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राम-लक्ष्मण-परशुराम-संवाद

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Chapter 9 : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Ch 9

HINDI

CLASS 9

तुलसीदास का परिचय

गोस्वामी तुलसीदास का जन्म आज के उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनका जीवनकाल 16वीं से 17वीं शताब्दी (1532-1623) के मध्य माना जाता है। वे संस्कृत के श्रेष्ठ ज्ञाता थे और अवधी तथा ब्रज भाषा दोनों पर समान अधिकार रखते थे। तुलसीदास की प्रमुख रचनाओं में रामचरितमानस, कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली, विनयपत्रिका, हनुमान बाहुक शामिल हैं।

उनकी रचनाओं में राम को मानवीय मर्यादाओं और आदर्शों का प्रतीक माना गया है। उन्होंने नीति, स्नेह, शील, विनय, त्याग जैसे मूल्यों को प्रतिष्ठित किया। उनके काव्य में मानव-प्रकृति, लोकजीवन और जीवन-जगत की गहरी अंतर्दृष्टि मिलती है। तुलसीदास का देहावसान काशी में हुआ।

मुख्य बिंदु

  • जन्म और जीवनकाल
  • प्रमुख रचनाएँ
  • भाषा और शैली
  • राम के आदर्श और मूल्य
  • मानव-प्रकृति और जीवन-दर्शन

पाठ्य प्रमाण

रामचरितमानस उनकी प्रमुख रचना है जो उनकी अनन्य रामभक्ति और सृजनात्मक कौशल का मनोरम उदाहरण है।

अभ्यास प्रश्न

  • तुलसीदास का जन्म कहाँ हुआ था?
  • उनकी प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
  • तुलसीदास की भाषा शैली कैसी थी?

उत्तर कुंजी

  • उत्तर प्रदेश में
  • रामचरितमानस, कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली, विनयपत्रिका, हनुमान बाहुक
  • संस्कृत के ज्ञाता, अवधी और ब्रज भाषा में लेखन

शब्दावली

  • रामचरितमानस - तुलसीदास की प्रमुख काव्य रचना
  • अवधी - उत्तर भारत की एक लोकभाषा
  • ब्रज - हिंदी की एक प्राचीन बोली

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद का सारांश

यह संवाद रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है। इसमें मुनि परशुराम को श्रीराम द्वारा शिव-धनुष भंग करने का समाचार मिलता है। वे क्रोधित होकर सभा में आते हैं और राजाओं पर रोष प्रकट करते हैं। सभा में उपस्थित सभी लोग भयभीत हो जाते हैं। जनक और विश्वामित्र भी सभा में उपस्थित होते हैं। जनक सीता स्वयंवर के बारे में बताते हैं। विश्वामित्र राम-लक्ष्मण का परिचय परशुराम से कराते हैं और सम्मानपूर्वक अभिवादन करते हैं। इस संवाद में परशुराम के तेजस्वी और क्रोधित रूप का वर्णन है।

मुख्य बिंदु

  • परशुराम का क्रोध और सभा में आगमन
  • सभा में उपस्थित राजाओं का भय
  • जनक और विश्वामित्र की सभा में उपस्थिति
  • सीता स्वयंवर का उल्लेख
  • राम-लक्ष्मण का परिचय और सम्मान

पाठ्य प्रमाण

"देखत भृगुपति बेषु कराला। उठे सकल भय बिकल भुआला।।"

"सभय बिलोके लोग सब जानि जानकी भीरु। हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु॥"

अभ्यास प्रश्न

  • परशुराम को किस बात का क्रोध आया?
  • सभा में उपस्थित लोगों की प्रतिक्रिया क्या थी?
  • जनक और विश्वामित्र की सभा में क्या भूमिका थी?

उत्तर कुंजी

  • श्रीराम द्वारा शिव-धनुष भंग करने पर
  • वे भयभीत और चुप थे
  • जनक ने स्वयंवर के बारे में बताया, विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण का परिचय कराया

शब्दावली

  • भृगुपति - भृगुकुल के स्वामी
  • कराला - भयानक, डरावना
  • भुआला - राजा, महीप
  • सुभायँ - स्वभाव, आदत
  • चितवहिं - देखना, निरखना
  • खुटानी - समाप्त होना
  • बहोरि - फिर, पीछे
  • आसिष/असीस - आशीर्वाद
  • ढोटा - पुत्र, बेटा
  • जोटा - जोड़ा
  • लोचन - आँख
  • अनत - अन्यत्र
  • चापखंड - धनुष का टुकड़ा
  • रिस - क्रोध
  • बेगि - शीघ्र
  • जहँ - जहाँ
  • महि - पृथ्वी
  • लहि - तक
  • त्रास - भय
  • बिधि - विधि, ईश्वर
  • अरध निमेष - आधा पल
  • कलप - काल का एक विभाग
  • बिलोके - देखा
  • भीरु - भयभीत
  • भंजनिहारा - तोड़ने वाला
  • आयसु - आदेश
  • रिसाइ - क्रोध करना
  • कोही - क्रोधी
  • सहसबाहु - सहस्रबाहु
  • बिलगाउ - अलग होना
  • बिहाइ - छोड़कर
  • जैहहिं - जाएंगे
  • परसु - फरसा
  • परसुधरहिं - परशुराम
  • लरिकाईं - बाल्यावस्था
  • भृगुकुलकेतू - भृगुकुल के दीपक
  • तिपुरारि - शिव

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