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घर-की-याद

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Chapter 12 : घर की याद

Ch 12

HINDI

CLASS 9

भवानीप्रसाद मिश्र का परिचय

भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म सन् 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) में हुआ था। वे स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय कवि थे और हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते हैं। उनकी प्रमुख काव्य रचनाओं में गीत-फ़रोश, खुशबू के शिलालेख, चकित है दुख, अँधेरी कविताएँ, बुनी हुई रस्सी, कवितांतर, शतदल, गांधी-पंचशती, त्रिकाल संध्या आदि शामिल हैं। 'बुनी हुई रस्सी' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला।

उन्होंने राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में कार्य किया, हैदराबाद से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका 'कल्पना' का संपादन किया और आकाशवाणी के हिंदी कार्यक्रमों से जुड़े। उन्होंने संपूर्ण गांधी वाङ्मय का संपादन भी किया। उनका निधन सन् 1985 में हुआ।

मुख्य बिंदु

  • स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय कवि
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता
  • राष्ट्रभाषा प्रचार समिति और आकाशवाणी से जुड़ाव
  • प्रमुख काव्य संग्रह: बुनी हुई रस्सी, त्रिकाल संध्या आदि

प्रश्न

  • भवानीप्रसाद मिश्र की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
  • उन्होंने किस संस्था में कार्य किया था?
  • उनके जीवन में स्वाधीनता आंदोलन का क्या महत्व था?

उत्तर कुंजी

  • गीत-फ़रोश, खुशबू के शिलालेख, चकित है दुख, अँधेरी कविताएँ, बुनी हुई रस्सी आदि।
  • राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, आकाशवाणी, पत्रिका कल्पना।
  • वे 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय थे और जेल भी गए।

"घर की याद" कविता का विश्लेषण

"घर की याद" भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा लिखित एक भावपूर्ण कविता है, जो उनके कारावास के समय की स्मृतियों और परिवार के प्रति उनकी गहरी संवेदना को दर्शाती है। इस कविता में कवि अपने घर, परिवार और माँ-पिता की याद में डूबा हुआ है। सावन के बादलों के माध्यम से वह परिवार को संदेश भेजता है कि वे उसे सांत्वना दें और जेल के दुखों का वर्णन न करें।

मुख्य बिंदु

  • कवि की जेल में बिताई गई पीड़ा और परिवार की याद
  • सावन के बादल के माध्यम से संदेश
  • परिवार के सदस्यों का परिचय और उनके प्रति प्रेम
  • माँ और पिता की भूमिका और उनके व्यक्तित्व का चित्रण
  • भावनात्मक और संवेदनशील अभिव्यक्ति

पाठ्य प्रमाण

"बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है, घर कि मुझसे दूर है जो, घर खुशी का पूर है जो।"

"माँ कि जिसकी गोद में सिर, रख लिया तो दुख नहीं फिर।"

प्रश्न

  • कवि ने "घर की याद" में किस प्रकार अपने परिवार को याद किया है?
  • कविता में सावन के बादल का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?
  • माँ और पिता का कवि के जीवन में क्या स्थान है?

उत्तर कुंजी

  • कवि ने परिवार के सदस्यों को एक-एक करके याद किया है और उनके प्रति प्रेम व्यक्त किया है।
  • सावन के बादल सांत्वना और प्रेम का संदेश देते हैं।
  • माँ की गोद दुखों से शांति देती है और पिता साहस व दृढ़ता के प्रतीक हैं।

कविता के प्रमुख अलंकार एवं काव्य सौंदर्य

"घर की याद" कविता में कई अलंकारों का प्रयोग हुआ है जो इसे भावपूर्ण और प्रभावशाली बनाते हैं।

मुख्य बिंदु

  • अनुप्रास अलंकार: "बहुत पानी गिर रहा है" में 'प' और 'ग' की पुनरावृत्ति।
  • उपमा अलंकार: पिता की तुलना वज्र-भुज और नवनीत-सा हृदय से।
  • मानवीकरण: बादल को संदेशवाहक बनाना।
  • चित्रात्मक भाषा: सावन की बारिश, घर का दृश्य।

पाठ्य प्रमाण

"पिताजी भोले बहादुर, वज्र-भुज नवनीत-सा उर।"

"क्योंकि बादल की अँधेरी, है अभी तक भी घनेरी।"

प्रश्न

  • कविता में कौन-कौन से अलंकार पाए जाते हैं?
  • पिता का वर्णन किस अलंकार के माध्यम से किया गया है?

उत्तर कुंजी

  • अनुप्रास, उपमा, मानवीकरण आदि अलंकार।
  • उपमा अलंकार द्वारा पिता की तुलना वज्र-भुज और नवनीत-सा हृदय से की गई है।

प्रश्नोत्तर एवं अभ्यास प्रश्न

स्तर 1 – सरल

  • भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म कहाँ हुआ था?
  • "घर की याद" कविता किस समय लिखी गई थी?
  • कवि ने अपने पिता का वर्णन कैसे किया है?

स्तर 2 – मध्यम

  • "घर की याद" कविता में सावन के बादल का क्या महत्व है?
  • कविता में परिवार के सदस्यों के प्रति कवि की भावनाएँ कैसे प्रकट हुई हैं?

स्तर 3 – कठिन

  • "घर की याद" कविता में मानवीकरण और उपमा अलंकार का विश्लेषण कीजिए।
  • कवि के जीवन और कविता के संदर्भ में स्वाधीनता आंदोलन का महत्व समझाइए।

उत्तर कुंजी

  • भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में हुआ था।
  • यह कविता 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल में रहते हुए लिखी गई थी।
  • पिता को भोले बहादुर, वज्र-भुज नवनीत-सा हृदय वाला बताया गया है।
  • सावन के बादल सांत्वना और प्रेम का प्रतीक हैं।
  • कवि ने परिवार के सदस्यों को प्रेम और संवेदना के साथ याद किया है।
  • मानवीकरण में बादल को संदेशवाहक बनाया गया है और उपमा में पिता की तुलना कठोरता और कोमलता से की गई है।
  • स्वाधीनता आंदोलन में कवि की भागीदारी ने उनकी रचनाओं को गहरा सामाजिक और राष्ट्रीय संदर्भ दिया।

शब्द-संपदा

  • घनेरा/घना - गाढ़ा, गुंजान, जिसके अवयव पास-पास सटे हों।
  • तिर/तिरना/तरना - तैरना, उतराना, पार होना।
  • परिताप - अत्यधिक दुख, शोक, भय, बहुत गर्मी।
  • चतुर्दिक् - चारों ओर, चौखूँट।
  • वज्र - बहुत कठोर, जिस पर किसी का प्रभाव न पड़े।
  • नवनीत - ताजा मक्खन।
  • उर - हृदय, श्रेष्ठ, उत्तम, मन।
  • झंझा - तेज हवा, आँधी-पानी।
  • लरजता/लरजना - काँपना, हिलना-डुलना।
  • मूठ - मुट्ठी-भर चीज, कब्जा।
  • अभागा - भाग्यहीन।
  • धीर - दृढ़, गंभीर।
  • झारी - पानी परसने वाला बर्तन।
  • बेला - एक सुगंधित फूल, मोगरा।
  • फलानी/फलाना/फलाँ - कोई आदिष्ट (व्यक्ति या वस्तु)।
  • निहायत - बहुत ज्यादा, अत्यधिक।
  • लुनाई - सुंदरता, सलोनापन।
  • क्षितिज - वह स्थान जहाँ धरती और आकाश मिलते हैं।
  • तृषा - तीव्र इच्छा, अभिलाषा।
  • अश्रु - आँसू।
  • हास - हँसने की क्रिया, प्रसन्नता।
  • क्लेश - दुख, पीड़ा।
  • बड़ - बरगद, वट।
  • उमग - उल्लास, जोश।
  • ख़म - झुका हुआ, टेढ़ा।
  • विरस - नीरस, अप्रिय।
  • कातने/कातना - रुई या ऊन से धागा निकालना।
  • अस्त - डूबा हुआ, समाप्त।

"तब याद तुम्हारी आती है" कविता

यह कविता रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित है। इसमें कवि ने सुबह की ताजगी, चिड़ियों के गीत, ठंडी हवा और चाँद की रोशनी के माध्यम से अपने प्रिय की याद को अभिव्यक्त किया है। यह कविता प्रेम और स्मृति की भावनाओं से ओतप्रोत है।

मुख्य बिंदु

  • प्रकृति के माध्यम से स्मृति की अभिव्यक्ति
  • सुबह, चिड़ियाँ, हवा, चाँद के चित्रण
  • प्रेम और श्रद्धा की भावना

प्रश्न

  • कवि ने किस प्रकार प्रकृति का उपयोग अपनी स्मृति व्यक्त करने के लिए किया है?
  • कविता में "जग के सिरजनहार प्रभो" का क्या अर्थ है?

उत्तर कुंजी

  • प्रकृति के विभिन्न तत्वों जैसे चिड़ियाँ, हवा, चाँद के माध्यम से स्मृति को व्यक्त किया गया है।
  • यह भगवान या सृष्टिकर्ता के लिए एक विनम्र पुकार है।

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घर की याद