आओ, मिलकर बचाएँ

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Chapter 17: आओ, मिलकर बचाएँ

Ch 17

Hindi

Class 11 PCM

निर्मला पुतुल का परिचय

निर्मला पुतुल का जन्म सन् 1972 में झारखंड के दुमका जिले में एक आदिवासी परिवार में हुआ। उनके पिता और चाचा शिक्षक थे, परंतु आर्थिक कठिनाइयों के कारण उनका प्रारंभिक शिक्षा जीवन संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने नर्सिंग में डिप्लोमा किया और बाद में इग्नू से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। आदिवासी समाज और संथाली संस्कृति से उनका गहरा जुड़ाव था, जो उनकी रचनाओं में स्पष्ट दिखाई देता है।

निर्मला पुतुल की कविताओं में आदिवासी समाज की विसंगतियाँ, जैसे अशिक्षा, कुरीतियाँ, पुरुष वर्चस्व, पर्यावरण की हानि, और सामाजिक समस्याएँ प्रमुख विषय हैं। वे आदिवासी जीवन के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को बेबाकी से प्रस्तुत करती हैं।

मुख्य बिंदु

  • आदिवासी परिवेश और संघर्ष
  • संथाली समाज की विसंगतियाँ और सकारात्मकताएँ
  • प्रकृति और समाज के बीच संबंध
  • शिक्षा और आर्थिक कठिनाइयाँ

पाठ्य प्रमाण

"उन्होंने आदिवासी समाज की विसंगतियों को तल्लीनता से उकेरा है - कड़ी मेहनत के बावजूद खराब दशा, कुरीतियों के कारण बिगड़ती पीढ़ी, थोड़े लाभ के लिए बड़े समझौते, पुरुष वर्चस्व, स्वार्थ के लिए पर्यावरण की हानि, शिक्षित समाज का दिक्कुओ और व्यवसायियो के हाथों की कठपुतली बनना आदि।"

अभ्यास प्रश्न

  • निर्मला पुतुल के जीवन में किन-किन संघर्षों का उल्लेख किया गया है?
  • उनकी कविताओं में आदिवासी समाज के कौन-कौन से पहलू प्रमुख हैं?
  • संथाली समाज की कौन-सी विशेषताएँ उनकी रचनाओं में दिखाई देती हैं?

उत्तर कुंजी

  • आर्थिक कठिनाइयाँ, शिक्षा में बाधाएँ, सामाजिक विसंगतियाँ।
  • अशिक्षा, कुरीतियाँ, पर्यावरण की हानि, पुरुष वर्चस्व।
  • सादगी, भोलापन, प्रकृति से जुड़ाव, कठोर परिश्रम, अशिक्षा, कुरीतियाँ।

शब्दावली

  • विसंगतियाँ - असंगतियाँ, समस्याएँ
  • कुरीतियाँ - गलत प्रथाएँ
  • अक्खड़पन - रूखापन
  • जुझारूपन - संघर्ष करने की प्रवृत्ति
Diagram 1 – Class 11 PCM Hindi आओ, मिलकर बचाएँ

आओ, मिलकर बचाएँ कविता का सारांश

"आओ, मिलकर बचाएँ" कविता में आदिवासी समाज की जीवनशैली, उनकी संस्कृति, और प्रकृति के संरक्षण की आवश्यकता को दर्शाया गया है। कविता में बस्तियों, भाषा, मिट्टी, नदियाँ, पहाड़, और जीवन के विभिन्न पहलुओं को बचाने की अपील की गई है। यह कविता सामाजिक और प्राकृतिक दोनों ही दृष्टिकोणों से संरक्षण की बात करती है।

मुख्य बिंदु

  • प्रकृति और संस्कृति का संरक्षण
  • आदिवासी जीवन के रंग और भाव
  • समाज में विश्वास, उम्मीद और सपनों की आवश्यकता
  • सादगी, भोलापन, जुझारूपन जैसे भाव

पाठ्य प्रमाण

"अपनी बस्तियों को नंगी होने से बचाएँ, शहर की आबो-हवा से बचाएँ उसे।"

"भीतर की आग, धनुष की डोरी, तीर का नुकीलापन, कुल्हाड़ी की धार, जंगल की ताज़ा हवा, नदियों की निर्मलता।"

अभ्यास प्रश्न

  • कविता में किन-किन प्राकृतिक तत्वों को बचाने की बात की गई है?
  • कविता में आदिवासी जीवन के कौन-कौन से भाव व्यक्त हुए हैं?
  • कविता का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर कुंजी

  • जंगल, नदियाँ, पहाड़, मिट्टी, फसलें, हवा।
  • भोलापन, जुझारूपन, हरापन, जीवन की गर्माहट।
  • प्रकृति और संस्कृति का संरक्षण आवश्यक है।

शब्दावली

  • आबो-हवा - जलवायु
  • माटी - मिट्टी
  • सोंधापन - सुगंध
  • उम्मीद - आशा
  • दौर - समय
  • अक्खड़पन - रूखापन
  • जुझारूपन - संघर्ष करने की प्रवृत्ति
Diagram 2 – Class 11 PCM Hindi आओ, मिलकर बचाएँ Diagram 3 – Class 11 PCM Hindi आओ, मिलकर बचाएँ

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