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आखिरी-चट्टान-तक

CLASS 9 . HINDI . गंगा . आखिरी चट्टान-तक

Chapter 5 : आखिरी चट्टान तक

Ch 5

HINDI

CLASS 9

मोहन राकेश का परिचय

मोहन राकेश हिंदी साहित्य के एक बहुमुखी रचनाकार थे जिनका जन्म 1925 में अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी लेखन, यात्रा-वृत्तांत आदि अनेक विधाओं में रचनाएँ कीं। उनकी प्रमुख रचनाओं में "आषाढ़ का एक दिन", "लहरों के राजहंस", "आधे-अधूरे" (नाटक), "अंधेरे बंद कमरे", "अंतराल", "न आने वाला कल" (उपन्यास), "क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ", "नए बादल", "वारिस तथा अन्य कहानियाँ" (कहानी-संग्रह), "मोहन राकेश की डायरी" (डायरी लेखन), "आखिरी चट्टान तक" (यात्रा-वृत्तांत) शामिल हैं।

उनके लेखन में भावों की गहराई के साथ-साथ आधुनिक जीवन की जटिलताओं और मानवीय संवेदनाओं का सूक्ष्म अंकन मिलता है। उन्हें "आषाढ़ का एक दिन" नाटक के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने सारिका नामक हिंदी पत्रिका का संपादन भी किया। मोहन राकेश का निधन 1972 में हुआ।

मुख्य बिंदु

  • बहुमुखी साहित्यकार
  • कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी, यात्रा-वृत्तांत में रचनाएँ
  • आधुनिक जीवन की जटिलताओं का चित्रण
  • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त
  • सारिका पत्रिका के संपादक

प्रमाण / उदाहरण

"आषाढ़ का एक दिन", "आखिरी चट्टान तक" आदि उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।

अभ्यास प्रश्न

  • मोहन राकेश की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
  • उनके लेखन की विशेषताएँ क्या हैं?
  • मोहन राकेश को किस नाटक के लिए पुरस्कार मिला?

उत्तर कुंजी

  • प्रमुख रचनाएँ: आषाढ़ का एक दिन, आखिरी चट्टान तक, आधे-अधूरे आदि।
  • विशेषताएँ: भावों की गहराई, आधुनिक जीवन की जटिलताएँ, मानवीय संवेदनाएँ।
  • पुरस्कार: आषाढ़ का एक दिन के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार।

शब्दावली

  • बहुमुखी: अनेक प्रकार के कार्य करने वाला।
  • डायरी: दैनिक जीवन के अनुभवों का लेखन।
  • यात्रा-वृत्तांत: यात्रा के अनुभवों का वर्णन।

आखिरी चट्टान तक का सारांश

"आखिरी चट्टान तक" मोहन राकेश का एक यात्रा-वृत्तांत है जिसमें उन्होंने कन्याकुमारी की यात्रा के अनुभवों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है। लेखक ने बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर और अरब सागर के संगम स्थल पर स्थित कन्याकुमारी के प्राकृतिक सौंदर्य का विस्तार से वर्णन किया है। यात्रा के दौरान लेखक ने समुद्र के किनारे की चट्टानों, सुनहरे सूर्योदय और सूर्यास्त, रंग-बिरंगी रेत, समुद्री जीवन और स्थानीय लोगों के जीवन को अपने मनोभावों के साथ चित्रित किया है।

लेखक की भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और चित्रात्मक है, जिससे पाठक को ऐसा अनुभव होता है जैसे वह स्वयं यात्रा कर रहा हो। यह यात्रा-वृत्तांत प्रकृति की भव्यता और मानव मन की गहन अनुभूतियों को एक साथ प्रस्तुत करता है।

मुख्य बिंदु

  • कन्याकुमारी के प्राकृतिक दृश्य
  • समुद्र के तीनों सागरों का संगम
  • सूर्योदय और सूर्यास्त का वर्णन
  • समुद्री तट की रंगीन रेत और जीवन
  • लेखक के मनोभाव और आत्मिक खोज

प्रमाण / उदाहरण

"केप होटल के आगे बने बाथ टैंक के बाईं तरफ, समुद्र के अंदर से उभरी स्याह चट्टानों में से एक पर खड़ा होकर मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।"

अभ्यास प्रश्न

  • "आखिरी चट्टान तक" यात्रा-वृत्तांत का मुख्य विषय क्या है?
  • लेखक ने कन्याकुमारी के किस प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया है?
  • लेखक की भाषा की विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर कुंजी

  • मुख्य विषय: कन्याकुमारी की यात्रा और प्राकृतिक सौंदर्य।
  • प्राकृतिक सौंदर्य: समुद्र के तीन सागर, चट्टानें, रंगीन रेत, सूर्योदय-सूर्यास्त।
  • भाषा: सहज, प्रवाहपूर्ण, चित्रात्मक।

शब्दावली

  • संगम: मिलन स्थल।
  • स्याह: काला।
  • क्षितिज: वह रेखा जहाँ आकाश और धरती मिलते हैं।
  • संध्या: सूर्यास्त का समय।
  • टीला: बालू का ढेर।

महत्वपूर्ण पंक्तियाँ एवं व्याख्या

पंक्ति: "तीनों के संगम-स्थल-सी वह चट्टान, जिस पर कभी स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगायी थी।"

व्याख्या: यह पंक्ति कन्याकुमारी की उस चट्टान का वर्णन करती है जहाँ तीन समुद्र मिलते हैं और जो स्वामी विवेकानंद की समाधि स्थल भी है। यह चट्टान स्थिरता और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।

पंक्ति: "सूर्य का गोला पानी की सतह से छू गया। पानी पर दूर तक सोना-ही-सोना ढुल आया।"

व्याख्या: यह पंक्ति सूर्यास्त के दृश्य को दर्शाती है जहाँ सूर्य की किरणें समुद्र की सतह पर सोने की तरह चमक रही हैं, जो प्रकृति की सुंदरता को उजागर करती है।

अभ्यास प्रश्न

  • स्वामी विवेकानंद की समाधि वाली चट्टान का क्या महत्व है?
  • सूर्यास्त के वर्णन में लेखक ने कौन-कौन से भाव व्यक्त किए हैं?

उत्तर कुंजी

  • महत्व: आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व की चट्टान।
  • भाव: प्रकृति की सुंदरता, शांति, और समय के परिवर्तन का अनुभव।

शब्द-संपदा

  • स्याह/सियाह: काला, श्याम।
  • चट्टान: शिला।
  • समाधिस्थ/समाधि: समाधि में स्थित, मनोयोग, तपस्या।
  • चेतना: बुद्धि-विवेक से काम लेना, सावधान होना, होश में आना।
  • क्षितिज: वह स्थान जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखाई देते हैं, दृष्टि-सीमा।
  • सिहरन: कंपन, सिहरने की क्रिया।
  • पृष्ठभूमि: पहले की बातें, पीछे की भूमि या दृश्य।
  • झुरमुट: समूह, मंडली, पास-पास उगे पेड़ या झाड़।
  • बीहड़: ऊबड़-खाबड़, विकट, विभक्त।
  • मद्धिम/मद्धम: मध्यम, कम अच्छा, मंदा।
  • महुआ/महुवा: एक प्रसिद्ध पेड़ जिसके फूल, फल खाने और लकड़ी ईंधन तथा इमारती काम में आते हैं।
  • सीपियाँ/सीपी/सीप: शंख, जलचर प्राणी जिसका शरीर दोहरे खोल के भीतर छिपा होता है।
  • दार्शनिक: दर्शनशास्त्र का जानकार, तत्ववेत्ता।
  • सिर धुनना: शोक, पश्चाताप आदि के वेग से सिर पीटना।
  • ओट: आड़, रोक, शरण।
  • अर्घ्य: पूजा में देने योग्य वस्तु।
  • कडल-काक: पक्षियों की एक प्रजाति।
  • बाइनाक्यूलर्ज/बाइनाक्यूलर: दूरबीन।
  • सैंड हिल: बालू का टीला।
  • सुरमई: हल्का नीला।
  • बे-लाग: खरा, दो टूक बात।

HINDI — ALL CHAPTERS

1

दो बैलों की कथा

2

क्या लिखूँ?

3

संवादहीन

4

ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)

5

आखिरी चट्टान तक

6

रीढ़ की हड्डी

7

मैं और मेरा देश

8

पद

9

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

10

भारति, जय, विजयकरे!

11

झाँसी की रानी

12

घर की याद