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विश्वेश्वरैया-आर-के-मूर्ति-अनुवाद-सुमन-जैन

CLASS 7 . HINDI . मल्हार . विश्वेश्वरैया आर-के-मूर्ति-अनुवाद-सुमन-जैन

Chapter 5 : विश्वेश्वरैया -आर. के. मूर्ति (अनुवाद-सुमन जैन)

Ch 5

HINDI

CLASS 7

विश्वेश्वरैया का जीवन परिचय

मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को मैसूर के मुद्देनाहल्ली नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता वैद्य थे और परिवार आंध्र प्रदेश के मोक्षगुंडम से मैसूर आकर बस गया था। बचपन से ही विश्वेश्वरैया को रामायण, महाभारत और पंचतंत्र की कहानियाँ सुनाई जाती थीं, जिनसे उन्होंने ईमानदारी, दया और अनुशासन जैसे मानवीय मूल्य सीखे।

विश्वेश्वरैया ने चिकबल्लापुर के मिडिल और हाई स्कूल में पढ़ाई की। उन्होंने ब्रिटिश शासन के कारण भारत की स्थिति को समझा और राष्ट्रीयता की भावना जागृत हुई। पिता की मृत्यु के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखने का संकल्प लिया और बंगलौर जाकर कॉलेज में प्रवेश लिया। उन्होंने स्वयं ट्यूशन पढ़ाकर अपनी फीस और खर्चे पूरे किए।

विश्वेश्वरैया का प्रारंभिक जीवन और प्रकृति से प्रेरणा

छह वर्ष की आयु में विश्वेश्वरैया ने वर्षा, हवा, सूर्य और जलप्रपात जैसे प्राकृतिक दृश्यों को देखा और उनकी शक्ति को समझा। उन्होंने प्रकृति की असीम शक्ति को जानने की इच्छा जताई और जीवन भर सीखते रहने का संकल्प लिया।

उन्होंने गरीबी और सामाजिक असमानता के कारणों को समझने की कोशिश की, जो उनके जीवन के महत्वपूर्ण प्रश्न बने। उन्होंने परिवार के बड़ों और अध्यापकों से इन विषयों पर प्रश्न पूछे और ज्ञान प्राप्त किया।

इस प्रकार, प्रकृति और जीवन के प्रति उनकी जिज्ञासा और समझ ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया।

विश्वेश्वरैया का शिक्षा और व्यावहारिक जीवन दृष्टिकोण

विश्वेश्वरैया ने शिक्षा को जीवन का आधार माना और ज्ञान की असीमितता को समझा। उन्होंने हमेशा समाधान खोजने की क्षमता विकसित की। उनका जीवन दर्शन था "पहले जानो, फिर करो।"

उन्होंने अपनी जरूरतों के लिए स्वयं कमाने का निर्णय लिया और ट्यूशन पढ़ाकर अपनी फीस और पुस्तकें खरीदीं। यह व्यावहारिक दृष्टिकोण उन्हें एक महान इंजीनियर और व्यावहारिक व्यक्ति बनाता है।

प्रमुख भाव और विषय

  • प्रकृति की शक्ति और उसकी महत्ता
  • गरीबी और सामाजिक असमानता की समस्या
  • ज्ञान की असीमता और जीवन भर सीखने की आवश्यकता
  • राष्ट्रीयता और देशभक्ति की भावना
  • व्यावहारिकता और समाधान खोजने की क्षमता

पाठ्य प्रमाण एवं उदाहरण

"आकाश में अँधेरा छाया हुआ था। बादल आकाश में मँडराते हुए एक-दूसरे से टकरा जाते तो बिजली चमक उठती और गर्जन होता। फिर मूसलाधार वर्षा होने लगी।"

यह पंक्ति वर्षा और प्रकृति की शक्ति का चित्रण करती है, जो विश्वेश्वरैया के प्रारंभिक जीवन की प्रेरणा थी।

"प्रकृति शक्ति है। मुझे प्रकृति के बारे में सब कुछ जानना चाहिए।" यह वाक्य उनके ज्ञान की जिज्ञासा और सीखने की इच्छा को दर्शाता है।

हल किए गए उदाहरण

प्रश्न: विश्वेश्वरैया ने अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए क्या उपाय किए?

उत्तर: उन्होंने बंगलौर जाकर मामा के यहाँ रहना स्वीकार किया और ट्यूशन पढ़ाकर अपनी फीस और पुस्तकें खरीदने के लिए धन कमाया।

प्रश्न: विश्वेश्वरैया को गरीबी और सामाजिक असमानता के बारे में कैसे पता चला?

उत्तर: उन्होंने वर्षा के दौरान एक गरीब महिला को देखा, जो फटी साड़ी पहने और झोपड़ी में रहती थी। इससे उन्होंने गरीबी के कारणों को समझने की कोशिश की।

प्रश्नोत्तर और अभ्यास

स्तर 1 – सरल

  • विश्वेश्वरैया का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
  • विश्वेश्वरैया ने बचपन में कौन-कौन सी कहानियाँ सुनीं?
  • उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए क्या किया?

स्तर 2 – मध्यम

  • विश्वेश्वरैया ने प्रकृति से क्या-क्या सीखा?
  • गरीबी और सामाजिक असमानता के कारणों को समझने का उनके जीवन में क्या महत्व था?
  • उनका जीवन दर्शन क्या था?

स्तर 3 – कठिन

  • विश्वेश्वरैया के जीवन से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
  • उन्होंने शिक्षा और व्यावहारिकता को अपने जीवन में कैसे जोड़ा?
  • राष्ट्रीयता की भावना उनके जीवन में कैसे प्रकट हुई?

उत्तर कुंजी

स्तर 1 – सरल

  • विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को मैसूर के मुद्देनाहल्ली में हुआ था।
  • उन्होंने रामायण, महाभारत और पंचतंत्र की कहानियाँ सुनीं।
  • उन्होंने बंगलौर जाकर कॉलेज में प्रवेश लिया और ट्यूशन पढ़ाकर अपनी फीस और खर्चे पूरे किए।

स्तर 2 – मध्यम

  • विश्वेश्वरैया ने वर्षा, हवा, सूर्य और जलप्रपात से प्रकृति की शक्ति को जाना।
  • उन्होंने गरीबी और सामाजिक असमानता के कारणों को समझने की कोशिश की, जो उनके जीवन के महत्वपूर्ण प्रश्न बने।
  • उनका जीवन दर्शन था "पहले जानो, फिर करो।" यह ज्ञान की असीमितता और जीवन भर सीखने की आवश्यकता को दर्शाता है।

स्तर 3 – कठिन

  • विश्वेश्वरैया के जीवन से हमें शिक्षा, मेहनत, और व्यावहारिकता की प्रेरणा मिलती है।
  • उन्होंने शिक्षा को जीवन का आधार माना और हमेशा समाधान खोजने की क्षमता विकसित की।
  • राष्ट्रीयता की भावना उनके जीवन में तब जागी जब उन्होंने ब्रिटिश शासन की स्थिति को समझा और देश के लिए काम करने का संकल्प लिया।

त्वरित संदर्भ

  • जन्म: 15 सितंबर 1861, मैसूर
  • प्रमुख विषय: प्रकृति, गरीबी, शिक्षा, राष्ट्रीयता
  • जीवन दर्शन: "पहले जानो, फिर करो"
  • प्रमुख उपलब्धि: महान इंजीनियर और देशभक्त

शब्दावली

  • प्रकृति: प्राकृतिक वातावरण
  • असीम: अनंत, असीमित
  • राष्ट्रीयता: अपने देश के प्रति प्रेम और समर्पण
  • व्यावहारिक: व्यवहार में उपयोगी
  • संकल्प: दृढ़ निश्चय
  • गरीबी: आर्थिक अभाव