कृष्णा सोबती का परिचय
कृष्णा सोबती हिंदी कथा साहित्य की एक प्रमुख लेखिका हैं जिनका जन्म 18 फरवरी 1925 को गुजरात (पश्चिमी पंजाब, वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। उन्होंने उपन्यास, कहानी संग्रह और संस्मरणों की रचनाएँ कीं। उनकी प्रमुख कृतियों में ज़िंदगीनामा, दिलोदानिश, ऐ लड़की, समय सरगम, डार से बिछुड़ी, मित्रो मरजानी, बादलों के घेरे, सूरजमुखी अँधेरे के, हम-हशमत, शब्दों के आलोक में आदि शामिल हैं। उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान, हिंदी अकादमी का शलाका सम्मान और अन्य राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। कृष्णा सोबती का लेखन संयमित और साफ़-सुथरा है, जिससे उन्होंने हिंदी साहित्य में एक विशिष्ट स्थान बनाया।
मुख्य बिंदु
- हिंदी कथा साहित्य में उनकी विशिष्ट पहचान।
- संयमित और प्रभावशाली लेखन शैली।
- कालजयी चरित्रों का सृजन जैसे मित्रो, शाहनी, हशमत।
- भाषिक विविधता: संस्कृतनिष्ठ तत्समता, उर्दू का बाँकपन, पंजाबी की ज़िंदादिली।
- भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में उनकी रचनाएँ महत्वपूर्ण।
पाठ्य प्रमाण
"हिंदी कथा साहित्य में कृष्णा सोबती की विशिष्ट पहचान है। वे मानती हैं कि कम लिखना विशिष्ट लिखना है।"
अभ्यास प्रश्न
- कृष्णा सोबती की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
- उनकी लेखन शैली की विशेषताएँ क्या हैं?
- कृष्णा सोबती ने हिंदी साहित्य को कौन-कौन से यादगार चरित्र दिए हैं?
उत्तर कुंजी
- प्रमुख रचनाएँ: ज़िंदगीनामा, दिलोदानिश, ऐ लड़की, समय सरगम, हम-हशमत आदि।
- लेखन शैली: संयमित, साफ़-सुथरी, भाषिक विविधता।
- यादगार चरित्र: मित्रो, शाहनी, हशमत।
शब्दावली
- संयमित: नियंत्रित, सीमित
- कालजयी: काल के पार स्थायी
- तत्समता: संस्कृत के समान
- बाँकपन: नज़ाकत, शिष्टता
- ज़िंदादिली: जीवन्तता, उत्साह
मियाँ नसीरुद्दीन का शब्दचित्र
मियाँ नसीरुद्दीन, कृष्णा सोबती के संग्रह "हम-हशमत" से लिया गया एक चरित्र है। वे खानदानी नानबाई हैं जो रोटी बनाने की कला में माहिर हैं। मियाँ नसीरुद्दीन अपने पेशे को कला का दर्जा देते हैं और अपने हुनर को सीखने की महत्ता बताते हैं। उनकी बातचीत से पता चलता है कि उन्होंने यह कला अपने वालिद उस्ताद से सीखी है और यह पेशा खानदानी है। वे तालीम की महत्ता और मेहनत की बात करते हैं।
मुख्य बिंदु
- खानदानी नानबाई मियाँ नसीरुद्दीन का परिचय।
- रोटी बनाने की कला और पेशे के प्रति उनका दृष्टिकोण।
- शिक्षा और मेहनत की महत्ता।
- परिवारिक परंपरा और हुनर का हस्तांतरण।
- उनके द्वारा बनाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की रोटियाँ।
पाठ्य प्रमाण
"मियाँ मशहूर हैं छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए।"
"काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं।"
हल किए गए उदाहरण
प्रश्न: मियाँ नसीरुद्दीन ने अपनी कला कहाँ से सीखी?
उत्तर: मियाँ नसीरुद्दीन ने यह कला अपने वालिद उस्ताद से सीखी, जो उनके परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। उन्होंने कहा कि यह खानदानी पेशा है और उन्होंने घर से ही यह हुनर प्राप्त किया।
अभ्यास प्रश्न
- मियाँ नसीरुद्दीन का पेशा क्या है और वे इसे कैसे देखते हैं?
- मियाँ नसीरुद्दीन ने तालीम के बारे में क्या कहा है?
- मियाँ नसीरुद्दीन के अनुसार रोटी पकाने में झूठ का क्या स्थान है?
उत्तर कुंजी
- पेशा: खानदानी नानबाई, जिसे वे कला मानते हैं।
- तालीम: मेहनत और अभ्यास से आती है, नसीहतों से नहीं।
- झूठ: रोटी पकाने में झूठ का कोई स्थान नहीं है, रोटी आँच से पकती है।
शब्दावली
- नानबाई: रोटी बनाने वाला
- वालिद: पिता
- नसीहत: सीख, शिक्षा
- तालीम: शिक्षा, प्रशिक्षण
- खानदानी: परिवार से प्राप्त
- झूठ: असत्य
- मसीहा: उद्धारकर्ता, विशेषज्ञ
- इल्म: ज्ञान
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