CLASS 8 . HINDI . मल्हार . दो गौरैया-कहानी-भीष्म-साहनी
Chapter 2 : दो गौरैया (कहानी) भीष्म साहनी
Ch 2
HINDI
CLASS 8
लेखक से परिचय
भीष्म साहनी हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के लेखक थे। उन्होंने अपनी कहानियों में देश विभाजन और मानवीय मूल्यों की मार्मिक अभिव्यक्ति की है। उनके प्रसिद्ध उपन्यास तमस पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण से अलंकृत किया था। बच्चों के लिए उन्होंने ‘गुलेल का खेल’ आदि कई कहानियाँ लिखी हैं।
मुख्य बिंदु
- देश विभाजन और मानवीय मूल्यों का मार्मिक चित्रण
- साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता
- पद्म भूषण से सम्मानित
- बच्चों के लिए कहानियाँ
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
भीष्म साहनी की कहानियाँ मानवीय संवेदनाओं से भरपूर होती हैं, जो पाठकों को गहराई से प्रभावित करती हैं।
अभ्यास प्रश्न
- भीष्म साहनी के साहित्य में कौन-कौन से विषय प्रमुख हैं?
- भीष्म साहनी को पद्म भूषण किस लिए मिला?
उत्तर कुंजी
- देश विभाजन, मानवीय मूल्य, सामाजिक समस्याएँ
- साहित्य में उनके बहुमुखी योगदान के लिए
शब्दावली
- बहुमुखी प्रतिभा: अनेक क्षेत्रों में दक्षता
- मार्मिक: भावुक, हृदयस्पर्शी
- साहित्य अकादमी पुरस्कार: साहित्य के क्षेत्र में सम्मान
- पद्म भूषण: भारत सरकार का उच्च नागरिक सम्मान
दो गौरैया कहानी का सारांश
यह कहानी एक परिवार की है जिसमें माँ, पिताजी और कथाकार रहते हैं। घर में कई पक्षी, चूहे, छिपकलियाँ और अन्य जीव रहते हैं। दो गौरैया घर के पंखे पर घोंसला बनाती हैं। पिताजी उन्हें निकालने की कोशिश करते हैं, पर गौरैया बार-बार लौट आती हैं। अंत में पिताजी हार मान जाते हैं और गौरैयों को रहने देते हैं। कहानी में परिवार और प्रकृति के बीच के संबंध को मार्मिक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
मुख्य बिंदु
- घर में पक्षियों और जीवों का निवास
- दो गौरैयों का घोंसला बनाना
- पिताजी की गौरैयों को निकालने की कोशिशें
- परिवार की सहनशीलता और अंत में स्वीकार्यता
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"दो गौरैया सीधी अंदर घुस आईं और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगीं।"
"पिताजी ने लाठी उठाई और गौरैयों पर हमला बोल दिया।"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: पिताजी गौरैयों को क्यों निकालना चाहते थे?
उत्तर: पिताजी घर में शोर-शराबा और असुविधा के कारण गौरैयों को निकालना चाहते थे।
अभ्यास प्रश्न
- स्तर 1 – सरल: घर में कौन-कौन से जीव रहते हैं?
- स्तर 2 – मध्यम: पिताजी की गौरैयों के प्रति प्रतिक्रिया कैसी थी?
- स्तर 3 – कठिन: कहानी में गौरैयों का प्रतीकात्मक अर्थ क्या हो सकता है?
उत्तर कुंजी
- चूहे, गौरैया, चमगादड़, छिपकलियाँ आदि
- गुस्से में, बार-बार निकालने की कोशिश करते हैं
- प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व, सहनशीलता का प्रतीक
शब्दावली
- घोंसला: पक्षियों का घर
- सहनशीलता: कठिनाइयों को सहने की क्षमता
- प्रतीकात्मक: किसी वस्तु या घटना का गहरा अर्थ
केंद्रीय भाव एवं विषय
कहानी का मुख्य भाव प्रकृति और मानव के बीच सह-अस्तित्व की आवश्यकता को दर्शाना है। यह सहनशीलता, प्रेम और समझदारी की शिक्षा देती है। कहानी में दिखाया गया है कि जब हम प्रकृति के जीवों के प्रति दयालु होते हैं, तो वे भी हमारे साथ शांति से रह सकते हैं।
मुख्य बिंदु
- प्रकृति और मानव का सह-अस्तित्व
- सहनशीलता और प्रेम
- जीवों के प्रति दया और समझदारी
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।"
अभ्यास प्रश्न
- कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
- गौरैयों के प्रति परिवार की सोच कैसे बदलती है?
उत्तर कुंजी
- प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और सहनशीलता
- शुरुआत में विरोध, अंत में स्वीकार्यता
शब्दावली
- दयालुता: दूसरों के प्रति करुणा
- समझदारी: बुद्धिमानी से काम लेना
पात्र एवं पात्र परिचय
कहानी के मुख्य पात्र हैं:
- कथाकार: कहानी का नायक, जो घर में रहता है और घटनाओं का वर्णन करता है।
- पिताजी: घर के मुखिया, जो गौरैयों को निकालने की कोशिश करते हैं।
- माँ: परिवार की सदस्य, जो गौरैयों के प्रति दयालु और समझदार हैं।
- दो गौरैया: जो घर में घोंसला बनाती हैं और कहानी का केंद्र हैं।
अभ्यास प्रश्न
- पिताजी का चरित्र कैसे है?
- माँ की भूमिका क्या है?
उत्तर कुंजी
- गुस्सैल, पर अंत में सहनशील
- दयालु, समझदार, परिवार को शांत रखने वाली
शब्दावली
- मुखिया: परिवार या समूह का नेता
- दयालु: करुणामय
अलंकार एवं काव्य सौंदर्य
कहानी में व्यंग्य और रूपक अलंकार प्रमुख हैं। व्यंग्य के माध्यम से पिताजी के व्यवहार की आलोचना होती है और रूपक के द्वारा गौरैयों का प्रतीकात्मक महत्व स्पष्ट होता है।
मुख्य बिंदु
- व्यंग्य: माँ की बातें जो पिताजी को चिढ़ाती हैं
- रूपक: गौरैया प्रकृति और सहनशीलता का प्रतीक
पाठ्य प्रमाण / उदाहरण
"माँ ने व्यंग्य से कहा, ‘चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!’"
अभ्यास प्रश्न
- कहानी में व्यंग्य का क्या प्रभाव है?
- गौरैयों का रूपक क्या दर्शाता है?
उत्तर कुंजी
- व्यंग्य से हास्य उत्पन्न होता है और आलोचना होती है
- प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और सहनशीलता
शब्दावली
- व्यंग्य: कटु हास्य
- रूपक: किसी वस्तु का प्रतीकात्मक अर्थ
महत्वपूर्ण उद्धरण एवं पंक्तियों की व्याख्या
"अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।" – यह पंक्ति गौरैयों की स्थिरता और परिवार की स्वीकार्यता को दर्शाती है।
"माँ ने व्यंग्य से कहा, ‘चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!’" – यह पंक्ति पिताजी के प्रयासों की विडंबना को उजागर करती है।
अभ्यास प्रश्न
- इन उद्धरणों से कहानी का कौन सा भाव स्पष्ट होता है?
उत्तर कुंजी
- सहनशीलता, प्रकृति के साथ मेलजोल
शब्दावली
- स्वीकार्यता: किसी चीज़ को मान लेना
- विडंबना: विरोधाभास या व्यंग्यपूर्ण स्थिति
सारांश एवं अंतिम विचार
"दो गौरैया" कहानी में भीष्म साहनी ने प्रकृति और मानव के बीच सह-अस्तित्व की सुंदर छवि प्रस्तुत की है। कहानी में दिखाया गया है कि प्रारंभ में जब परिवार पक्षियों को निकालने की कोशिश करता है, तब संघर्ष होता है, लेकिन अंत में सहनशीलता और प्रेम से सब कुछ शांतिपूर्ण हो जाता है। यह कहानी हमें सहनशीलता, दया और प्रकृति के प्रति सम्मान की सीख देती है।
मुख्य बिंदु
- प्रकृति और मानव का मेल
- सहनशीलता और प्रेम की शिक्षा
- परिवार में समझदारी और सहनशीलता का विकास
अभ्यास प्रश्न
- कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
- परिवार की सोच में क्या बदलाव आता है?
उत्तर कुंजी
- प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और सहनशीलता
- शुरुआत में विरोध, अंत में प्रेम और स्वीकार्यता
शब्दावली
- सह-अस्तित्व: एक साथ शांति से रहना
- समझदारी: बुद्धिमानी से काम लेना