CLASS 10 . HINDI . स्पर्श भाग 2 . पद

Chapter 2 : पद

Ch 2

HINDI

CLASS 10

मीरा का जीवन परिचय

मीरा का जन्म 1503 में जोधपुर के चोकड़ी (कुड़की) गाँव में हुआ था। उनका विवाह 13 वर्ष की आयु में मेवाड़ के महाराणा सांगा के कुँवर भोजराज से हुआ। बाल्यावस्था में ही उनकी माता का निधन हो गया था। विवाह के कुछ वर्षों बाद उनके पहले पति, फिर पिता और एक युद्ध के दौरान ससुर का भी देहांत हो गया। इन पारिवारिक दुखों के कारण मीरा ने भौतिक जीवन को त्याग दिया और वृंदावन में जाकर पूरी तरह से भगवान कृष्ण के प्रति समर्पित हो गईं।

मुख्य बिंदु

  • जन्म और परिवार
  • विवाह और पारिवारिक दुख
  • भक्ति और समर्पण

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"मीराबाई का जन्म जोधपुर के चोकड़ी (कुड़की) गाँव में 1503 में हुआ माना जाता है। 13 वर्ष की उम्र में मेवाड़ के महाराणा सांगा के कुँवर भोजराज से उनका विवाह हुआ।"

हल किए गए उदाहरण

मीरा के जीवन में माता, पति, पिता और ससुर के निधन के कारण वे भौतिक जीवन से निराश होकर भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन हो गईं।

अभ्यास प्रश्न

  • मीरा का जन्म कहाँ और कब हुआ था?
  • मीरा के जीवन में किन-किन दुखों का सामना करना पड़ा?
  • मीरा ने भौतिक जीवन को क्यों त्याग दिया?

उत्तर कुंजी

  • मीरा का जन्म 1503 में जोधपुर के चोकड़ी गाँव में हुआ था।
  • उनके जीवन में माता, पति, पिता और ससुर के निधन जैसे दुख आए।
  • दुखों के कारण वे भौतिक जीवन से निराश होकर भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन हो गईं।

त्वरित संदर्भ

  • मीरा का जन्म 1503 में जोधपुर के चोकड़ी गाँव में हुआ।
  • विवाह के बाद परिवार में कई दुखद घटनाएँ हुईं।
  • मीरा ने भौतिक जीवन त्यागकर भक्ति मार्ग अपनाया।

शब्दावली

  • कुंवर - राजकुमार
  • समर्पण - पूर्ण निष्ठा और भक्ति
  • वृंदावन - भगवान कृष्ण का प्रसिद्ध स्थान

मीरा की काव्य साहित्य समझ

मीरा मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की एक प्रमुख कवयित्री थीं। उनकी रचनाएँ उत्तर भारत, गुजरात, बिहार और बंगाल में प्रचलित हैं। वे हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं की कवयित्री मानी जाती हैं। उनकी भक्ति भावनाएँ दैन्य और माधुर्य से परिपूर्ण हैं। उनकी भाषा में राजस्थानी, ब्रज, गुजराती, पंजाबी, खड़ी बोली और पूर्वी भाषाओं का मिश्रण मिलता है।

मुख्य बिंदु

  • मध्यकालीन भक्ति आंदोलन में मीरा का स्थान
  • भक्ति की विशेषताएँ: दैन्य और माधुर्यभाव
  • भाषाई विविधता

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"मीरा की भक्ति दैन्य और माधुर्यभाव की है। इन पर योगियों, संतों और वैष्णव भक्तों का सम्मिलित प्रभाव पड़ा है।"

हल किए गए उदाहरण

मीरा की भक्ति में दीनता और प्रेम दोनों भाव स्पष्ट रूप से मिलते हैं, जो उनकी रचनाओं को विशेष बनाते हैं।

अभ्यास प्रश्न

  • मीरा की भक्ति की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
  • मीरा की भाषा में कौन-कौन सी भाषाओं का मिश्रण मिलता है?

उत्तर कुंजी

  • मीरा की भक्ति दैन्य और माधुर्यभाव से भरी हुई है।
  • उनकी भाषा में राजस्थानी, ब्रज, गुजराती, पंजाबी, खड़ी बोली और पूर्वी भाषाओं का मिश्रण है।

त्वरित संदर्भ

  • मीरा की भक्ति में दैन्य और माधुर्यभाव प्रमुख हैं।
  • उनकी भाषा में कई क्षेत्रीय भाषाओं का मिश्रण है।

शब्दावली

  • दैन्य - दुःख और पीड़ा
  • माधुर्य - मिठास, प्रेमपूर्ण भाव
  • संमिलित - संयुक्त

मीरा के भक्ति स्वरूप

मीरा की भक्ति में उनके आराध्य भगवान कृष्ण के विभिन्न रूपों का समावेश है। वे निर्गुण निराकार ब्रह्म, सगुण साकार गोपीवल्लभ श्रीकृष्ण और निर्मोही परदेशी जोगी के रूप में अपने आराध्य को देखती थीं। उनका प्रेम पूर्ण समर्पण और एकनिष्ठ भक्ति से भरा था।

मुख्य बिंदु

  • भगवान कृष्ण के विभिन्न रूप
  • एकनिष्ठ प्रेम और समर्पण
  • वृंदावन में निवास

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

"मीरा घर-द्वार छोड़कर वृंदावन में जा बसी थीं और कृष्णमय हो गई थीं।"

हल किए गए उदाहरण

मीरा ने अपने आराध्य को निर्गुण निराकार ब्रह्म से लेकर सगुण साकार गोपीवल्लभ श्रीकृष्ण तक विभिन्न रूपों में देखा और पूर्ण प्रेम से भक्ति की।

अभ्यास प्रश्न

  • मीरा अपने आराध्य को किन-किन रूपों में देखती थीं?
  • मीरा की भक्ति का मुख्य भाव क्या था?

उत्तर कुंजी

  • मीरा अपने आराध्य को निर्गुण निराकार ब्रह्म, सगुण साकार गोपीवल्लभ श्रीकृष्ण और निर्मोही परदेशी जोगी के रूप में देखती थीं।
  • उनकी भक्ति पूर्ण प्रेम और समर्पण की थी।

त्वरित संदर्भ

  • मीरा के आराध्य के रूप विविध हैं।
  • उनकी भक्ति में पूर्ण समर्पण और प्रेम है।

शब्दावली

  • निर्गुण - बिना गुण वाला
  • सगुण - गुणों वाला
  • एकनिष्ठ - पूर्ण निष्ठा वाला

मीरा के पद: सारांश और विश्लेषण

प्रस्तुत पाठ में दो पद संकलित हैं जो मीरा के आराध्य भगवान कृष्ण को समर्पित हैं। इन पदों में मीरा अपने आराध्य से मनुहार करती हैं, लाड़ करती हैं, कभी-कभी उलाहना भी देती हैं। पदों में उनके प्रेम, भक्ति और श्रद्धा की गहराई स्पष्ट होती है।

मुख्य बिंदु

  • प्रेम और भक्ति की अभिव्यक्ति
  • आराध्य के प्रति मनोभाव
  • पदों की भाषा और शैली

पाठ्य प्रमाण / उदाहरण

पहला पद:
"हरि आप हरो जन री भीर। द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।"

दूसरा पद:
"स्याम म्हाने चाकर राखो जी, गिरधारी लाला म्हाँने चाकर राखोजी।"

हल किए गए उदाहरण

पहले पद में मीरा भगवान से द्रोपदी की लाज रखने और गजराज के कष्ट दूर करने की प्रार्थना करती हैं। दूसरे पद में वे अपने आराध्य के प्रति अपनी सेवा और भक्ति की भावना व्यक्त करती हैं।

अभ्यास प्रश्न

  • पहले पद में मीरा किससे सहायता मांगती हैं?
  • दूसरे पद में मीरा अपने आराध्य के प्रति क्या भाव प्रकट करती हैं?
  • मीरा के पदों में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग हुआ है?

उत्तर कुंजी

  • पहले पद में मीरा भगवान से द्रोपदी की लाज रखने और गजराज के कष्ट दूर करने की प्रार्थना करती हैं।
  • दूसरे पद में वे अपने आराध्य के प्रति सेवा और भक्ति की भावना व्यक्त करती हैं।
  • पदों में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती भाषाओं का मिश्रण है।

त्वरित संदर्भ

  • मीरा के पदों में प्रेम और भक्ति की गहराई है।
  • पदों की भाषा में क्षेत्रीय भाषाओं का मिश्रण मिलता है।
  • मीरा अपने आराध्य से संवाद करती हैं।

शब्दावली

  • हरि - भगवान विष्णु
  • चाकर - सेवक
  • लीला - भगवान के विविध रूप और कार्य
  • सुमरण - स्मरण करना
  • अधीर - व्याकुल

शब्दार्थ और टिप्पणियाँ

  • बढ़ायो - बढ़ाना
  • गजराज - ऐरावत (हाथी)
  • कुंजर - हाथी
  • पास्यूँ - पाना
  • लीला - भगवान के विविध रूप
  • सुमरण - याद करना / स्मरण
  • जागीरी - जागीर / साम्राज्य
  • पीतांबर - पीला वस्त्र
  • वैजंती - एक प्रकार का फूल
  • तीरां - किनारा
  • अधीराँ (अधीर) - व्याकुल होना
  • द्रोपदी री लाज राखी - दुर्योधन द्वारा द्रोपदी का चीरहरण कराने पर श्रीकृष्ण ने चीर को इतना बढ़ा दिया कि दुःशासन का हाथ थक गया।
  • काटी कुंजर पीर - हाथी के कष्ट को दूर करने के लिए मगरमच्छ को मारना।