कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का परिचय
कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार थे जिनका जन्म 1906 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। वे पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे और "नया जीवन" तथा "विकास" पत्रों का संपादन किया। स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी के कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर अनेक निबंध लिखे। उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए उन्हें 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया।
उनके संस्मरणात्मक निबंध-संग्रह जैसे "दीप जले शंख बजे", "जिंदगी मुसकरायी", "बाजे पायलिया के घुँघरू" आदि मानवतावादी दृष्टिकोण और जीवन-दर्शन के परिचायक हैं। उनका निधन 1995 में हुआ।
मुख्य बिंदु
- प्रमुख निबंधकार और पत्रकार
- स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय
- साहित्यिक निबंधों का संग्रह
- पद्म श्री पुरस्कार प्राप्तकर्ता
प्रश्न
- कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
- उनके निबंधों की मुख्य विशेषता क्या है?
- उन्होंने किन पत्रों का संपादन किया?
उत्तर कुंजी
- 1906 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में।
- मानवतावादी दृष्टिकोण और जीवन-दर्शन।
- नया जीवन और विकास पत्र।
निबंध "मैं और मेरा देश" का विश्लेषण
"मैं और मेरा देश" निबंध व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि व्यक्ति की पहचान केवल उसकी निजता से नहीं, बल्कि उसके परिवार, क्षेत्र और राष्ट्र से जुड़ी होती है। व्यक्ति के हर कार्य का प्रभाव उसके देश पर भी पड़ता है। लेखक इस निबंध में नागरिक के अधिकार, कर्तव्य, देश की उन्नति और कुशल नेतृत्वकर्ता की भूमिका पर भी विचार करता है।
लेखक का मानना है कि देश के लिए हर नागरिक महत्वपूर्ण है यदि वह देश के शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध को बनाए रखता है।
मुख्य बिंदु
- व्यक्ति और राष्ट्र का अविभाज्य संबंध
- नागरिक के अधिकार और कर्तव्य
- देश की उन्नति में नागरिक की भूमिका
- शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध का महत्व
प्रश्न
- निबंध "मैं और मेरा देश" का मुख्य विषय क्या है?
- लेखक के अनुसार देश के लिए नागरिक का क्या कर्तव्य है?
- शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध का क्या महत्व है?
उत्तर कुंजी
- व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध।
- देश के सम्मान और उन्नति के लिए कार्य करना।
- देश की शक्ति और संस्कृति की रक्षा करना।
निबंध "मैं और मेरा देश" का सारांश
लेखक अपने जन्मस्थान, परिवार, पड़ोस और नगर के अनुभवों से अपनी पहचान बनाता है। परन्तु जब उसे यह एहसास होता है कि देश की गुलामी के कारण वह कहीं भी अपमानित हो सकता है, तो उसके मन में मानसिक भूकंप आता है। यह भूकंप स्वर्गीय लाला लाजपत राय के अनुभव से प्रेरित है, जिन्होंने विदेशों की यात्रा के बाद भी भारत की गुलामी की लज्जा महसूस की।
लेखक बताता है कि व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपने देश की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करे। हर व्यक्ति चाहे वैज्ञानिक हो, धनिक हो या सामान्य नागरिक, देश के लिए कुछ न कुछ कर सकता है। जीवन को बहुमुखी दृष्टिकोण से देखते हुए लेखक कहता है कि युद्ध में लड़ने वालों के साथ-साथ रसद पहुँचाने वालों और जय बोलने वालों का भी महत्व होता है।
लेखक दो घटनाओं के माध्यम से देशभक्ति की भावना को समझाता है - एक जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ को फल भेंट किए और एक जापानी विद्यार्थी ने पुस्तकालय की पुस्तक से चित्र निकालने पर देश का अपमान किया। इससे स्पष्ट होता है कि हर नागरिक का देश के साथ गहरा संबंध होता है।
लेखक यह भी कहता है कि देश के प्रति सम्मान और कर्तव्य का पालन करना हर नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है। छोटे कार्य भी यदि भावना से किए जाएं तो वे महान होते हैं।
लेखक ने कमालपाशा और एक भारतीय किसान की कहानी के माध्यम से यह दिखाया है कि भावना का महत्व कार्य की महत्ता से अधिक होता है।
देश के प्रति नकारात्मक बातें करना और गंदगी फैलाना देश के शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध को चोट पहुँचाता है। चुनाव में सही व्यक्ति को वोट देना देश की उन्नति का मापदंड है।
प्रश्न
- लेखक ने मानसिक भूकंप की व्याख्या कैसे की है?
- देशभक्ति के लिए छोटे कार्यों का क्या महत्व है?
- देश के शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध को कैसे बनाए रखा जा सकता है?
उत्तर कुंजी
- लाला लाजपत राय के अनुभव से प्रेरित मानसिक जागरूकता।
- छोटे कार्य भी भावना से किए जाएं तो महान होते हैं।
- देश की नकारात्मक आलोचना न करना, स्वच्छता बनाए रखना, और चुनाव में सही मतदान करना।
निर्मल जीत सिंह सेखों का परिचय
निर्मल जीत सिंह सेखों का जन्म 17 जुलाई 1945 को पंजाब के लुधियाना के समीप हुआ था। बचपन से ही वे वायुयान और हवाई युद्ध के प्रति आकर्षित थे। उन्होंने खालसा हाई स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और मैट्रिक में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए। 1962 में दयालबाग इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन 1965 के युद्ध के बाद भारतीय वायुसेना में शामिल होने के लिए पढ़ाई छोड़ दी।
4 जून 1967 को उन्हें भारतीय वायुसेना में नियुक्ति मिली। वे "नैट" लड़ाकू विमान उड़ाने में निपुण थे। अक्टूबर 1968 में वे संख्या 18 स्क्वाड्रन "फ्लाइंग बुलेट्स" में शामिल हुए।
मुख्य बिंदु
- भारतीय वायुसेना के वीर पायलट
- 1967 में सेवा प्रारंभ
- नैट लड़ाकू विमान के विशेषज्ञ
- संख्या 18 स्क्वाड्रन के सदस्य
प्रश्न
- निर्मल जीत सिंह सेखों का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
- उन्होंने भारतीय वायुसेना में कब शामिल हुए?
- उनका मुख्य विमान कौन सा था?
उत्तर कुंजी
- 17 जुलाई 1945, पंजाब के लुधियाना के समीप।
- 4 जून 1967।
- नैट लड़ाकू विमान।
निर्मल जीत सिंह सेखों का वीर युद्ध
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में निर्मल जीत सिंह सेखों ने श्रीनगर में पाकिस्तानी वायुसेना के हमलों का बहादुरी से सामना किया। 14 दिसंबर 1971 को उन्होंने छह पाकिस्तानी सेबर फाइटर विमानों को रोकने और उनमें से कई को नष्ट करने का साहसिक कार्य किया। वे अकेले ही दुश्मन के विमानों का मुकाबला करते हुए अपनी जान की परवाह नहीं करते थे।
उनकी उम्र मात्र 26 वर्ष थी जब वे मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उन्हें भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
मुख्य बिंदु
- 1971 के युद्ध में बहादुरी
- श्रीनगर में हवाई सुरक्षा
- पाकिस्तानी विमानों का मुकाबला
- परम वीर चक्र पुरस्कार
प्रश्न
- निर्मल जीत सिंह सेखों ने 1971 के युद्ध में क्या किया?
- उनकी वीरता का मुख्य उदाहरण क्या है?
- उन्हें कौन सा सम्मान मिला?
उत्तर कुंजी
- पाकिस्तानी विमानों का मुकाबला किया और कई को नष्ट किया।
- अकेले दुश्मन के छह विमानों का सामना।
- परम वीर चक्र।
निर्मल जीत सिंह सेखों का सम्मान एवं विरासत
निर्मल जीत सिंह सेखों की वीरता को याद करते हुए भारतीय वायुसेना ने 1982 में उनकी सम्मान में विशेष डाक आवरण जारी किया। 2000 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया। उनकी प्रतिमा दिल्ली के एयरफोर्स म्यूजियम पालम में स्थापित है। उनकी वीरता और उड़ान कौशल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
मुख्य बिंदु
- विशेष डाक आवरण और डाक टिकट जारी
- प्रतिमा का स्थापना
- युवा पायलटों के लिए प्रेरणा
प्रश्न
- निर्मल जीत सिंह सेखों के सम्मान में कौन-कौन से स्मारक बनाए गए?
- उनकी वीरता से युवाओं को क्या सीख मिलती है?
उत्तर कुंजी
- डाक आवरण, डाक टिकट, और प्रतिमा।
- वीरता, समर्पण और साहस।
निर्मल जीत सिंह सेखों का प्रशस्ति पत्र
फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों (10877), फ्लाइंग ब्रांच (पायलट) श्रीनगर में स्थित 'नैट डिटैचमेंट' के पायलट थे, जहाँ उन्हें पाकिस्तानी हवाई हमले से घाटी की रक्षा करनी थी। युद्ध के शुरुआती दौर से ही वे और उनके सहयोगी पाकिस्तानी विमानों द्वारा एक के बाद एक हो रहे तूफानी हमलों का बहादुरी और दृढ़ता से सामना करते हुए नैट एयरक्राफ्ट की उत्तम साख को कायम रखे हुए थे।
14 दिसंबर 1971 को श्रीनगर हवाई पट्टी पर दुश्मन के छह सेबर एयरक्राफ्ट के एक दल द्वारा हमला किया गया था। उस समय फ्लाइंग ऑफिसर सेखों रेडिनेस ड्यूटी पर थे। तत्काल ही दुश्मन के कम से कम 6 लड़ाकू विमान ऊपर मँडराने लगे और हवाई पट्टी पर ताबड़तोड़ बमबारी शुरू कर दी। इस हमले के दौरान जानलेवा खतरे के बावजूद फ्लाइंग ऑफिसर सेखों ने उड़ान भरी और तुरंत ही दो हमलावर सेबर फाइटर एयरक्राफ्ट को युद्ध में उलझा लिया।
इस लड़ाई में यह हुआ कि उन्होंने एक एयरक्राफ्ट को मार गिराया तथा दूसरे को आग के हवाले कर दिया। इतने में दूसरे सेबर लड़ाकू विमान संकट में फँसे अपने साथियों की सहायता के लिए आ गए और उन्होंने फिर फ्लाइंग ऑफिसर सेखों के 'नैट एयरक्राफ्ट' को घेर लिया, इस बार एक के पीछे चार थे।
हालाँकि बराबरी की टक्कर न होते हुए भी फ्लाइंग ऑफिसर सेखों ने अकेले ही दुश्मनों को पूरी टक्कर दी। इस लड़ाई में जो कि एक वृक्ष जितनी ऊँचाई पर लड़ी जा रही थी, सेखों ने अपनी पूरी वीरता दिखाई, लेकिन अंत में अधिक संख्या ने उन्हें मात दे दी। उनका विमान गिरकर ध्वस्त हो गया और वे वीरगति को प्राप्त हो गए।
ऐसे समय में जब मृत्यु निश्चित थी, फ्लाइंग ऑफिसर सेखों ने सर्वोच्च वीरता, हवाई रण-कौशल और असाधारण संकल्प का परिचय अपने निहित कर्तव्यों से भी ऊपर उठकर देते हुए वायुसेना की परंपराओं को नई ऊँचाइयाँ दीं।
गजट ऑफ इंडिया नोटिफिकेशन
स्रोत-वीरगाथा-परम वीर चक्र विजेताओं की कहानियाँ, रा.शै.अ.प्र.प.
शब्द-संपदा
- संचित - इकट्ठा किया हुआ, जमा किया हुआ
- मानस - मन, चित्त
- तेजस्वी - शक्तिशाली, प्रभावशाली
- ठसक - चाल-ढाल का गर्व
- धनिक - धनवान
- रसद - अनाज, भत्ता
- दाद देना - न्यायोचित प्रशंसा करना
- साक्षी - गवाही
- लांछित - कलंकित
- हँडिया - मिट्टी का बर्तन
- सुतली - डोरी
- चौपाल - गाँव की बैठक
- सघन - घना, ठोस
- तरेड़ - दरार
- ज़ीना - सीढ़ी