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मनुष्यता

CLASS 10 . HINDI . स्पर्श भाग 2 . मनुष्यता

Chapter 3 : मनुष्यता

Ch 3

HINDI

CLASS 10

मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय

मैथिलीशरण गुप्त (1886-1964) हिंदी के प्रसिद्ध राष्ट्रकवि थे। उनका जन्म झाँसी के निकट चिरगाँव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही प्राप्त की। वे संस्कृत, बांग्ला, मराठी और अंग्रेज़ी भाषाओं में निपुण थे। गुप्त जी की कविताओं में रामभक्ति प्रमुख थी और उन्होंने भारतीय जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपनी रचनाओं में समग्र रूप से प्रस्तुत किया। उनकी भाषा शुद्ध खड़ी बोली है, जिसमें संस्कृत का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

उनकी प्रमुख कृतियों में 'साकेत', 'यशोधरा' और 'जयद्रथ वध' शामिल हैं। उनके परिवार में भी साहित्यिक प्रतिभा थी; उनके पिता सेठ रामचरण दास और छोटे भाई सियारामशरण गुप्त भी कवि थे।

मुख्य बिंदु

  • राष्ट्रकवि के रूप में प्रसिद्ध
  • शिक्षा-दीक्षा घर पर
  • संस्कृत, बांग्ला, मराठी, अंग्रेज़ी भाषाओं का ज्ञान
  • रामभक्ति की कविताएँ
  • प्रमुख कृतियाँ: साकेत, यशोधरा, जयद्रथ वध
  • परिवार में साहित्यिक परंपरा

पाठ्य प्रमाण

"1886 में झाँसी के करीब चिरगाँव में जन्मे मैथिलीशरण गुप्त अपने जीवनकाल में ही राष्ट्रकवि के रूप में विख्यात हुए।"

अभ्यास प्रश्न

  • मैथिलीशरण गुप्त का जन्म कहाँ हुआ था?
  • गुप्त जी की प्रमुख कृतियाँ कौन-कौन सी हैं?
  • गुप्त जी की भाषा की विशेषता क्या है?

उत्तर कुंजी

  • झाँसी के निकट चिरगाँव में
  • साकेत, यशोधरा, जयद्रथ वध
  • शुद्ध खड़ी बोली, संस्कृत प्रभाव

शब्दावली

  • राष्ट्रकवि - देश के लिए प्रसिद्ध कवि
  • रामभक्ति - भगवान राम की भक्ति
  • खड़ी बोली - हिंदी की शुद्ध बोली

मनुष्यता का विश्लेषण

"मनुष्यता" मैथिलीशरण गुप्त की एक प्रसिद्ध कविता है, जिसमें कवि ने मनुष्य के जीवन में सहानुभूति, परोपकार और दूसरों के लिए जीने की भावना को प्रमुखता से प्रस्तुत किया है। कवि के अनुसार, मनुष्य केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी जीता है और मरता है। यह कविता मानवता के उच्चतम गुणों को दर्शाती है, जैसे दया, त्याग, और परोपकार।

मुख्य बिंदु

  • मनुष्य में चेतना-शक्ति की प्रबलता
  • परहित की भावना
  • सहानुभूति और दया का महत्व
  • महान मनुष्य वही जो दूसरों के लिए मरे
  • इतिहास के उदाहरण: क्षुधार्त रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि

पाठ्य प्रमाण

"वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।"

"सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही; वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।"

हल किए गए उदाहरण

प्रश्न: कविता में मनुष्य के कौन-कौन से गुणों को प्रमुखता दी गई है?

उत्तर: कविता में सहानुभूति, परोपकार, त्याग, और दूसरों के लिए जीने-मरने की भावना को प्रमुखता दी गई है। कवि ने बताया है कि मनुष्य वही महान है जो अपने और अपनों के हित से ऊपर उठकर दूसरों के हित की चिंता करता है।

अभ्यास प्रश्न

  • कवि के अनुसार मनुष्य की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
  • कविता में किन-किन ऐतिहासिक पात्रों का उल्लेख है?
  • "मनुष्य मात्र बंधु है" का क्या अर्थ है?

उत्तर कुंजी

  • परहित की भावना और दूसरों के लिए जीना-मरना
  • रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि
  • सभी मनुष्य एक-दूसरे के भाई-बंधु हैं

शब्दावली

  • सहानुभूति - दूसरों के दुःख को समझना
  • महाविभूति - बड़ी संपत्ति या महानता
  • वशीकृता - वश में किया हुआ
  • परार्थ - दूसरों के लिए
  • अंतरैक्य - आत्मा की एकता

मनुष्यता कविता के प्रमुख उद्धरण एवं व्याख्या

इस कविता के कुछ महत्वपूर्ण उद्धरण और उनकी व्याख्या इस प्रकार हैं:

  • "मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी, मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी।"
    यह पंक्ति बताती है कि मृत्यु से डरना नहीं चाहिए, बल्कि ऐसा जीवन व्यतीत करना चाहिए कि लोग हमें याद करें।
  • "मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।"
    यहाँ कवि कहता है कि जो व्यक्ति केवल अपने लिए जीता है, वह वास्तव में जीवित नहीं माना जाता।
  • "वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।"
    यह पंक्ति कविता का मुख्य भाव है, जो बताती है कि सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के लिए अपना जीवन समर्पित करता है।
  • "सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही; वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।"
    यहाँ सहानुभूति को सबसे बड़ी संपत्ति बताया गया है जो मनुष्य को महान बनाती है।

अभ्यास प्रश्न

  • "मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी" पंक्ति का क्या अर्थ है?
  • कविता में "वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे" का क्या भाव है?
  • सहानुभूति का कवि ने क्या महत्व बताया है?

उत्तर कुंजी

  • मृत्यु से डरना नहीं चाहिए, बल्कि ऐसा जीवन जीना चाहिए कि लोग याद रखें।
  • सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के लिए अपना जीवन समर्पित करता है।
  • सहानुभूति को सबसे बड़ी संपत्ति माना गया है जो मनुष्य को महान बनाती है।

शब्दावली

  • मर्त्य - मरणशील
  • सुमृत्यु - अच्छी याद
  • उदार - दानशील, सहृदय
  • कीर्ति - यश
  • कूजती - मधुर ध्वनि करना

शब्दार्थ और टिप्पणियाँ

इस खंड में कविता में प्रयुक्त महत्वपूर्ण शब्दों के अर्थ और टिप्पणियाँ दी गई हैं, जो पाठ को समझने में सहायक हैं।

  • मर्त्य - मरणशील
  • पशु-प्रवृत्ति - पशु जैसा स्वभाव
  • उदार - दानशील, सहृदय
  • कृतार्थ - आभारी, धन्य
  • कीर्ति - यश
  • कूजती - मधुर ध्वनि करना
  • क्षुधार्त - भूख से व्याकुल
  • रंतिदेव - एक परम दानी राजा
  • करस्थ - हाथ में पकड़ा हुआ
  • दधीचि - एक प्रसिद्ध ऋषि जिनकी हड्डियों से इंद्र का वज्र बना था
  • परार्थ - जो दूसरों के लिए हो
  • अस्थिजाल - हड्डियों का समूह
  • उशीनर - गंधार देश का राजा
  • क्षितीश - राजा
  • स्वमांस - अपने शरीर का मांस
  • कर्ण - दान देने के लिए प्रसिद्ध कुंती पुत्र
  • महाविभूति - बड़ी भारी पूँजी
  • वशीकृता - वश में की हुई
  • विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा - बुद्ध ने करुणावश उस समय की पारंपरिक मान्यताओं का विरोध किया था
  • मदांध - जो गर्व से अंधा हो
  • वित्त - धन-संपत्ति
  • परस्परावलंब - एक-दूसरे का सहारा
  • अमर्त्य-अंक - देवता की गोद
  • अपंक - कलंक-रहित
  • स्वयंभू - परमात्मा / स्वयं उत्पन्न होने वाला
  • अंतरैक्य - आत्मा की एकता / अंतःकरण की एकता
  • प्रमाणभूत - साक्षी
  • अभीष्ट - इच्छित
  • अतर्क - तर्क से परे
  • सतर्क पंथ - सावधान यात्री