CLASS 8 . HINDI . मल्हार . तरुण के-स्वप्न-सुभाषचंद्र-बोस
Chapter 12 : तरुण के स्वप्न (सुभाषचंद्र बोस )
Ch 12
HINDI
CLASS 8
लेखक से परिचय
उड़ीसा (अब ओडिशा) राज्य के कटक नगर में जन्मे सुभाषचंद्र बोस को पूरा देश ‘नेताजी’ के नाम से जानता है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनका उद्देश्य स्पष्ट था—भारत को अँग्रेजी शासन से मुक्त कराना। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। स्वतंत्रता की लड़ाई में उनकी दूरदर्शिता का पता तब चलता है जब उन्होंने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व संभाला।
सन् 1857 में भारतीय सैनिकों ने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए जिस तरह एकजुट होकर युद्ध किया, उसके बाद सुभाषचंद्र बोस ही ऐसे महान सेनानी हुए जिन्होंने ‘आजाद हिंद फौज’ के माध्यम से एकजुट होकर अंग्रेजों को चुनौती दी। उन्होंने सैनिकों को ‘दिल्ली चलो’ और ‘जय हिंद’ का नारा दिया। सुभाषचंद्र बोस ने भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए क्रांति का ऐसा बिगुल बजाया कि पूरा देश ‘जय हिंद’ के नारों से गूँज उठा। उन्होंने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ जैसा प्रेरक नारा भी दिया।
सुभाषचंद्र बोस ने एक स्वाधीन राष्ट्र और आत्मनिर्भर समाज का सपना देखा। उनके जीवन के विषय में जानना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को जानना है। द इंडियन स्ट्रगल उनकी चर्चित पुस्तक है। प्रकाशन विभाग, भारत सरकार ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस का वाङ्मय (संपूर्ण लेखन) प्रकाशित किया है। इस प्रकाशन में उनके उपलब्ध सभी कार्यों, पत्रों, टिप्पणियों, भाषणों आदि को सम्मिलित किया गया है।
मुख्य बिंदु
- नेताजी का जन्म कटक, उड़ीसा में हुआ।
- स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान महत्वपूर्ण था।
- आजाद हिंद फौज के नेतृत्वकर्ता थे।
- प्रेरक नारे जैसे "दिल्ली चलो", "जय हिंद" और "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा" दिए।
- स्वाधीन और आत्मनिर्भर राष्ट्र का सपना देखा।
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा" - यह नारा उनकी क्रांतिकारी सोच को दर्शाता है।
अभ्यास प्रश्न
- नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म कहाँ हुआ था?
- नेताजी ने किस फौज का नेतृत्व किया?
- उनके कौन से नारे प्रसिद्ध हैं?
उत्तर कुंजी
- कटक, उड़ीसा में।
- आजाद हिंद फौज।
- "दिल्ली चलो", "जय हिंद", "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा"।
शब्दावली
- नेताजी: सम्मानित नेता
- आजाद हिंद फौज: स्वतंत्रता सेनानी सेना
- क्रांति: बड़ा बदलाव या विद्रोह
नेताजी का स्वप्न और युवाओं के लिए उद्बोधन
नेताजी सुभाषचंद्र बोस ऐसे स्वाधीन संपन्न समाज और राष्ट्र का सपना देखते थे जिसमें व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो और समाज तथा राष्ट्र की सेवा में समान रूप से भागीदार बने। वे नारी मुक्ति, शिक्षा और समान अवसर की बात करते थे। उन्होंने युवाओं को यह स्वप्न सौंपा ताकि आदर्श समाज और राष्ट्र का निर्माण हो सके।
उनका यह उद्बोधन मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में 29 दिसंबर, 1929 को दिया गया था। इसमें उन्होंने एक नया सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज बनाने की बात कही, जहाँ जातिभेद न हो, नारी समान अधिकार पाए, आर्थिक विषमता न हो, और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि ऐसा राष्ट्र जो आलसी और अकर्मण्य के लिए स्थान न दे, जो विश्व में आदर्श राष्ट्र के रूप में स्थापित हो, वह उनका स्वप्न है। उन्होंने युवाओं को यह स्वप्न स्वीकार करने और इसके लिए समर्पित होने का आह्वान किया।
मुख्य बिंदु
- स्वाधीन और संपन्न समाज का सपना।
- जाति भेद, आर्थिक विषमता का अंत।
- नारी मुक्ति और समान अधिकार।
- श्रम और कर्म की मर्यादा।
- युवाओं को स्वप्न स्वीकार करने का आह्वान।
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ— स्वीकार करो।"
अभ्यास प्रश्न
- नेताजी का स्वप्न क्या था?
- उन्होंने युवाओं को क्या संदेश दिया?
- उनके स्वप्न में नारी की क्या भूमिका थी?
उत्तर कुंजी
- स्वाधीन, संपन्न और समान अधिकारों वाला समाज।
- स्वप्न स्वीकार कर राष्ट्र सेवा में जुटने का संदेश।
- नारी को समान अधिकार और समाज में बराबरी का स्थान।
शब्दावली
- स्वाधीन: स्वतंत्र
- संपन्न: सम्पन्न, समृद्ध
- उद्बोधन: भाषण
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का काव्य "भारति, जय, विजय" का विश्लेषण
यह काव्य भारत की महिमा, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक समृद्धि का वर्णन करता है। कवि ने भारत को स्वच्छ, समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया है।
काव्य में प्राकृतिक तत्व जैसे कनक (सोना), शस्य (फसल), कमल (कमल का फूल), गंगा, हिम-तुषार आदि का उल्लेख है जो भारत की समृद्धि और पवित्रता को दर्शाते हैं।
कवि ने भारत के गौरवशाली अतीत और उसकी शक्ति को उजागर किया है, साथ ही राष्ट्र की एकता और विजय की कामना की है।
मुख्य बिंदु
- भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक समृद्धि।
- राष्ट्र की शक्ति और विजय की कामना।
- प्राकृतिक तत्वों का सुंदर चित्रण।
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"कनक-शस्य-कमल धरे!"
"ध्वनित दिशाएँ उदार, शतमुख-शतरव-मुखरे!"
अभ्यास प्रश्न
- कवि ने भारत को किस प्रकार प्रस्तुत किया है?
- काव्य में कौन-कौन से प्राकृतिक तत्वों का उल्लेख है?
- काव्य का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर कुंजी
- स्वच्छ, समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में।
- कनक, शस्य, कमल, गंगा, हिम-तुषार आदि।
- भारत की महिमा और विजय की कामना।
शब्दावली
- कनक: सोना
- शस्य: फसल
- कमल: कमल का फूल
- हिम-तुषार: बर्फ और ओस
