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है-भूख-मत-मचल

CLASS 11-PCM . HINDI . आरोह . है भूख-मत-मचल

Chapter 14 : है भूख! मत मचल

Ch 14

HINDI

CLASS 11-PCM

अक्कमहादेवी का परिचय

अक्कमहादेवी 12वीं सदी की एक महान कवयित्री थीं, जो कर्नाटक के उडुतड़ी गाँव, जिला शिवमोग्गा से थीं। वे वीर शैव आंदोलन से जुड़ी थीं और उनके आराध्य भगवान चन्नमल्लिकार्जुन देव (शिव) थे। उनके समकालीन कन्नड़ संत कवि बसवन्ना और अल्लमा प्रभु थे। कन्नड़ भाषा में 'अक्क' का अर्थ 'बड़ी बहन' होता है।

अक्कमहादेवी का सौंदर्य अद्भुत और अलौकिक था। एक बार स्थानीय राजा उनके सौंदर्य से प्रभावित होकर उनसे विवाह करना चाहता था और अपने परिवार पर दबाव डालने लगा। अक्कमहादेवी ने विवाह के लिए तीन शर्तें रखीं, जिन्हें राजा ने पूरा नहीं किया। इसलिए उन्होंने विवाह और राजपरिवार को त्याग दिया। यह त्याग केवल शरीर का नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक और दार्शनिक बोध का प्रतीक था।

अक्कमहादेवी की कविताएँ स्त्रीवादी चेतना की पहली सर्जनात्मक अभिव्यक्ति हैं, जिन्होंने शैव आंदोलन में स्त्रियों के संघर्ष और यातना को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया।

मुख्य बिंदु

  • 12वीं सदी की प्रमुख कवयित्री
  • वीर शैव आंदोलन से जुड़ी
  • चन्नमल्लिकार्जुन देव की आराध्य
  • तीन शर्तों के बाद विवाह त्याग
  • स्त्रीवादी चेतना की पहली कवयित्री

पाठ्य प्रमाण

"अक्कमहादेवी अपूर्व सुंदरी थीं। एक बार वहाँ का स्थानीय राजा इनका अदभुत - अलौकिक सौंदर्य देखकर मुग्ध हो गया तथा इनसे विवाह हेतु इनके परिवार पर दबाव डाला।"

अभ्यास प्रश्न

  • अक्कमहादेवी का जीवन परिचय दीजिए। (सरल)
  • अक्कमहादेवी ने विवाह क्यों त्याग दिया? (मध्यम)
  • अक्कमहादेवी की कविताओं का स्त्रीवादी आंदोलन में क्या महत्व है? (कठिन)

उत्तर कुंजी

अक्कमहादेवी 12वीं सदी की वीर शैव आंदोलन की कवयित्री थीं। उन्होंने तीन शर्तों के बाद विवाह त्याग दिया क्योंकि राजा ने शर्तें पूरी नहीं कीं। उनकी कविताएँ स्त्रीवादी चेतना की पहली अभिव्यक्ति हैं।

शब्दावली

  • अक्क: बड़ी बहन
  • शैव आंदोलन: शिव भक्ति आंदोलन
  • त्याग: छोड़ना

अक्कमहादेवी के काव्य संदर्भ

अक्कमहादेवी की कविताएँ दो मुख्य विषयों पर आधारित हैं। पहला विषय है इंद्रियों पर नियंत्रण का प्रेम-भरा संदेश, जो उपदेशात्मक नहीं बल्कि मनोहर और भावपूर्ण है। दूसरा विषय है ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और निस्पृहता की भावना।

उनके दो प्रमुख वचन हैं, जिनका अंग्रेज़ी से अनुवाद केदारनाथ सिंह ने किया है। पहले वचन में इंद्रियों को संयमित करने का आग्रह है, जबकि दूसरे वचन में भक्त की भौतिक वस्तुओं से मुक्त होकर ईश्वर की अनुकंपा की कामना है।

मुख्य बिंदु

  • इंद्रियों पर नियंत्रण का संदेश
  • प्रेम-भरा उपदेश
  • ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण
  • निस्पृहता और अहंकार का नाश

पाठ्य प्रमाण

"हे भूख! मत मचल
प्यास, तड़प मत
हे नींद! मत सता
क्रोध, मचा मत उथल–पुथल
हे मोह! पाश अपने ढील
लोभ, मत ललचा
हे मद! मत कर मदहोश
ईर्ष्या, जला मत
ओ चराचर! मत चूक अवसर
आई हूँ संदेश लेकर चन्नमल्लिकार्जुन का"

अभ्यास प्रश्न

  • अक्कमहादेवी के पहले वचन का मुख्य संदेश क्या है? (सरल)
  • दूसरे वचन में भक्त की क्या भावना प्रकट होती है? (मध्यम)
  • अक्कमहादेवी की कविताओं में निस्पृहता का क्या महत्व है? (कठिन)

उत्तर कुंजी

पहले वचन में इंद्रियों को संयमित करने का प्रेमपूर्ण संदेश है। दूसरे वचन में भक्त की भौतिक वस्तुओं से मुक्त होकर ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना है। निस्पृहता अहंकार के नाश और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।

शब्दावली

  • इंद्रियाँ: इंद्रिय अंग
  • निस्पृहता: बिना मोह के होना
  • समर्पण: पूरी तरह झुक जाना

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