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नृत्यांगना-सुधा-चंद्रन-रामाज्ञा-तिवारी

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Chapter 10 : नृत्यांगना सुधा चंद्रन (रामाज्ञा तिवारी)

Ch 10

HINDI

CLASS 7

नृत्यांगना सुधा चंद्रन का जीवन परिचय

नृत्यांगना सुधा चंद्रन का जीवन संघर्ष, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का अद्भुत उदाहरण है। बचपन से ही नृत्य में रुचि रखने वाली सुधा ने अपने माता-पिता के सहयोग से मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय 'कला सदन' में प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनके माता-पिता की इच्छा थी कि सुधा राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नृत्यांगना बने।

परंतु 2 मई 1981 को एक दुर्घटना ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। इस दुर्घटना में उनका दायाँ पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा। यह घटना किसी भी नृत्यांगना के लिए बहुत बड़ी बाधा होती है, लेकिन सुधा ने हार नहीं मानी। उन्होंने कृत्रिम अंग की मदद से पुनः नृत्य की ओर लौटने का संकल्प लिया।

मुख्य बिंदु

  • सुधा चंद्रन का प्रारंभिक जीवन और नृत्य में रुचि
  • मुंबई के 'कला सदन' में प्रशिक्षण
  • 2 मई 1981 की दुर्घटना और पैर कटने की घटना
  • कृत्रिम अंग के साथ नृत्य की ओर वापसी
  • सफलता और पुरस्कार

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"2 मई को तिरूचिरापल्ली से मद्रास जाते समय उनकी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस दुर्घटना में सुधा के बाएँ पाँव की एड़ी टूट गई और दायाँ पाँव बुरी तरह जख्मी हो गया।"

"डॉ. सेठी ने सुधा के लिए एक विशेष प्रकार का पैर बनाया, जो अल्यूमिनियम का था और इसमें ऐसी व्यवस्था थी कि वह पैर को आसानी से घुमा सकती थी।"

हल किए गए उदाहरण

प्रश्न: सुधा चंद्रन ने अपने जीवन में किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना किया और उन्होंने उन्हें कैसे पार किया?

उत्तर: सुधा चंद्रन को एक दुर्घटना में उनका दायाँ पैर कटना पड़ा, जो नृत्यांगना के लिए बहुत बड़ी बाधा थी। उन्होंने हार नहीं मानी, कृत्रिम अंग लगवाया और कड़ी मेहनत से पुनः नृत्य करना शुरू किया। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस ने उन्हें सफलता दिलाई।

अभ्यास प्रश्न

  • सरल: सुधा चंद्रन की प्रारंभिक शिक्षा कहाँ हुई?
  • मध्यम: दुर्घटना के बाद सुधा ने नृत्य में वापसी कैसे की?
  • कठिन: सुधा चंद्रन की कहानी से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

उत्तर कुंजी

  • सुधा चंद्रन ने मुंबई के 'कला सदन' नृत्य विद्यालय में प्रशिक्षण लिया।
  • डॉ. पी.सी. सेठी द्वारा बनाए गए कृत्रिम अंग की मदद से और कड़ी मेहनत से सुधा ने नृत्य में वापसी की।
  • कठिनाइयों के बावजूद हार न मानना और अपने लक्ष्य को पाने के लिए प्रयासरत रहना।

त्वरित संदर्भ

  • सुधा चंद्रन - प्रसिद्ध नृत्यांगना
  • दुर्घटना - 2 मई 1981
  • डॉ. पी.सी. सेठी - कृत्रिम अंग विशेषज्ञ
  • फिल्म 'मयूरी' - सुधा की जीवन कहानी पर आधारित

शब्दावली

  • नृत्यांगना: नृत्य करने वाली महिला कलाकार
  • दृढ़ इच्छाशक्ति: मजबूत और अडिग मनोबल
  • कृत्रिम अंग: शरीर के खोए हुए अंग की जगह लगाने वाला उपकरण
  • गैंग्रीन: शरीर के ऊतकों का सड़ना
  • प्रदर्शन: कला या नृत्य का सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करना

नृत्यांगना सुधा चंद्रन की प्रेरणादायक यात्रा

सुधा चंद्रन की जीवन यात्रा संघर्ष, साहस और सफलता की मिसाल है। दुर्घटना के बाद भी उन्होंने नृत्य छोड़ने का निर्णय नहीं लिया। डॉ. पी.सी. सेठी द्वारा बनाए गए विशेष कृत्रिम अंग की सहायता से उन्होंने पुनः नृत्य का अभ्यास शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें पुनः मंच पर खड़ा किया और उन्होंने अपनी कला से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

उनकी कहानी पर आधारित फिल्म 'मयूरी' ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई। सुधा चंद्रन ने यह साबित किया कि शारीरिक अक्षमता भी मनुष्य के सपनों को रोक नहीं सकती।

मुख्य बिंदु

  • दुर्घटना के बाद सुधा का संघर्ष
  • डॉ. पी.सी. सेठी का योगदान
  • नृत्य में वापसी और सार्वजनिक प्रदर्शन
  • फिल्म 'मयूरी' और राष्ट्रीय पुरस्कार
  • सुधा की प्रेरणा और समाज में योगदान

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"28 जनवरी, 1984 को मुंबई के 'साउथ इंडिया वेलफेयर सोसायटी' के हाल में सुधा ने पुनः नृत्य का सार्वजनिक प्रदर्शन किया।"

"फिल्म 'मयूरी' में सुधा ने स्वयं अपने जीवन की भूमिका निभाई और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया।"

हल किए गए उदाहरण

प्रश्न: सुधा चंद्रन की कहानी पर बनी फिल्म का नाम क्या है और इस फिल्म ने उन्हें क्या सम्मान दिलाया?

उत्तर: सुधा चंद्रन की कहानी पर बनी फिल्म का नाम 'मयूरी' है। इस फिल्म में सुधा ने स्वयं अभिनय किया और इसके लिए उन्हें भारत के 33वें राष्ट्रीय फिल्म समारोह में विशेष पुरस्कार मिला।

अभ्यास प्रश्न

  • सरल: सुधा चंद्रन ने नृत्य में वापसी कब की?
  • मध्यम: डॉ. पी.सी. सेठी ने सुधा की मदद कैसे की?
  • कठिन: सुधा चंद्रन की कहानी से समाज को क्या संदेश मिलता है?

उत्तर कुंजी

  • सुधा ने 28 जनवरी 1984 को नृत्य में वापसी की।
  • डॉ. सेठी ने विशेष कृत्रिम अंग बनाकर सुधा को नृत्य करने में सक्षम बनाया।
  • संदेश है कि कठिनाइयों के बावजूद हार न मानकर अपने सपनों को पूरा करना चाहिए।

त्वरित संदर्भ

  • प्रेरणा - कठिनाइयों के बावजूद सफलता
  • राष्ट्रीय पुरस्कार - फिल्म 'मयूरी' के लिए
  • सामाजिक योगदान - नृत्य और अभिनय के माध्यम से

शब्दावली

  • प्रदर्शन: कला का सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन
  • राष्ट्रीय पुरस्कार: देश के सर्वोच्च सम्मान
  • साहस: कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता
  • प्रेरणा: किसी कार्य को करने की प्रेरक शक्ति