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साखी

CLASS 10 . HINDI . स्पर्श भाग 2 . साखी

Chapter 1 : साखी

Ch 1

HINDI

CLASS 10

कबीर का जीवन परिचय

कबीर का जन्म 1398 में काशी में हुआ माना जाता है। वे गुरु रामानंद के शिष्य थे और लगभग 120 वर्ष की आयु तक जीवित रहे। जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने मगहर में निवास किया और वहीं चिरनिद्रा में लीन हो गए। कबीर का जीवन सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक परिवर्तनों के समय में बीता।

मुख्य बिंदु

  • जन्म स्थान: काशी
  • गुरु: रामानंद
  • आयु: लगभग 120 वर्ष
  • अंतिम निवास: मगहर
  • जीवन काल: 1398-1518

पाठ्य प्रमाण

"कबीर का जन्म 1398 में काशी में हुआ माना जाता है। गुरु रामानंद के शिष्य कबीर ने 120 वर्ष की आयु पाई। जीवन के अंतिम कुछ वर्ष मगहर में बिताए और वहीं चिरनिद्रा में लीन हो गए।"

अभ्यास प्रश्न

  • कबीर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
  • कबीर के गुरु कौन थे?
  • कबीर ने जीवन के अंतिम वर्ष कहाँ बिताए?

उत्तर कुंजी

  • कबीर का जन्म 1398 में काशी में हुआ था।
  • उनके गुरु रामानंद थे।
  • उन्होंने जीवन के अंतिम वर्ष मगहर में बिताए।

शब्दावली

  • चिरनिद्रा: मृत्यु
  • आयु: जीवन काल

कबीर का साहित्यिक प्रसंग और भाषा

कबीर का आविर्भाव ऐसे समय में हुआ जब राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक क्रांतियाँ चरम पर थीं। वे क्रांतिदर्शी कवि थे जिनकी कविताओं में गहरी सामाजिक चेतना प्रकट होती है। कबीर ने धर्म के बाह्याडंबरों पर तीखी चोट की और आत्मा-परमात्मा के विरह-मिलन के भावपूर्ण गीत गाए। उनकी भाषा पूर्वी जनपद की थी, जिसमें अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी और पंजाबी भाषाओं के शब्दों का मिश्रण था। इस भाषा को 'पचमेल खिचड़ी' या 'सधुक्कड़ी' कहा जाता है।

मुख्य बिंदु

  • सामाजिक और धार्मिक क्रांतिदर्शी कवि
  • धर्म के बाह्याडंबरों की आलोचना
  • आत्मा-परमात्मा के विरह और मिलन के गीत
  • भाषा: पूर्वी जनपद की, मिश्रित शब्दावली
  • भाषा का नाम: पचमेल खिचड़ी, सधुक्कड़ी

पाठ्य प्रमाण

"कबीर की भाषा पूर्वी जनपद की भाषा थी। उन्होंने जनचेतना और जनभावनाओं को अपने सबद और साखियों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया।"

अभ्यास प्रश्न

  • कबीर की भाषा किस प्रकार की थी?
  • कबीर ने अपनी कविताओं में किन विषयों को प्रमुखता दी?
  • कबीर की भाषा को किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर कुंजी

  • कबीर की भाषा पूर्वी जनपद की मिश्रित भाषा थी।
  • उन्होंने सामाजिक चेतना, धर्म के बाह्याडंबर और आत्मा-परमात्मा के भावों को प्रमुखता दी।
  • कबीर की भाषा को पचमेल खिचड़ी या सधुक्कड़ी कहा जाता है।

शब्दावली

  • बाह्याडंबर: दिखावा
  • जनचेतना: सामाजिक जागरूकता
  • साखी: दोहा छंद जिसमें जीवन का तत्वज्ञान होता है

साखी का स्वरूप और महत्व

साखी शब्द 'साक्षी' का तद्भव रूप है, जिसका अर्थ प्रत्यक्ष ज्ञान होता है। संत संप्रदाय में अनुभव ज्ञान को अधिक महत्व दिया जाता है। साखी वस्तुतः दोहा छंद होती है, जिसमें 13 और 11 के विश्राम से कुल 24 मात्राएँ होती हैं। कबीर की साखियाँ गुरु-शिष्य के बीच जीवन के तत्वज्ञान की शिक्षा देती हैं, जो सरल, प्रभावपूर्ण और यादगार होती हैं।

मुख्य बिंदु

  • साखी = साक्षी (प्रत्यक्ष ज्ञान)
  • अनुभव ज्ञान का महत्व
  • छंद: दोहा (13 + 11 = 24 मात्राएँ)
  • जीवन तत्वज्ञान की शिक्षा

पाठ्य प्रमाण

"'साखी' वस्तुतः दोहा छंद ही है जिसका लक्षण है 13 और 11 के विश्राम से 24 मात्रा। प्रस्तुत पाठ की साखियाँ प्रमाण हैं कि सत्य की साक्षी देता हुआ ही गुरु शिष्य को जीवन के तत्वज्ञान की शिक्षा देता है।"

अभ्यास प्रश्न

  • साखी शब्द का अर्थ क्या है?
  • साखी किस छंद में होती है?
  • साखी का क्या महत्व है?

उत्तर कुंजी

  • साखी का अर्थ है प्रत्यक्ष ज्ञान या साक्षी।
  • साखी दोहा छंद में होती है जिसमें 24 मात्राएँ होती हैं।
  • साखी जीवन के तत्वज्ञान की सरल और प्रभावपूर्ण शिक्षा देती है।

शब्दावली

  • तद्भव: किसी शब्द का परिवर्तित रूप
  • विश्राम: विराम
  • मात्रा: छंद की इकाई

कबीर की प्रमुख साखियाँ

कबीर की साखियाँ जीवन के गूढ़ तत्वों को सरल भाषा में प्रस्तुत करती हैं। वे सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर गहरी दृष्टि प्रदान करती हैं। नीचे कुछ प्रमुख साखियाँ प्रस्तुत हैं जिनमें कबीर के विचार स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं।

मुख्य बिंदु

  • साधारण भाषा में गूढ़ तत्वों की व्याख्या
  • धार्मिक और सामाजिक आलोचना
  • आत्मा-परमात्मा के संबंध में भाव

पाठ्य प्रमाण

  • "ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ। अपना तन सीतल करै, औरन कौं सुख होइ।।"
  • "जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि। सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि।।"
  • "पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ। ऐकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होइ।।"

अभ्यास प्रश्न

  • कबीर की साखियों में कौन-कौन से विषय प्रमुख हैं?
  • नीचे दी गई साखी का अर्थ समझाइए: "जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।"
  • कबीर की साखियों की भाषा की विशेषता क्या है?

उत्तर कुंजी

  • साखियाँ सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर आधारित हैं।
  • यह साखी अहंकार के नाश और ईश्वर की अनुभूति को दर्शाती है।
  • साखियों की भाषा सरल, मिश्रित और जन-जन तक पहुँचने वाली है।

शब्दावली

  • बाँणी: बोली
  • आपा: अहंकार
  • अषिर: अक्षर
  • मुराड़ा: जलती हुई लकड़ी