CLASS 8 . HINDI . मल्हार . कदम मिलाकर-चलना-होगा-अटल-बिहारी-बाजपेयी
Chapter 7 : कदम मिलाकर चलना होगा (अटल बिहारी बाजपेयी )
Ch 7
HINDI
CLASS 8
कदम मिलाकर चलना होगा का सारांश
यह कविता भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं प्रसिद्ध कवि अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा रचित है। इस कविता में जीवन की कठिनाइयों, संघर्षों और बाधाओं के बावजूद एकजुट होकर, धैर्य और साहस के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया गया है। कवि ने जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे प्रलय, बलिदान, अपमान, सम्मान, जीत, हार, और प्रेम को छुआ है और बताया है कि इन सबके बीच कदम मिलाकर चलना आवश्यक है।
कविता में बार-बार "कदम मिलाकर चलना होगा" की पंक्ति दोहराई गई है, जो एकता और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता को दर्शाती है। जीवन के कठिन मार्गों पर भी हमें मिलकर, हँसते हुए, अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा।
कवि परिचय
अटल बिहारी वाजपेयी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री थे और एक प्रसिद्ध कवि एवं लेखक भी थे। उनकी कविताओं में देशभक्ति, जीवन के संघर्ष और मानवीय मूल्यों की गहरी झलक मिलती है। वे सरल और प्रभावशाली भाषा शैली के लिए जाने जाते हैं। उनकी कविताएँ प्रेरणा और उत्साह से भरपूर होती हैं।
काव्य सौंदर्य एवं अलंकार
इस कविता में कई अलंकारों का प्रयोग हुआ है जो इसे और भी प्रभावशाली बनाते हैं।
- अनुप्रास अलंकार: "पाँवों के नीचे अंगारे", "सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ" में शब्दों की पुनरावृत्ति से छंद में लय बनी है।
- उपमा अलंकार: "पावस बनकर ढलना होगा" में जीवन को वर्षा के समान बताया गया है जो सब कुछ समेट लेता है।
- यमक अलंकार: "जलना होगा, गलना होगा" में समान ध्वनि दोहराई गई है।
- पुनरुक्ति: "कदम मिलाकर चलना होगा" पंक्ति बार-बार दोहराई गई है, जो कविता का मुख्य भाव व्यक्त करती है।
केंद्रीय भाव एवं विषय
कविता का मुख्य विषय जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों के बीच एकजुट होकर आगे बढ़ने का संदेश है। यह एकता, धैर्य, साहस, बलिदान और समर्पण की महत्ता को दर्शाती है। कवि ने बताया है कि चाहे कितनी भी बाधाएँ आएं, हमें मिलकर, हँसते हुए, अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा।
महत्वपूर्ण उद्धरण एवं पंक्तियों की व्याख्या
"कदम मिलाकर चलना होगा" – यह पंक्ति कविता का मूल मंत्र है, जो एकता और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता को दर्शाती है।
"निज हाथों से हँसते-हँसते, आग लगा कर जलना होगा" – इसका अर्थ है कि अपने ही प्रयासों से, अपने संघर्षों को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना होगा।
"उन्नत मस्तक, उभरा सीना, पीड़ाओं में पलना होगा" – कठिनाइयों के बावजूद आत्मविश्वास और साहस बनाए रखना होगा।
"सब कुछ देकर कुछ न माँगते, पावस बनकर ढलना होगा" – निःस्वार्थ भाव से समर्पित होकर, बिना किसी स्वार्थ के, जीवन को दूसरों के लिए समर्पित करना होगा।
अभ्यास प्रश्न
स्तर 1 – सरल
- कविता का मुख्य संदेश क्या है?
- "कदम मिलाकर चलना होगा" पंक्ति का क्या अर्थ है?
- अटल बिहारी वाजपेयी कौन थे?
स्तर 2 – मध्यम
- कविता में जीवन की किन-किन कठिनाइयों का उल्लेख है?
- कविता में प्रयुक्त किसी दो अलंकारों का उदाहरण दें।
- कविता के केंद्रीय भाव को विस्तार से समझाइए।
स्तर 3 – कठिन
- कविता में "पावस बनकर ढलना होगा" पंक्ति का क्या अर्थ है? इसे अपने शब्दों में समझाइए।
- कविता के माध्यम से एकता और समर्पण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
- अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं में देशभक्ति की झलक कैसे मिलती है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर कुंजी
स्तर 1 – सरल
- कविता का मुख्य संदेश: जीवन की कठिनाइयों के बावजूद एकजुट होकर आगे बढ़ना।
- "कदम मिलाकर चलना होगा" का अर्थ: सभी को मिलकर, एक साथ कदम बढ़ाना होगा।
- अटल बिहारी वाजपेयी: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध कवि।
स्तर 2 – मध्यम
- जीवन की कठिनाइयाँ: प्रलय, बलिदान, अपमान, सम्मान, जीत-हार आदि।
- अलंकार उदाहरण: अनुप्रास (पाँवों के नीचे अंगारे), उपमा (पावस बनकर ढलना)।
- केंद्रीय भाव: एकता, धैर्य, साहस और समर्पण से जीवन की बाधाओं को पार करना।
स्तर 3 – कठिन
- "पावस बनकर ढलना होगा" का अर्थ: जीवन को निःस्वार्थ भाव से दूसरों के लिए समर्पित करना।
- एकता और समर्पण: जीवन की कठिनाइयों में एकजुट होकर आगे बढ़ना और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना।
- देशभक्ति की झलक: अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं में देश के प्रति गहरा प्रेम और त्याग दिखाई देता है, जो उनके जीवन और काव्य में स्पष्ट है।
त्वरित संदर्भ
- लेखक: अटल बिहारी वाजपेयी
- कविता का मुख्य विषय: जीवन की कठिनाइयों में एकता और धैर्य से आगे बढ़ना
- मुख्य अलंकार: अनुप्रास, उपमा, यमक, पुनरुक्ति
- प्रमुख पंक्ति: "कदम मिलाकर चलना होगा"
शब्दावली
- प्रलय: विनाश या बड़ी आपदा
- अंगारे: जलते हुए कोयले
- ज्वालाएँ: आग की लपटें
- बलिदान: अपने लिए कुछ छोड़कर दूसरों के लिए त्याग करना
- उद्यान: बगीचा
- वीरान: सुनसान, खाली जगह
- मस्तक: सिर
- असफल: जो सफल न हो
- पावस: वर्षा, बारिश
- आहुति: बलिदान, समर्पण
