शब्दकोश
व्याख्या / सारांश:
यह शब्दकोश विभिन्न पाठों में आने वाले नए और महत्वपूर्ण शब्दों का संग्रह है। इसमें शब्दों के अर्थ, उनके व्याकरणिक संकेत, और समानार्थी शब्द दिए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों को शब्दों का सही अर्थ समझने और उनका सही प्रयोग सीखने में सहायता मिलती है। यह शब्दकोश शब्दों की सही वर्तनी भी सिखाता है।
मुख्य बिंदु
- शब्दों के अर्थ और व्याकरणिक संकेत
- समानार्थी शब्दों का परिचय
- शब्दों की सही वर्तनी
- शब्दों के विभिन्न अर्थ और उनका संदर्भानुसार प्रयोग
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
शब्दों के साथ उनके अर्थ और व्याकरणिक संकेत इस प्रकार दिए गए हैं -
- अँटी [वि.सं. स्त्री.] – धोती की कमर के ऊपर की लपेट, गाँठ
- अकर्मण्य [वि.सं.] – कर्म के अयोग्य, आलसी, निकम्मा
- अखंड [वि.सं.] – जिसका सिलसिला न टूटे, अविकल, संपूर्ण
- अग्नि [स्त्री.सं.] – आग, उष्णता, प्रकाश
- अति [सं.] – अधिकता, सीमोल्लंघन
- अतिथि [पुं.सं.] – अवाञ्छित आया हुआ मेहमान
- अनगिन [वि.] – अगणित, बेहिसाब
- अपराध [पुं.सं.] – दोष, गलती, पाप
- आँगन [पु.] – चौक, घर के भीतर का सहन
- ईर्ष्या [स्त्री.सं.] – जलन, डाह
- उत्तराधिकारी [वि.सं.] – किसी के बाद उसकी संपत्ति पाने का हकदार
- कदाचित् [अ.सं.] – कभी, शायद
- खजाना [पु.फ़ा.] – भंडार, कोश
- गति [स्त्री.सं.] – चाल, गमन, रफ्तार
- घाटी [स्त्री.] – दो पहाड़ों के बीच की नीची जमीन
- जावित्री [स्त्री.] – जायफल का छिलका
- टोकरी [स्त्री.] – घास, फल, तरकारी आदि रखने का पात्र
- तप [पु.सं.] – तपस्या, ताप
- पंडे/पंडा [पु.] – तीर्थ, मंदिर या घाट पर धर्मकृत्य कराने वाला
- बन्धु – भाई, मित्र, स्वजन
- मठ [पु.सं.] – साधु-संन्यासियों के रहने का स्थान
- नगरी [पु.सं.] – शहर, कस्बा
- साधू [पु.वि.सं.] – सच्चा या नेक आदमी, संत
- स्वाधीन [वि.सं.] – स्वतंत्र, स्वच्छंद
- हर्ज [पु.(अ.)] – हानि, क्षति
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: "अकर्मण्य" शब्द का अर्थ और प्रयोग बताइए।
उत्तर: अकर्मण्य का अर्थ है कर्म के अयोग्य, आलसी या निकम्मा। उदाहरण: वह अकर्मण्य व्यक्ति कभी मेहनत नहीं करता।
प्रश्न: "अतिथि" शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: अतिथि का अर्थ है अवाञ्छित आया हुआ मेहमान या वह संन्यासी जो कहीं एक रात से अधिक न ठहरे।
अभ्यास प्रश्न
स्तर 1 – सरल
- नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ लिखिए: अग्नि, अपराध, आँगन, ईर्ष्या।
- "अखंड" शब्द का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
- "पंडे" शब्द का अर्थ बताइए।
स्तर 2 – मध्यम
- "अकर्मण्य" और "अपराध" शब्दों में क्या अंतर है? समझाइए।
- "स्वाधीन" और "विमुख" शब्दों के अर्थ और प्रयोग लिखिए।
- "घाटी" और "नगरी" शब्दों का वर्णन कीजिए।
स्तर 3 – कठिन
- शब्दों के व्याकरणिक संकेतों का महत्व समझाइए और उदाहरण दीजिए।
- किसी एक शब्द के विभिन्न अर्थों को संदर्भ के अनुसार समझाइए।
- शब्दकोश में दिए गए शब्दों का उपयोग करते हुए एक लघु अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर कुंजी
- अग्नि – आग, उष्णता, प्रकाश
- अपराध – दोष, गलती, पाप
- आँगन – घर के भीतर का चौक
- ईर्ष्या – जलन, डाह
- अखंड – जिसका सिलसिला न टूटे, अविकल
- पंडे – तीर्थ या मंदिर में धर्मकृत्य कराने वाला
- अकर्मण्य – आलसी, कर्म के अयोग्य
- अपराध – पाप या दोष
- स्वाधीन – स्वतंत्र, स्वच्छंद
- विमुख – उदासीन, मुखहीन
- घाटी – दो पहाड़ों के बीच की नीची जमीन
- नगरी – बड़ा शहर
त्वरित संदर्भ
यह शब्दकोश हिंदी भाषा के महत्वपूर्ण शब्दों का संकलन है जो विद्यार्थियों को शब्दों के अर्थ, व्याकरणिक जानकारी और सही प्रयोग में सहायता करता है।
शब्दावली
- अर्थी: चाह या गरज रखने वाला, धनी, प्रार्थी
- अवरोहण: उतरना, नीचे आने की क्रिया
- अवाक: स्तब्ध, मौन
- अविश्वास: विश्वास का न होना, शंका
- अहं: गर्व, घमंड
- आगंतुक: बिना बुलाए आने वाला, अजनबी
- आदर्श: नमूना, असल
- ईर्ष्या: जलन, डाह
- उत्तरीाधिकारी: वारिस
- कदाचित्: कभी, शायद
- खजाना: भंडार, कोश
- गति: चाल, गमन
- घाटी: दो पहाड़ों के बीच की जमीन
- जावित्री: जायफल का छिलका
- टोकरी: रखने का पात्र
- तप: तपस्या, ताप
- पंडे: तीर्थ या मंदिर में धर्मकृत्य कराने वाला
- बंधु: भाई, मित्र
- मठ: साधु-संन्यासियों का आश्रम
- नगरी: शहर
- साधू: नेक आदमी, संत
- स्वाधीन: स्वतंत्र
- हर्ज: हानि, क्षति