CLASS 10 . HINDI . स्पर्श भाग 2 . अब कहाँ-दूसरे-के-दुख-से-दुखी-होने-वाले
Chapter 12 : अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले
Ch 12
HINDI
CLASS 10
निदा फ़ाज़ली का परिचय
निदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में हुआ था और उनका बचपन ग्वालियर में बीता। वे उर्दू की साठोत्तरी पीढ़ी के प्रमुख कवि माने जाते हैं। उनकी कविताएँ सरल और आम बोलचाल की भाषा में होती हैं, जो सीधे दिल और दिमाग़ को छू जाती हैं। निदा फ़ाज़ली ने गद्य रचनाओं में भी शेर-ओ-शायरी का समावेश कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी पहली कविता पुस्तक "लफ़्जों का पुल" थी। उन्हें 1999 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उनकी आत्मकथा के दो भाग "दीवारों के बीच" और "दीवारों के पार" प्रकाशित हैं। निदा फ़ाज़ली का निधन 8 फरवरी 2016 को हुआ।
मुख्य बिंदु
- जन्म और बचपन
- काव्य शैली और भाषा
- प्रमुख काव्य और गद्य रचनाएँ
- साहित्यिक पुरस्कार
- आत्मकथा
- निधन
पाठ्य प्रमाण
"निदा फ़ाज़ली की लफ़्जों का पुल नामक कविता की पहली पुस्तक आई। शायरी की किताब खोया हुआ सा कुछ के लिए 1999 के साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित निदा फ़ाज़ली की आत्मकथा का पहला भाग दीवारों के बीच और दूसरा दीवारों के पार शीर्षक से प्रकाशित हो चुका है।"
अभ्यास प्रश्न
- निदा फ़ाज़ली का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
- निदा फ़ाज़ली की कविताओं की भाषा कैसी होती है?
- उनकी कौन-सी पुस्तक को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?
उत्तर कुंजी
- 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में।
- सरल और आम बोलचाल की भाषा।
- शायरी की किताब "खोया हुआ सा कुछ"।
शब्दावली
- साहित्य अकादमी पुरस्कार - भारत सरकार द्वारा साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला सम्मान।
- आत्मकथा - स्वयं के जीवन का वर्णन।
पाठ प्रवेश का विश्लेषण
पाठ "अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले" में कुदरत और मानव के बीच के संबंध को दर्शाया गया है। कुदरत ने धरती पर सभी जीवधारियों को स्थान दिया, लेकिन मानव ने अपनी लालसा से अन्य जीवों को दरबदर कर दिया। मानव की स्वार्थी प्रवृत्ति ने न केवल अन्य प्राणियों को प्रभावित किया बल्कि अपनी ही जाति को भी नुकसान पहुँचाया। पाठ में यह भी बताया गया है कि आज के समय में लोग दूसरों के दुख से उदास नहीं होते और सहानुभूति की कमी है।
मुख्य बिंदु
- कुदरत और जीवधारियों का संबंध
- मानव की स्वार्थी प्रवृत्ति
- प्रकृति और मानव के बीच असंतुलन
- सहानुभूति की कमी
पाठ्य प्रमाण
"कुदरत ने यह धरती उन तमाम जीवधारियों के लिए अता फरमाई थी जिन्हें खुद उसी ने जन्म दिया था। लेकिन हुआ यह कि आदमी नाम के कुदरत के सबसे अज़ीम करिश्मे ने धीरे-धीरे पूरी धरती को ही अपनी जागीर बना लिया और अन्य तमाम जीवधारियों को दरबदर कर दिया।"
अभ्यास प्रश्न
- कुदरत ने धरती पर किसके लिए जीवन दिया?
- मानव ने धरती के साथ कैसा व्यवहार किया?
- पाठ में सहानुभूति की कमी का क्या अर्थ है?
उत्तर कुंजी
- सभी जीवधारियों के लिए।
- धरती को अपनी जागीर बना लिया और अन्य जीवों को दरबदर किया।
- लोग दूसरों के दुख से दुखी नहीं होते।
शब्दावली
- दरबदर - बेघर होना।
- अज़ीम - महान।
- सहानुभूति - दूसरों के दुःख को समझना और महसूस करना।
कहानियों का संदर्भ और उदाहरण
पाठ में बाइबिल के सोलोमेन, सिंधी कवि शेख अयाज़ और पैगंबर नूह की कहानियाँ प्रस्तुत की गई हैं, जो सहानुभूति और करुणा के महत्व को दर्शाती हैं। सोलोमेन की कहानी में वे सभी जीवों के राजा थे और उन्होंने चींटियों को आश्वासन दिया। शेख अयाज़ के पिता ने एक काले कीड़े को उसके घर छोड़ने की बात कही। नूह की कहानी में एक घायल कुत्ते के साथ उनके व्यवहार को दिखाया गया है। ये कहानियाँ मानवता और सहानुभूति की सीख देती हैं।
मुख्य बिंदु
- सोलोमेन की जीवों के प्रति करुणा
- शेख अयाज़ के पिता का दयालु व्यवहार
- नूह और घायल कुत्ते की कहानी
पाठ्य प्रमाण
"सुलेमान उनकी बातें सुनकर थोड़ी दूर पर रुक गए और चींटियों से बोले, 'घबराओ नहीं, सुलेमान को खुदा ने सबका रखवाला बनाया है। मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ, सबके लिए मुहब्बत हूँ।'"
अभ्यास प्रश्न
- सोलोमेन कौन थे और उनकी विशेषता क्या थी?
- शेख अयाज़ के पिता ने किस प्रकार दयालुता दिखाई?
- नूह की कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर कुंजी
- सोलोमेन एक बादशाह थे जो सभी जीवों के राजा थे।
- उन्होंने एक काले कीड़े को उसके घर छोड़ने की व्यवस्था की।
- सहानुभूति और करुणा का महत्व।
शब्दावली
- हाकिम - राजा / मालिक
- लश्कर - सेना / विशाल जनसमुदाय
- लकब - पद सूचक नाम
- प्रतीकात्मक - प्रतीकस्वरूप
प्रकृति और मानव का संबंध
पाठ में प्रकृति और मानव के बीच के असंतुलन को विस्तार से बताया गया है। पहले पूरा संसार एक परिवार की तरह था, लेकिन अब मानव ने अपनी बुद्धि से दीवारें खड़ी कर दी हैं। बढ़ती आबादी, प्रदूषण, और प्राकृतिक आपदाएँ इस असंतुलन के परिणाम हैं। समुद्र की लहरों द्वारा जहाजों को उठाकर फेंकने की घटना से प्रकृति के गुस्से का उदाहरण दिया गया है।
मुख्य बिंदु
- प्रकृति और मानव के बीच असंतुलन
- प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाएँ
- मानव की बुद्धि और उसके प्रभाव
- प्रकृति का गुस्सा
पाठ्य प्रमाण
"बढ़ती हुई आबादियों ने समंदर को पीछे सरकाना शुरू कर दिया है, पेड़ों को रास्तों से हटाना शुरू कर दिया है, फैलते हुए प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगाना शुरू कर दिया है। ... जब खड़े रहने की जगह कम पड़ी तो उसे गुस्सा आ गया। ... उसने एक रात अपनी लहरों पर दौड़ते हुए तीन जहाज़ों को उठाकर बच्चों की गेंद की तरह तीन दिशाओं में फेंक दिया।"
अभ्यास प्रश्न
- प्रकृति और मानव के बीच असंतुलन के कारण क्या हैं?
- प्रदूषण का पक्षियों पर क्या प्रभाव पड़ा है?
- प्रकृति के गुस्से का उदाहरण क्या है?
उत्तर कुंजी
- बढ़ती आबादी, प्रदूषण, और मानव की गतिविधियाँ।
- पंछी बस्तियों से भाग गए।
- समुद्र की लहरों ने जहाजों को उठाकर फेंक दिया।
शब्दावली
- सिमटना - सिकुड़ना
- ज़लज़ले - भूकंप
- सैलाब - बाढ़
- सैलानी - पर्यटक
प्यार भरा संबंध और सहानुभूति
पाठ में प्रेम, करुणा और सहानुभूति के महत्व को दर्शाया गया है। लेखक की माँ के अनुभवों से पता चलता है कि प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता कितनी आवश्यक है। कबूतरों के प्रति दया, फूलों और पेड़ों का सम्मान, और दूसरों के दुख में शामिल होना मानवता की पहचान है।
मुख्य बिंदु
- प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता
- सहानुभूति और करुणा
- लेखक के व्यक्तिगत अनुभव
पाठ्य प्रमाण
"मेरी माँ कहती थी, सूरज ढले आँगन के पेड़ों से पत्ते मत तोड़ो, पेड़ रोएँगे। ... कबूतरों को मत सताया करो, वे हज़रत मुहम्मद को अज़ीज़ हैं।"
अभ्यास प्रश्न
- लेखक की माँ ने प्रकृति के प्रति क्या सिखाया?
- कबूतरों के प्रति दया क्यों जरूरी है?
- सहानुभूति का मानव जीवन में क्या महत्व है?
उत्तर कुंजी
- पेड़ों और फूलों का सम्मान करना चाहिए।
- वे हज़रत मुहम्मद को अज़ीज़ हैं।
- यह मानवता और सह-अस्तित्व के लिए आवश्यक है।
शब्दावली
- अज़ीज़ - प्रिय / प्यारा
- मज़ार - दरगाह / कब्र
- गुंबद - गोल छत
- अज़ान - नमाज की सूचना
शब्दार्थ और टिप्पणियाँ
- हाकिम - राजा / मालिक
- लश्कर (लशकर) - सेना/ विशाल जनसमुदाय
- लकब - पद सूचक नाम
- प्रतीकात्मक - प्रतीकस्वरूप
- दालान - बरामदा
- सिमटना - सिकुड़ना
- ज़लज़ले - भूकंप
- सैलाब - बाढ़
- सैलानी - ऐसे पर्यटक जो भ्रमण कर नए-नए स्थानों के विषय में जानना चाहते हैं
- अज़ीज़ - प्रिय / प्यारा
- मज़ार - दरगाह / कब्र
- गुंबद - मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे आदि के ऊपर बनी गोल छत जिसमें आवाज़ गूँजती है
- अज़ान - नमाज के समय की सूचना जो मस्जिद की छत या दूसरी ऊँची जगह पर खड़े होकर दी जाती है
- डेरा - अस्थायी पड़ाव