या के रूप में प्रस्तुत किया है और जल संरक्षण की आवश्यकता बताई है।
- जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, तालाबों की सफाई, जल स्रोतों की सुरक्षा आदि उपाय किए जा सकते हैं।
- अकाल में पानी कम होता है और बाढ़ में पानी अधिक, दोनों ही जीवन के लिए खतरा हैं, इसलिए इन्हें एक सिक्के के दो पहलू कहा गया है।
स्तर 3 – कठिन
- जल-चक्र में समुद्र से पानी भाप बनकर बादल बनता है, बादल वर्षा करते हैं, वर्षा का पानी नदियों में जाता है और फिर समुद्र में लौटता है।
- तालाबों का विनाश भूजल स्तर गिराता है, जिससे अकाल की स्थिति उत्पन्न होती है और बाढ़ का खतरा बढ़ता है।
- समाज को तालाबों की रक्षा करनी चाहिए, जल संरक्षण के प्रति जागरूक होना चाहिए और जल स्रोतों का संरक्षण करना चाहिए।
पानी रे पानी के शब्दावली
- जल-चक्र: पानी का निरंतर पृथ्वी पर और पृथ्वी से बाहर चक्रवात की तरह घूमना।
- भूजल भंडार: जमीन के नीचे जमा पानी का संग्रह।
- अकाल: पानी की अत्यधिक कमी की स्थिति।
- बाढ़: पानी की अत्यधिक मात्रा से भूमि जलमग्न हो जाना।
- जल संरक्षण: पानी को बचाने और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया।
- तालाब: जल संचयन के लिए बनाए गए जलाशय।
पाल के किनारे रखा इतिहास
यह कहानी मध्य भारत के एक क्षेत्र की लोककथा है, जिसमें चार भाई—कूड़न, बुढ़ान, सरमन और कौंराई—अपने खेतों में काम करते हैं। एक दिन कूड़न की बेटी को एक नुकीले पत्थर से चोट लगती है, जिसे वह हटाने की कोशिश करती है। उसकी दराँती पत्थर पर पड़ते ही लोहे से सोने में बदल जाती है। यह पत्थर पारस था, जो लोहे को सोना बना देता है।
चारों भाइयों ने राजा को यह बात बताई, लेकिन राजा ने पारस नहीं लिया और कहा, "अच्छे-अच्छे काम करते जाना, तालाब बनाते जाना।" इस प्रकार यह कहानी लोहे को सोना बनाने की बजाय समाज को पारस से छूने का प्रतीक बन गई।
मध्य भारत के पाटन क्षेत्र में चार बड़े तालाब—बूढ़ा सागर, सरमन सागर, कौंराई सागर और कुंडम सागर—आज भी मौजूद हैं, जो इन भाइयों के नाम पर हैं। ये तालाब समाज के लिए जल संरक्षण का प्रतीक हैं।
तालाबों का निर्माण राजा, रानी, साधु-संत या सामान्य गृहस्थ द्वारा किया जाता था और समाज उन्हें सम्मानित करता था। तालाबों ने जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्य बिंदु
- चार भाई और पारस की कहानी
- राजा का संदेश: अच्छे काम करते रहना
- तालाबों का निर्माण और उनका महत्व
- मध्य भारत के पाटन क्षेत्र के तालाब
- जल संरक्षण में तालाबों की भूमिका
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"राजा ने कूड़न किसान से कहा था, 'अच्छे-अच्छे काम करते जाना।'"
"लोहे की जिस चीज को छूते हैं, वह सोना बनकर उनकी आँखों में चमक भर देती है।"
"चारों तालाब इन्हीं चारों भाइयों के नाम पर हैं।"
अभ्यास प्रश्न
स्तर 1 – सरल
- पाल के किनारे रखा इतिहास किस बारे में है?
- चार भाइयों की कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
- तालाबों का समाज में क्या महत्व है?
स्तर 2 – मध्यम
- राजा ने पारस के बारे में क्या प्रतिक्रिया दी और उसका क्या अर्थ है?
- मध्य भारत के पाटन क्षेत्र के तालाबों का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
- तालाबों के निर्माण से जल संरक्षण में कैसे मदद मिलती है?
स्तर 3 – कठिन
- कहानी में पारस का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
- तालाबों के संरक्षण के लिए समाज को क्या कदम उठाने चाहिए?
- इस कहानी से हमें जल संरक्षण के विषय में क्या सीख मिलती है?
उत्तर कुंजी
स्तर 1 – सरल
- यह कहानी चार भाइयों और उनके तालाबों के बारे में है जो जल संरक्षण का प्रतीक हैं।
- मुख्य संदेश है कि अच्छे काम करते रहो और जल संरक्षण करो।
- तालाब समाज के लिए जल संचयन और संरक्षण का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
स्तर 2 – मध्यम
- राजा ने पारस को नहीं लिया क्योंकि वह सोना नहीं बल्कि अच्छे कामों को महत्व देता था। इसका अर्थ है कि समाज सेवा और जल संरक्षण अधिक महत्वपूर्ण हैं।
- पाटन क्षेत्र के तालाब सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व रखते हैं और जल संरक्षण की परंपरा को दर्शाते हैं।
- तालाब वर्षा जल को जमा करते हैं और भूजल स्तर को बनाए रखते हैं, जिससे जल संकट कम होता है।
स्तर 3 – कठिन
- पारस लोहे को सोना बनाने वाला प्रतीक है, पर कहानी में इसका अर्थ समाज को समृद्ध करने वाले अच्छे कार्य हैं।
- समाज को तालाबों की रक्षा करनी चाहिए, जल स्रोतों को साफ रखना चाहिए और जल संरक्षण के प्रति जागरूक होना चाहिए।
- हमें जल संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि जल संकट से बचा जा सके।
शब्दावली
- पारस: वह पत्थर जो लोहे को सोना बना देता है।
- तालाब: जल संचयन के लिए बनाए गए जलाशय।
- जल संरक्षण: पानी को बचाने और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया।
- गजेटियर: सरकारी या ऐतिहासिक अभिलेख।
- साधु-संत: धार्मिक व्यक्ति जो समाज सेवा करते हैं।