पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का परिचय
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के एक कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार और हास्य व्यंग्यकार थे। विशेष रूप से निबंध लेखन में उनकी ख्याति अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु
- प्रमुख रचनाएँ: पंच-पात्र, पद्म-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने (निबंध संग्रह), अश्रुदल, शतदल (काव्य), झलमला, त्रिवेणी (कहानी संग्रह), विश्व साहित्य, हिंदी कहानी साहित्य, हिंदी साहित्य विमर्श, हिंदी उपन्यास साहित्य (आलोचना)।
- संपादन कार्य: सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन।
- लेखन विषय: अध्यात्म, समाज-सुधार, लोकजीवन।
- विशेषता: भारतीय कृषि एवं सामाजिक संबंधों का तार्किक मूल्यांकन।
- साहित्य में भारतीय और पाश्चात्य सिद्धांतों का सामंजस्य।
- मृत्यु: सन् 1971।
पाठ्य प्रमाण
"पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने अपने लेखन में अध्यात्म, समाज- सुधार, लोकजीवन को प्रमुखता दी है। उन्होंने अपने निबंधों में भारतीय कृषि एवं सामाजिक संबंधों का तार्किक मूल्यांकन और विश्लेषण किया है।"
अभ्यास प्रश्न
- पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म कहाँ और कब हुआ था?
- उनकी प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
- उनके निबंध लेखन की विशेषता क्या है?
उत्तर कुंजी
- खैरागढ़, राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ में सन् 1894 में।
- पंच-पात्र, पद्म-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने, अश्रुदल, शतदल, झलमला, त्रिवेणी आदि।
- अध्यात्म, समाज-सुधार, लोकजीवन पर तार्किक मूल्यांकन।
शब्दावली
- निबंधकार: जो निबंध लिखता है।
- आलोचक: साहित्य या कला की समीक्षा करने वाला।
- हास्य व्यंग्यकार: हास्य और व्यंग्य से लेखन करने वाला।
"क्या लिखूँ?" निबंध का विश्लेषण
"क्या लिखूँ?" निबंध में पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने निबंध लेखन की प्रक्रिया को सरल और रोचक ढंग से समझाया है। उन्होंने निबंध लेखन में आने वाली कठिनाइयों, विषय चयन, सामग्री संग्रह और शैली निर्धारण पर विचार प्रस्तुत किए हैं।
मुख्य बिंदु
- लेखन की मानसिक स्थिति और आवेग।
- विषय चयन की कठिनाई: "दूर के ढोल सुहावने" और "समाज-सुधार" विषय।
- निबंध के दो प्रधान अंग: सामग्री और शैली।
- रूपरेखा बनाना और निबंध की भाषा में प्रवाह।
- अंग्रेजी निबंध लेखन की स्वच्छंद शैली।
- अमीर खुसरो की कहानी और उसकी प्रेरणा।
- दूर के ढोल की मधुरता और समाज-सुधार की निरंतर आवश्यकता।
पाठ्य प्रमाण
"मुझे आज लिखना ही पड़ेगा। अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंध लेखक ए.जी. गार्डिनर का कथन है कि लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है।"
"दूर के ढोल सुहावने होते हैं, क्योंकि उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती।"
हल किए गए उदाहरण
लेखक ने बताया कि निबंध लिखने के लिए विषय की चिंता नहीं होती, बल्कि मन के भावों का प्रवाह आवश्यक होता है। उन्होंने "दूर के ढोल सुहावने" विषय पर निबंध की रूपरेखा बनाने की कठिनाई और शैली के महत्व पर चर्चा की।
अभ्यास प्रश्न
- लेखक के अनुसार निबंध लेखन के लिए कौन-सी मानसिक स्थिति आवश्यक है?
- "दूर के ढोल सुहावने" विषय पर लेखक ने क्या विचार व्यक्त किए हैं?
- निबंध के दो प्रधान अंग कौन-कौन से हैं?
- अंग्रेजी निबंध लेखन की विशेषता क्या है?
- अमीर खुसरो की कहानी का निबंध लेखन में क्या महत्व है?
उत्तर कुंजी
- लेखन की विशेष मानसिक स्थिति जिसमें मन में उमंग और हृदय में स्फूर्ति हो।
- दूर के ढोल की ध्वनि दूर से मधुर लगती है क्योंकि उसकी कर्कशता पास नहीं पहुँचती।
- सामग्री और शैली।
- स्वच्छंद, मन की अनुभूति पर आधारित, बिना कल्पना या तर्क के।
- अमीर खुसरो की कहानी से प्रेरणा लेकर लेखक ने दो विषयों को एक निबंध में समाहित करने का प्रयास किया।
शब्दावली
- स्फूर्ति: उत्साह, ऊर्जा।
- आवेग: अचानक उत्पन्न भावना।
- कर्कशता: कठोर और तीव्र ध्वनि।
- रूपरेखा: योजना, ढांचा।
- स्वच्छंद: स्वतंत्र, बिना बंधन के।
- अभिव्यक्ति: भावों का प्रकट होना।
"क्या लिखूँ?" निबंध का विस्तृत विश्लेषण
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने "क्या लिखूँ?" निबंध में निबंध लेखन की जटिलताओं और रचनात्मक प्रक्रिया को आत्मपरक शैली में प्रस्तुत किया है। उन्होंने निबंध लेखन के लिए आवश्यक मानसिक स्थिति, विषय चयन की कठिनाई, सामग्री संग्रह, रूपरेखा निर्माण और शैली निर्धारण पर गहन विचार किया है।
मुख्य बिंदु
- लेखन की मानसिक स्थिति: लेखक को मन में उमंग, हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग का अनुभव होना चाहिए।
- विषय चयन की समस्या: "दूर के ढोल सुहावने" और "समाज-सुधार" जैसे विषयों पर लिखने की कठिनाई।
- निबंध के दो प्रधान अंग: सामग्री (विचार-समूह) और शैली (भाषा का प्रवाह)।
- रूपरेखा बनाना: निबंध की रूपरेखा बनाना आवश्यक, परंतु लेखक को इसकी कठिनाई का अनुभव।
- शैली निर्धारण: छोटे-छोटे वाक्य, भाषा में प्रवाह, अलंकारों और मुहावरों का समावेश।
- अंग्रेजी निबंध लेखन की स्वच्छंद शैली: लेखक की सच्ची अनुभूति और भावों की अभिव्यक्ति।
- अमीर खुसरो की कहानी से प्रेरणा लेकर दो विषयों को एक निबंध में समाहित करने का प्रयास।
- दूर के ढोल की मधुरता: दूर से सुनाई देने वाली कर्कश ध्वनि भी मधुर प्रतीत होती है।
- समाज-सुधार की निरंतर आवश्यकता: इतिहास में सुधारकों का सतत प्रवाह।
- जीवन की प्रगतिशीलता: पुराने सुधार दोष बन जाते हैं और नए सुधार होते हैं।
पाठ्य प्रमाण
"मुझे आज लिखना ही पड़ेगा। अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंध लेखक ए.जी. गार्डिनर का कथन है कि लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है।"
"दूर के ढोल सुहावने होते हैं, क्योंकि उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती।"
"भारत के इतिहास में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी जैसे सुधारक हुए हैं।"
अभ्यास प्रश्न
- लेखन की मानसिक स्थिति का लेखक ने किस प्रकार वर्णन किया है?
- "दूर के ढोल सुहावने" विषय पर लेखक के विचार क्या हैं?
- निबंध के दो प्रधान अंग कौन से हैं और उनका महत्व क्या है?
- अंग्रेजी निबंध लेखन की शैली में क्या विशेषताएँ होती हैं?
- समाज-सुधार के विषय में लेखक ने क्या कहा है?
- जीवन में सुधारों और दोषों के संबंध में लेखक की क्या दृष्टि है?
उत्तर कुंजी
- लेखन के समय मन में उमंग, हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग उत्पन्न होना आवश्यक है।
- दूर के ढोल की ध्वनि दूर से मधुर लगती है क्योंकि उसकी कर्कशता पास नहीं पहुँचती और वह आनंद, प्रेम और उत्सव का प्रतीक है।
- सामग्री और शैली; सामग्री विचारों का समूह है और शैली भाषा के प्रवाह को दर्शाती है।
- स्वच्छंद, मन की सच्ची अनुभूति पर आधारित, बिना कल्पना या तर्क के, जिसमें लेखक की भावनाएँ प्रकट होती हैं।
- समाज-सुधार आवश्यक है क्योंकि जीवन में नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं और सुधारों की निरंतर आवश्यकता होती है।
- पुराने सुधार दोष बन जाते हैं और नए सुधार होते रहते हैं, यही जीवन की प्रगतिशीलता है।
शब्दावली
- स्फूर्ति - फुरती, उत्तेजना, कंपन, उछलना, मन में प्रकट होना।
- आवेग - बिना सोचे-विचारे कुछ कर बैठने की अंतःप्रेरणा, झोंक, अशांति, उतावली।
- यथार्थता/यथार्थ - सत्य, प्रकृत, उचित।
- उत्थित - उठा हुआ, उठता हुआ, बल-वैभव में बढ़ा हुआ, उत्पन्न।
- रहस्य - गुप्तभेद, गोपनीय विषय, मर्म।
- विज्ञों/विज्ञ - जानकार, समझदार, विद्वान।
- सम्मति - सहमति, स्वीकृति, अनुमति, राय, मत।
- अनुसंधान - अन्वेषण, खोज, जाँच-पड़ताल।
- विश्वकोश - वह ग्रंथ जिसमें संसार के सारे विषयों का विवरण हो।
- दुर्बोधता/दुर्बोध - जो शीघ्र समझ में न आए, गूढ़।
- गांभीर्य - गंभीरता, गहराई, चित्त की स्थिरता।
- गुत्थी - उलझन, कठिनाई, तागे आदि में उलझने से पड़ी हुई गाँठ।
- अज्ञों/अज्ञ - ज्ञानरहित, नासमझ, अचेतन।
- पद्धति - प्रथा, परिपाटी, मार्ग, पथ, रास्ता, प्रणाली।
- पाश्चात्य - पश्चिम का, बाद का, पच्छिमी।
- आख्यायिका - सिलसिलेवार कहानी या वृत्तांत, शिक्षा देने वाली कल्पित कथा।
- उदात्त - ऊँचा, महान, श्रेष्ठ, उदार।
- अभिव्यक्ति - व्यक्त, प्रकट होना, प्रकाशन।
- अनुसरण - पीछे चलना, अनुकरण, अभ्यास।
- समावेश - साथ रहना, शामिल होना, मिलना।
- संध्या - शाम का वह समय जब दिन के दो भागों का मेल होता है।
- अंकित - लिखित, चिह्नित, चित्रित।
- कोलाहल - बहुत से लोगों के एक साथ बोलने से होने वाला शोर।
- विषाद - अवसाद, उदासी, तंद्रा।
- कलरव - मधुर ध्वनि, कोमल।