कदम मिलाकर चलना होगा (अटल बिहारी वाजपेयी )

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Chapter 7: कदम मिलाकर चलना होगा (अटल बिहारी वाजपेयी )

Ch 7

Hindi

Class 8

व्याख्यान 1

कदम मिलाकर चलना होगा

संदर्भ वीडियो · व्याख्यान 1कदम मिलाकर चलना होगा

अटल बिहारी वाजपेयी

  • परिचय: वे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री थे।
  • साहित्यिक पहचान: वे प्रसिद्ध कवि और लेखक थे।

कदम मिलाकर चलना होगा

1बाधाएँ आती हैं आएँ,
2घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
3पाँवों के नीचे अंगारे,
4सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
5निज हाथों से हँसते-हँसते,
6आग लगा कर जलना होगा।
7कदम मिलाकर चलना होगा।
  • कठिनाइयाँ और संकट कितने भी भयानक हों, उनसे घबराना नहीं चाहिए।
  • लक्ष्य के लिए कष्ट सहते हुए भी हिम्मत और साथ बनाए रखना होगा।
8हास्य-रुदन में, तूफानों में,
9अमर असंख्यक बलिदानों में,
10उद्यानों में, वीरानों में,
11अपमानों में, सम्मानों में,
12उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
13पीड़ाओं में पलना होगा!
14कदम मिलाकर चलना होगा।
  • सुख-दुःख, सम्मान-अपमान और कठिन समय—हर परिस्थिति में दृढ़ रहना चाहिए।
  • बलिदान और पीड़ा के बीच भी आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ना है।
15उजियारे में, अंधकार में,
16कल कछार में, बीच धार में,
17घोर घृणा में, पूत प्यार में,
18क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
19जीवन के शत-शत आकर्षक,
20अरमानों को दलना होगा।
21कदम मिलाकर चलना होगा।
  • जीवन की बदलती और विपरीत परिस्थितियों में भी लक्ष्य से विचलित नहीं होना चाहिए।
  • बड़े उद्देश्य के लिए निजी इच्छाओं और आकर्षक अरमानों का त्याग करना पड़ सकता है।
22सम्मुख फैला अमर ध्येय पथ,
23प्रगति चिरंतन कैसा इति अथ,
24सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
25असफल, सफल समान मनोरथ,
26सब कुछ देकर कुछ न माँगते,
27पावस बनकर ढलना होगा।
28कदम मिलाकर चलना होगा।
  • कवि के सामने निरंतर प्रगति और महान ध्येय का मार्ग है; वहाँ रुकना उचित नहीं।
  • सफलता-असफलता की परवाह किए बिना, प्रतिफल माँगे बिना अपना सर्वस्व देना चाहिए।
29कुश काँटों से सज्जित जीवन,
30प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
31नीरवता से मुखरित मधुवन,
32पर-हित अर्पित अपना तन-मन,
33जीवन को शत-शत आहुति में,
34जलना होगा, गलना होगा।
35कदम मिलाकर चलना होगा।
  • जीवन कठिनाइयों और अभावों से भरा हो, तब भी निराश नहीं होना चाहिए।
  • दूसरों के हित के लिए तन-मन समर्पित कर निरंतर त्याग और परिश्रम करना होगा।
काव्य-शिल्प
काव्य-युक्तिउदाहरणप्रभाव
पुनरावृत्ति“कदम मिलाकर चलना होगा”मुख्य संदेश पर जोर देती है और कविता को एकता का स्वर देती है।
विरोधी भाव“उजियारे में, अंधकार में”; “क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में”हर तरह की परिस्थिति में समान दृढ़ता रखने का भाव उभरता है।
रूपक“पाँवों के नीचे अंगारे”कठोर कष्टों और संकटों को अंगारों के रूप में दिखाता है।
दृश्य-बिंब“सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ”विपत्तियों की तीव्रता का सजीव चित्र सामने आता है।
मुख्य भाव

कविता का संदेश

कविता कठिनाइयों में साहस, निरंतर प्रयत्न, एकता और परोपकार की प्रेरणा देती है। महान लक्ष्य के लिए निजी इच्छाओं का त्याग कर, बिना प्रतिफल माँगे आगे बढ़ना चाहिए।

बच्चे एक-दूसरे की सहायता करते हुए पहाड़ पर चढ़ रहे हैं—मिलकर आगे बढ़ने का भाव।
बच्चे एक-दूसरे की सहायता करते हुए पहाड़ पर चढ़ रहे हैं—मिलकर आगे बढ़ने का भाव।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • विपत्तियों से घबराए बिना लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए।
  • सुख-दुःख और मान-अपमान में आत्मसम्मान और धैर्य बनाए रखें।
  • महान उद्देश्य के लिए निजी इच्छाओं का त्याग आवश्यक हो सकता है।
  • सफलता या असफलता से विचलित हुए बिना निरंतर परिश्रम करें।
  • परोपकार के लिए तन-मन समर्पित करें और कदम मिलाकर चलें।

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