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अपू-के-साथ-ढाई-साल

CLASS 11-PCM . HINDI . आरोह . अपू के-साथ-ढाई-साल

Chapter 3 : अपू के साथ ढाई साल

Ch 3

HINDI

CLASS 11-PCM

सत्यजित राय का परिचय

सत्यजित राय भारतीय सिनेमा के एक महान फिल्मकार थे, जिनका जन्म 1921 में कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में हुआ था। उन्होंने लगभग तीस फीचर फिल्में निर्देशित कीं, जिनमें से कई साहित्यिक कृतियों पर आधारित थीं। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'पथेर पांचाली', 'शतरंज के खिलाड़ी', 'अपू का संसार', 'जलसाघर', 'देवी चारुलता', 'महानगर', 'गोपी गायेन बाका बायेन' आदि शामिल हैं। राय को फ्रांस का लेजन डी ऑनर, भारतरत्न, ऑस्कर सहित फिल्म जगत के कई महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हुए। वे न केवल फिल्म निर्देशन में बल्कि पटकथा लेखन, संगीत संयोजन और बच्चों के लिए लेखन में भी निपुण थे।

मुख्य बिंदु

  • जन्म: 1921, कोलकाता
  • प्रमुख फिल्में: पथेर पांचाली, शतरंज के खिलाड़ी, अपू का संसार, जलसाघर आदि
  • प्रमुख सम्मान: भारतरत्न, ऑस्कर, फ्रांस का लेजन डी ऑनर
  • साहित्यिक कृतियों पर आधारित फिल्में
  • बच्चों और किशोरों के लिए लेखन

पाठ्य प्रमाण

"भारतीय सिनेमा को कलात्मक ऊँचाई प्रदान करने वाले फ़िल्मकारों में सत्यजित राय अगली कतार में हैं।"

अभ्यास प्रश्न

  • सत्यजित राय का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
  • उनकी प्रमुख फिल्मों के नाम लिखिए।
  • सत्यजित राय को कौन-कौन से सम्मान प्राप्त हुए?

उत्तर कुंजी

  • सन् 1921 में कोलकाता में।
  • पथेर पांचाली, शतरंज के खिलाड़ी, अपू का संसार, जलसाघर आदि।
  • भारतरत्न, ऑस्कर, फ्रांस का लेजन डी ऑनर।

त्वरित संदर्भ

  • सत्यजित राय भारतीय सिनेमा के महान निर्देशक थे।
  • उनकी फिल्मों ने भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
  • वे साहित्यिक कृतियों पर आधारित फिल्में बनाते थे।

शब्दावली

  • फीचर फिल्म: लंबी अवधि की फिल्म
  • पटकथा: फिल्म की कहानी और संवाद
  • लेजन डी ऑनर: फ्रांस का सम्मान
  • भारतरत्न: भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग का अनुभव

पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग लगभग ढाई साल तक चली। इस दौरान आर्थिक अभाव, कलाकारों की उपलब्धता, प्राकृतिक बाधाएँ और तकनीकी समस्याएँ सामने आईं। अपू की भूमिका के लिए सही बच्चे की खोज में कठिनाई हुई, अंततः पड़ोसी लड़का सुबीर बनर्जी को चुना गया। शूटिंग के दौरान कई बार प्राकृतिक दृश्य जैसे काशफूलों का गायब हो जाना, कुत्ते भूलो का मर जाना, और कलाकारों का बदल जाना जैसी समस्याएँ आईं। इन सबके बावजूद फिल्म की निरंतरता और गुणवत्ता बनी रही।

मुख्य बिंदु

  • शूटिंग में आर्थिक कठिनाइयाँ और समय की सीमाएँ
  • अपू की भूमिका के लिए बच्चे की खोज और चुनौतियाँ
  • प्राकृतिक बाधाएँ जैसे काशफूलों का गायब होना
  • कुत्ते भूलो की भूमिका में दो कुत्तों का उपयोग
  • कलाकारों के बदलने की समस्या
  • बारिश के दृश्यों की शूटिंग में कठिनाई

पाठ्य प्रमाण

"पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक चला था!"

हल किए गए उदाहरण

अखबार में विज्ञापन देकर अपू की भूमिका के लिए सही बच्चे की खोज की गई, लेकिन सही बच्चा नहीं मिला। अंत में पड़ोसी लड़का सुबीर बनर्जी को चुना गया।

अभ्यास प्रश्न

  • पथेर पांचाली की शूटिंग में किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
  • अपू की भूमिका के लिए सही बच्चे की खोज कैसे हुई?
  • कुत्ते भूलो की भूमिका में क्या समस्या आई और उसका समाधान कैसे हुआ?

उत्तर कुंजी

  • आर्थिक अभाव, प्राकृतिक बाधाएँ, कलाकारों का बदलना।
  • अखबार में विज्ञापन देकर, अंत में पड़ोसी लड़के को चुना गया।
  • भूलो कुत्ता मर गया, दूसरे कुत्ते को लेकर शूटिंग पूरी की गई।

त्वरित संदर्भ

  • शूटिंग में कई बार रुकावटें आईं पर धैर्य से काम पूरा हुआ।
  • प्राकृतिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा।
  • कलाकारों और जानवरों के बदलने से निरंतरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण था।

शब्दावली

  • शूटिंग: फिल्म के दृश्यों को फिल्माना
  • कंटिन्युइटी: निरंतरता, तारतम्यता
  • स्थगित: रोका हुआ, कुछ समय के लिए मुल्तवी किया हुआ
  • भाड़े पर: किराए पर

फिल्मी समस्याएँ और उनका समाधान

शूटिंग के दौरान कई अप्रत्याशित समस्याएँ आईं, जैसे कलाकारों का बदल जाना, कुत्ते का व्यवहार न करना, और मौसम की बाधाएँ। इन समस्याओं को धैर्य और समझदारी से हल किया गया। उदाहरण के लिए, कुत्ते को दौड़ाने के लिए मिठाई का उपयोग किया गया और बारिश के लिए सही मौसम का इंतजार किया गया।

मुख्य बिंदु

  • कलाकारों के बदलने की समस्या
  • कुत्ते के व्यवहार की समस्या
  • मौसम की बाधाएँ
  • धैर्य और समझदारी से समाधान

पाठ्य प्रमाण

"कुत्ते के मालिक से कहा था, 'अपू-दुर्गा जब भागने लगते हैं, तब तुम अपने कुत्ते को उन दोनों के पीछे भागने के लिए कहना।'"

हल किए गए उदाहरण

कुत्ते को दौड़ाने के लिए मिठाई का उपयोग किया गया, जिससे वह बच्चों के पीछे दौड़ा और शॉट सफल हुआ।

अभ्यास प्रश्न

  • फिल्म की शूटिंग में कुत्ते की समस्या कैसे आई और उसका समाधान क्या था?
  • बारिश के दृश्यों की शूटिंग में क्या कठिनाइयाँ आईं?
  • कलाकारों के बदलने से फिल्म पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर कुंजी

  • कुत्ता मालिक की आज्ञा नहीं मान रहा था, मिठाई दिखाकर दौड़ाया गया।
  • बारिश के लिए सही मौसम का इंतजार करना पड़ा।
  • कलाकार बदलने से दृश्य में निरंतरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण था।

त्वरित संदर्भ

  • धैर्य और समझदारी से समस्याओं का समाधान किया गया।
  • प्राकृतिक और मानवीय बाधाओं को पार किया गया।
  • फिल्म की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निरंतरता आवश्यक थी।

शब्दावली

  • शॉट: फिल्म का एक दृश्य
  • साउंड रिकॉर्डिस्ट: आवाज़ रिकॉर्ड करने वाला
  • वास्तुसर्प: घर में रहने वाला सांप, जिसे कुलदेवता माना जाता है

पथेर पांचाली फ़िल्म के प्रमुख उद्धरण एवं व्याख्या

पथेर पांचाली फ़िल्म के निर्माण और शूटिंग के दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाएँ और उद्धरण सामने आए, जो फिल्म की गहराई और संघर्ष को दर्शाते हैं। इनमें से कुछ उद्धरण और उनकी व्याख्या इस प्रकार हैं:

मुख्य उद्धरण

  • "अच्छी तकनीक वह है जिसका इस्तेमाल दिखाई न पड़े।" – यह उद्धरण फिल्म निर्माण की सूक्ष्मता और कला को दर्शाता है, जहाँ तकनीकी कौशल इतना सहज होता है कि वह दर्शक को महसूस नहीं होता।
  • "किसी फ़िल्मकार के लिए उसकी पहली फ़िल्म एक अबूझ पहेली होती है।" – पहली फिल्म बनाना एक चुनौतीपूर्ण और अनिश्चित प्रक्रिया होती है, जिसमें सफलता और असफलता दोनों के डर होते हैं।
  • "कुत्ते के मालिक से कहा था, 'अपू-दुर्गा जब भागने लगते हैं, तब तुम अपने कुत्ते को उन दोनों के पीछे भागने के लिए कहना।'" – यह उद्धरण फिल्म निर्माण में धैर्य और रचनात्मकता की आवश्यकता को दर्शाता है।

व्याख्या

ये उद्धरण फिल्म निर्माण की जटिलताओं, कलाकारों और तकनीकी टीम के बीच तालमेल, और कठिनाइयों के बावजूद कला की सफलता को दर्शाते हैं। पहली फिल्म की शूटिंग में आने वाली समस्याएँ और उनका समाधान फिल्मकार की प्रतिबद्धता और धैर्य को दर्शाता है।

अभ्यास प्रश्न

  • "अच्छी तकनीक वह है जिसका इस्तेमाल दिखाई न पड़े।" इस उद्धरण का क्या अर्थ है?
  • पहली फिल्म बनाने में फिल्मकार को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
  • फिल्म निर्माण में धैर्य और रचनात्मकता का क्या महत्व है?

उत्तर कुंजी

  • तकनीक इतनी सहज होनी चाहिए कि दर्शक को उसकी उपस्थिति महसूस न हो।
  • असफलता का डर, आर्थिक समस्याएँ, कलाकारों की उपलब्धता, प्राकृतिक बाधाएँ।
  • धैर्य से समस्याओं का समाधान होता है और रचनात्मकता से फिल्म की गुणवत्ता बढ़ती है।

त्वरित संदर्भ

  • फिल्म निर्माण में तकनीक और कला का संतुलन आवश्यक है।
  • पहली फिल्म बनाना चुनौतीपूर्ण होता है।
  • धैर्य और रचनात्मकता से समस्याओं का समाधान संभव है।

शब्दावली

  • तकनीक: किसी कार्य को करने का तरीका या कौशल
  • अबूझ पहेली: समझने में कठिन समस्या
  • रचनात्मकता: नई और अनोखी सोच या कला

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