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गिरिधर-कविराय-की-कुंडलिया-कविता

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Chapter 7 : गिरिधर कविराय की कुंडलिया (कविता)

Ch 7

HINDI

CLASS 7

कवि से परिचय

अठारहवीं सदी में जन्मे गिरिधर कविराय अपनी लोकप्रचलित कुंडलियों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी रचनाएँ सरल और जन-मानस की भाषा में हैं, जिनमें जीवन के व्यवहारिक और नीतिपरक संदेश छिपे हैं। उनकी कविताओं में कई कहावतें शामिल हैं, जैसे "बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय" और "बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।" ये कहावतें आज भी आम बोलचाल में उपयोग की जाती हैं। गिरिधर कविराय ने अपनी कविताओं में घर-गृहस्थी के व्यवहार और लोकनीति को सहज और स्पष्ट शब्दों में प्रस्तुत किया है।

मुख्य बिंदु

  • अठारहवीं सदी के कवि
  • लोकप्रचलित कहावतें और नीतिपरक पद
  • सरल और जन-मानस की भाषा
  • घर-गृहस्थी और लोकनीति पर आधारित विषय

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय"
"बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।"

अभ्यास प्रश्न

  • गिरिधर कविराय की कविताओं की भाषा कैसी है?
  • उनकी कविताओं में किस प्रकार के संदेश मिलते हैं?
  • "बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय" का क्या अर्थ है?

उत्तर कुंजी

  • सरल और जन-मानस की भाषा में लिखी गई है।
  • नीतिपरक और व्यवहारिक संदेश होते हैं।
  • बिना सोच-विचार किए किया गया कार्य बाद में पछतावा देता है।

शब्दावली

  • कुंडलिया: कहावतें या लोकप्रचलित नीतिपरक पद
  • नीतिपरक: नीति या सदाचार से संबंधित
  • लोकनीति: जनजीवन की नीति या व्यवहार

गिरिधर कविराय की कुंडलिया

गिरिधर कविराय की प्रसिद्ध कुंडलियाँ दो मुख्य पदों में विभाजित हैं, जो जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को सरल भाषा में प्रस्तुत करती हैं। ये पद जीवन के अनुभवों और व्यवहार की सीख देते हैं।

मुख्य बिंदु

  • पहली कुंडली: बिना सोच-विचार के कार्य करने पर पछतावा
  • दूसरी कुंडली: बीती बातों को भूलकर भविष्य की चिंता करना
  • सरल और प्रभावशाली भाषा

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

पहली कुंडली:
बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।
काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥
जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै।
खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै।।
कह गिरिधर कविराय दुःख कछु टरत न टारे।
खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥

दूसरी कुंडली:
बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।
जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ।
ताही में चित देइ बात जोई बनि आवै।
दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै॥
कह गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती।
आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती।।

हल किए गए उदाहरण

प्रश्न: पहली कुंडली में कवि ने किस बात की शिक्षा दी है?
उत्तर: पहली कुंडली में कवि ने बिना सोच-विचार के कार्य करने पर होने वाले पछतावे और मानसिक अशांति की बात कही है। उन्होंने बताया है कि ऐसा करने से व्यक्ति का मन शांत नहीं रहता और वह दुखी रहता है।

अभ्यास प्रश्न

  • पहली कुंडली का मुख्य संदेश क्या है?
  • दूसरी कुंडली में कवि ने किस प्रकार का व्यवहार अपनाने की सलाह दी है?
  • "बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ" का अर्थ समझाइए।

उत्तर कुंजी

  • पहली कुंडली का संदेश है कि बिना सोच-विचार के किया गया कार्य बाद में दुख देता है।
  • दूसरी कुंडली में भविष्य की चिंता करते हुए बीती बातों को भूल जाने की सलाह दी गई है।
  • इसका अर्थ है कि जो बीत चुका है उसे भूलकर आगे की सोच करनी चाहिए।

शब्दावली

  • पछिताना: पछतावा करना
  • सुधि: ध्यान या विचार
  • दुर्जन: बुरा व्यक्ति
  • चित्त: मन या हृदय